26/11 का वो काला दिन जब आतंकी हमले से दहल गई मुंबई, तीन दिन चला ऑपरेशन
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आज देश 26/11 हमले में शहीद हुए जवानों और मारे गए लोगों को याद कर रहा है। वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मरीन ड्राइव में पुलिस मेमोरियल जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। आइए जानते हैं मुंबई में क्या हुआ था उस दिन।
Mumbai: Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis and Governor Bhagat Singh Koshyari pay tribute at Police Memorial at Marine Drive on 11th anniversary of 26/11 #MumbaiTerrorAttack, today pic.twitter.com/6czKcGvcy5
— ANI (@ANI) November 26, 2019विज्ञापन
26 नवंबर 2008 की शाम तक मुंबई में हर-रोज की तरह चहलकदमी कर रही थी। शहर के हालात पूरे तरह सामान्य थे। लोग बाजारों में खरीदारी कर रहे थे। वहीं, कुछ लोग मरीन ड्राइव पर रोज की तरह समुद्र से आ रही ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे मुंबई रात के अंधेरे की तरफ बढ़ना शुरू हुई, वैसे-वैसे मुंबई की सड़कों पर चीख-पुकार तेज होती चली गई।
पाकिस्तान से आए जैश-ए-मोहम्मद के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया था। इस आतंकी हमले को आज 11 साल हो गए हैं लेकिन यह भारतीय इतिहास का वो काला दिन है जिसे कोई चाह कर भी नहीं भूल सकता। हथियारों से लैस इन आतंकियों के हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए और 300 ज्यादा लोग घायल हुए थे।
पढ़े हमले की पूरी कहानी
कराची से रास्ते मुंबई आए थे आतंकी
इस हमले की शुरुआत कुछ इस तरह हुए हमले से तीन दिन पहले यानि 23 नवंबर को कराची से नाव के रास्ते ये आतंकी मुंबई में घुसें। ये भारतीय नाव से मुंबई पहुंचे थे। जिस भारतीय नाव पर ये आतंकी सवार थे, उस पर इन्होंने कब्जा किया था और उस पर सवार चार भारतीयों को मौत के घाट उतार दिया था। रात के तकरीबन आठ बजे ये हमलावर कोलाबा के पास कफ परेड के मछली बाजार पर उतरे। वहां से वे चार समूहों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी मंजिलों का रूख किया।
मछुवारों को इनके आतंकी होने पर हुआ था शक
बताया जाता है कि इन लोगों को मछली बाजार में उतरते देख वहां के कुछ मछुवारों को शक भी हुआ था और उन्होंने इस बात की जानकारी पुलिस को भी दी थी। लेकिन इलाक़े की पुलिस ने इस पर कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी और न ही आगे बड़े अधिकारियों या खुफिया बलों को जानकारी दी।
छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर गोलीबारी में 52 लोग मारे गए
पुलिस को रात के साढ़े नौ बजे छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर गोलीबारी की खबर मिली। बताया गया कि यहां रेलवे स्टेशन के मुख्य हॉल में दो हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की है। इन हमलावरों में एक हमलावर मुहम्मद अजमल कसाब था जिसे अब फांसी दी जा चुकी है। दोनों हमलावरों ने एके 47 राइफलों से 15 मिनट गोलीबारी कर 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 100 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था।
मुंबई के कई नामचीन जगहों पर हुई गोलीबारी
लेकिन आंतकियों को यह गोलीबारी सिर्फ शिवाजी टर्मिनल तक सीमित नहीं था। दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ट कैफे भी उन चंद जगहों में से एक था जो इस आतंकी हमले का निशाना बना। यह मुंबई के नामचीन रेस्त्रांओं में से एक है, इसलिए वहां हुई गोलीबारी में मारे गए 10 लोगों में कई विदेशी भी शामिल थे जबकि बहुत से घायल भी हुए। 1871 से मेहमानों की खातिरदारी कर रहे लियोपोल्ड कैफे की दीवारों में धंसी गोलियां हमले के निशान छोड़ गईं।
रात साढे़ 10 बजे खबर आई कि विले पारले इलाके में एक टैक्सी को बम से उड़ा दिया गया है जिसमें ड्राइवर और एक यात्री मारा गया है, तो इससे पंद्रह बीस मिनट पहले बोरीबंदर से भी इसी तरह के धमाके की खबर आई जिसमें एक टैक्सी ड्राइवर और दो यात्रियों की जानें जा चुकी थीं। इन हमलों में तकरीबन 15 घायल भी हुए।
26/11 के तीन बड़े मोर्चे
आतंक की यह कहानी अगर यही खत्म हो जाती तो शायद दुनिया मुंबई हमलों से उतना न दहलती। 26/11 के तीन बड़े मोर्चों में मुंबई का ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस शामिल था। जब हमला हुआ तो ताज में 450 और ओबेरॉय में 380 मेहमान मौजूद थे। खासतौर से ताज होटल की इमारत से निकलता धुंआ तो बाद में हमलों की पहचान बन गया।
मीडिया की लाइव कवरेज से आंतकियों को मिली मदद
हमले की अगली सुबह यानी 27 नवंबर को खबर मिली कि ताज होटल के सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है, लेकिन बाद में खबर मिली कि हमलावरों ने अभी कुछ बंधकों को कब्जे में रखा हुआ हैं जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं। हमलों के दौरान दोनों ही होटल रैपिड एक्शन फोर्ड (आरपीएफ), मैरीन कमांडो और नेशनल सिक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) कमांडो से घिरे रहे। मीडिया की लाइव कवरेज से आतंकवादियों को खासी मदद मिली क्योंकि उन्हें सुरक्षा बलों की हर हरकत के बारे में टीवी पर पता चल रहा था।
तीन दिनों तक चली सुरक्षा बलों की कार्रवाई
सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच तीन दिनों तक मुठभेड़ चलती रही। इस दौरान, मुंबई में धमाके हुए, आग लगी, गोलियां चली और बंधकों को लेकर उम्मीद टूटती जुड़ती रही और ना सिर्फ भारत से सवा अरब लोगों की बल्कि दुनिया भर की नजरें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी रहीं।
हमले के दौरान होटल में मौजूद थे कई लोग
जिस दिन ताज होटल पर हमला हुआ, उस दिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार संघ की संसदीय समिति के कई सदस्य होटल में ठहरे हुए थे, हालांकि इनमें से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। हमलों की जब शुरुआत हुई तो यूरोपीय संसद के ब्रिटिश सदस्य सज्जाद करीम ताज की लॉबी में थे तो जर्मन सांसद एरिका मान को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपना पड़ा। ओबेरॉय में मौजूद लोगों में भी कई जाने माने लोग थे। इनमें भारतीय सांसद एनएन कृष्णादास भी शामिल थे जो ब्रिटेन के जाने माने कारोबारी सर गुलाम नून के साथ रात्रिभोज कर रहे थे।
हमलावरों ने नरीमन पॉइंट को भी कब्जे में कर लिया था
दो हमलावरों ने मुंबई में यहूदियों के मुख्य केंद्र नरीमन पॉइंट को भी अपने कब्जे में कर रखा था। साथ कई लोगों को बंधक बनाया गया। फिर एनएसजी के कमांडोज ने नरीमन हाउस पर धावा बोला और घंटों चली लड़ाई के बाद हमलावरों का सफाया किया गया लेकिन एक एनएसजी कमांडो की भी जान गई। हमलावरों ने इससे पहले ही रब्बी गैव्रिएल होल्ट्जबर्ग और छह महीने की उनकी गर्भवती पत्नी रिवकाह होल्ट्जबर्ग समेत कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया। बाद में सुरक्षा बलों को वहां से कुल छह बंधकों की लाशें मिली।
हमले में 160 लोगों से ज्यादा लोगों की जान चली गईं
29 नवंबर की सुबह तक 9 हमलावरों का सफाया हो चुका था और अजमल कसाब के तौर पर एक हमलावर पुलिस की गिरफ्त में था। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ चुकी थी लेकिन लगभग 160 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी।