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PMNCH: 2022 में 274 मिलियन लोगों को होगी मानवीय सहायता की जरूरत, हिंसा से बचने के लिए उपाय करने की आवश्यकता
Sat, 27 Aug 2022 10:37 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 27 Aug 2022 10:37 PM IST
सार
पीएमएनसीएच ने कहा कि मानवीय संदर्भों में यौन और लिंग आधारित हिंसा को रोकने और प्रतिबंधित करने के लिए लक्षित कार्रवाई हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है।
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पीएमएनसीएच
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
साल 2022 में 274 मिलियन (27 करोड़ 4 लाख) लोगों को मानवीय सहायता और सुरक्षा आवश्यकता होगी। इसकी तुलना में एक साल पहले यह संख्या 235 मिलियन थी। पार्टनरशिप फॉर मैटरनल, न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हेल्थ (पीएमएनसीए) ने यह जानकारी दी है।
पीएमएनसीएच को महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा अलायंस कहा जाता है। इसने कहा कि संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 संकट के बीच दक्षिण एशिया सहित दुनियाभर में कमजोर महिलाओं, बच्चों और किशोरों के खिलाफ यौन और लिंग आधारित हिंसा के मामले बढ़े हैं।
एक साल में बढ़ा आंकड़ा, दशकों का रिकॉर्ड टूटा
पीएमएनसीएच ने एक बयान में कहा कि 2022 में लगभग 274 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता और सुरक्षा की आवश्यकता होगी। यह संख्या एक साल पहले 235 मिलियन लोगों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है, जो पहले से ही दशकों में सबसे बड़ा आंकड़ा था।
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15-49 आयु वर्ग की एक तिहाई महिलाओं ने किया यौन हिंसा का अनुभव
बयान में आगे कहा गया है, "वैश्विक अनुमान बताते हैं कि 15 से 49 आयु वर्ग की लगभग एक-तिहाई महिलाओं और लड़कियों ने अपने जीवनकाल में शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया है। मानवीय संदर्भों में यौन और लिंग आधारित हिंसा का खतरा बढ़ गया है।"
यौन और लिंग आधारित हिंसा के जोखिम का बढ़ा दायरा
यौन और लिंग आधारित हिंसा (एसजीबीवी) का जोखिम और दायरा दुनियाभर में कोविड-19 से लेकर जलवायु परिवर्तन और संघर्षों के अभूतपूर्व संकटों से बढ़ रहा है।
हिंसा से सुरक्षा पर एक प्रतिशत से भी कम खर्च किया जाता है
बयान में कहा गया है, वैश्विक मानवीय वित्तीय सहायता का एक प्रतिशत से भी कम यौन और लिंग आधारित हिंसा से सुरक्षा पर खर्च किया जाता है। इसलिए मानवीय संदर्भों में यौन और लिंग आधारित हिंसा को रोकने और प्रतिबंधित करने के लिए लक्षित कार्रवाई हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। पीएमएनसीएच ने कहा कि यह महिलाओं, बच्चों और किशोरों को सबसे ज्यादा लक्षित करता है।
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पीएमएनसीएच को महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा अलायंस कहा जाता है। इसने कहा कि संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 संकट के बीच दक्षिण एशिया सहित दुनियाभर में कमजोर महिलाओं, बच्चों और किशोरों के खिलाफ यौन और लिंग आधारित हिंसा के मामले बढ़े हैं।
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एक साल में बढ़ा आंकड़ा, दशकों का रिकॉर्ड टूटा
पीएमएनसीएच ने एक बयान में कहा कि 2022 में लगभग 274 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता और सुरक्षा की आवश्यकता होगी। यह संख्या एक साल पहले 235 मिलियन लोगों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है, जो पहले से ही दशकों में सबसे बड़ा आंकड़ा था।
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15-49 आयु वर्ग की एक तिहाई महिलाओं ने किया यौन हिंसा का अनुभव
बयान में आगे कहा गया है, "वैश्विक अनुमान बताते हैं कि 15 से 49 आयु वर्ग की लगभग एक-तिहाई महिलाओं और लड़कियों ने अपने जीवनकाल में शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया है। मानवीय संदर्भों में यौन और लिंग आधारित हिंसा का खतरा बढ़ गया है।"
यौन और लिंग आधारित हिंसा के जोखिम का बढ़ा दायरा
यौन और लिंग आधारित हिंसा (एसजीबीवी) का जोखिम और दायरा दुनियाभर में कोविड-19 से लेकर जलवायु परिवर्तन और संघर्षों के अभूतपूर्व संकटों से बढ़ रहा है।
हिंसा से सुरक्षा पर एक प्रतिशत से भी कम खर्च किया जाता है
बयान में कहा गया है, वैश्विक मानवीय वित्तीय सहायता का एक प्रतिशत से भी कम यौन और लिंग आधारित हिंसा से सुरक्षा पर खर्च किया जाता है। इसलिए मानवीय संदर्भों में यौन और लिंग आधारित हिंसा को रोकने और प्रतिबंधित करने के लिए लक्षित कार्रवाई हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। पीएमएनसीएच ने कहा कि यह महिलाओं, बच्चों और किशोरों को सबसे ज्यादा लक्षित करता है।