17th Lok Sabha: युवा-लिंगानुपात के दृष्टिकोण से बेहतर रही 17वीं लोकसभा, जानें सदन से जुड़े आंकड़े
17वीं लोकसभा के अंतिम सत्र का आज आखिरी दिन था। पीएम मोदी सदन को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा में कई बड़े फैसले लिए, जिसका भावी पीढ़ी को लाभ मिलेगा।17वीं लोकसभा के आंकड़े से पता चला कि यह बेहतर शिक्षा, बेहतर लिंग अनुपात वाला एक सदन था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
17वीं लोकसभा में भाजपा रही मजबूत पार्टी
17वीं लोकसभा का गठन 2019 में हुआ था, जिसमें भाजपा सबसे बडी़ पार्टी के तौर पर 303 सदस्य के साथ सदन में आए थे। हालांकि सदन के अंतिम सत्र यह संख्या घटकर 290 हो गई। जिसका मुख्य कारण हाल के विधानसभा चुनावों के बाद कुछ सांसदों के इस्तीफे थे।
2019 में राष्ट्रीय दलों से कुल 397 सांसद चुने गए, जिनमें कांग्रेस के 52 शामिल हैं, जिसके अब 48 सांसद हैं। टीएमसी की सीटें 22 पर बनी हुई हैं, हालांकि इसे अब एक क्षेत्रीय पार्टी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। राज्य की पार्टियों में, डीएमके की संख्या 24 है, जो 17वीं लोकसभा की शुरुआत में 23 थी, जबकि वाईएसआरसीपी ने अपनी संख्या 22 पर बरकरार रखी है। 17वीं लोकसभा में 70 वर्ष से अधिक के कम और 40 वर्ष से कम के सांसद अधिक थे, जबकि इसकी औसत आयु लगभग 54 वर्ष थी।
चंद्रानी मुर्मू सबसे कम उम्र की सदस्य थी
क्योंझर निर्वाचन क्षेत्र से बीजेडी की चंद्रानी मुर्मू सदन की सबसे कम उम्र की सदस्य थीं, जो 2019 में 25 साल, 11 महीने की उम्र में चुनी गईं और संभल निर्वाचन क्षेत्र से एसपी के शफीकुर रहमान बर्क सबसे उम्रदराज सांसद थे। 17वीं लोकसभा में महिला सांसद अपने पुरुष की तुलना में औसतन कम उम्र की थीं। 2019 के आम चुनाव में 716 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से 78 17वीं लोकसभा के लिए चुनी गईं, अब यह 77 है। 2014 में 62 महिला सांसद चुनी गई थी।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक 17वीं लोकसभा की 2019-2024 के पांच साल के कार्यकाल में कुल मिलाकर 272 बैठकें हुईं। सबसे कम बैठकें 12वीं लोकसभा में हुईं थीं। जिसमें 13 महीने की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार गिरने से सिर्फ 88 बैठकें ही हो सकी थीं। पीआरएस के अनुसार, 16वीं लोकसभा में 331 बैठकें हुईं, जबकि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के तहत 15वीं और 14वीं लोकसभा में क्रमशः 332 और 356 बैठकें हुईं। वहीं तय समय से एक साल पहले भंग की गई चौथी लोकसभा में 469 बैठकें हुई थीं। जबकि पूर्ण कार्यकाल वाली पांचवीं लोकसभा में 613 बैठकें हुईं।
राज्यसभा का बजट सत्र शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। इस मौके पर सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही के बारे में विस्तार से जानकारी सदन के साथ साझा की। नौ दिन के सत्र में उच्च सदन की कुल उत्पादकता 137 फीसदी रही। इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सत्र में, सात विधेयक पारित किये गए और 22 निजी सदस्यों के विधेयक भी पेश किए गए। सत्र में 90 तारांकित और 960 अतारांकित प्रश्नों के उत्तर दिए गए। इसके साथ-साथ सार्वजनिक महत्व के 116 मुद्दों पर चर्चा की गई। सांसदों ने हिंदी और अंग्रेजी में एक साथ अनुवाद के साथ 15 क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी बात रखी। यह राज्यसभा का 263वां सत्र है जो आम चुनावों से पहले का आखिरी सत्र है।
पांच वर्ष में 221 विधेयक किए गए पारित
17वीं लोकसभा की उत्पादकता 97 प्रतिशत रही। पीएम मोदी ने कहा, हमारा संकल्प है, 18वीं लोकसभा में उत्पादकता 100 प्रतिशत होनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने बताया, पांच वर्ष में सदन ने 221 विधेयक पारित किए। हालांकि, इसी लोकसभा में 95 सांसदों का निलंबन हुआ, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। नया भवन व धर्मगुरुओं की मौजूदगी में सेंगोल की स्थापना भी उल्लेखनीय रही।