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पाकिस्तान से भारत आएगी 15 लाख मीट्रिक टन चीनी, डरे स्वदेशी चीनी उत्पादक
सुरेंद्र मिश्र / नागपुर
Updated Fri, 15 Dec 2017 01:33 AM IST
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चीनी
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पाकिस्तान इस साल 15 लाख टन चीनी का निर्यात करने वाला है। स्वाभाविक है कि भारत उसके लिए सबसे मुनासिब बाजार है। ऐसे में स्वदेशी चीनी मिल मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं, किसानों के भी अच्छे दिन नहीं आएंगे। बीते 20 दिनों में चीनी के थोक भाव गिरे हैं, जबकि इसका ग्राहकों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। अब महाराष्ट्र के चीनी मिल मालिकों ने इसकी जांच की मांग की है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सहकारिता मंत्री हर्षवर्धन पाटिल की पश्चिम महाराष्ट्र में तीन चीनी मिले हैं। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि पाकिस्तान ने इस साल 15 लाख टन चीनी निर्यात का लक्ष्य रखा है। पाकिस्तान ने प्रति मैट्रिक टन चीनी निर्यात पर 125 रुपये ट्रांसपोर्ट सब्सिडी भी घोषित की है। पहले भी बाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तानी चीनी भारत आती रही है। जो पंजाब और हरियाणा से होकर दिल्ली पहुंचती है। वहीं, महाराष्ट्र राज्य शक्कर संघ के प्रबंध निदेशक संजय खताल ने बताया कि जब पाकिस्तान से चीनी सस्ते में मिल रही है तो ट्रेडर्स वहां की शक्कर खरीदेंगे ही। इससे स्वदेशी चीनी मिल मालिकों व किसानों की परेशानी लाजिमी है।
पढ़ें- इस साल सस्ती मिलेगी चीनी, जल्द पेराई से 79 फीसदी बढ़ा उत्पादन
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उत्तर प्रदेश में जहां इस साल 100 मीट्रिक टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है वहीं, महाराष्ट्र में 75 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन की संभावना है। तीन साल के बाद इस वर्ष देश में भी गन्ने का अच्छा उत्पादन हुआ है। लेकिन, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश होने के बावजूद भारत में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध है। दूसरी ओर, बीते 20 दिनों के भीतर प्रति क्विंटल 500 रुपये की गिरावट आई है। चीनी का अतिरिक्त स्टाक भारी मात्रा में होने के प्रचार के चलते कीमतों में गिरावट आ रही है जबकि लंदन व न्यूयार्क का बाजार स्थिर बना हुआ है।
फिलीपींस और ईरान की तर्ज पर लगे आयात पर पाबंदी
महाराष्ट्र राज्य शक्कर संघ के आंकड़ों पर गौर करें तो देश में सालाना 250 मीट्रिक टन चीनी की जरूरत होती है। लेकिन, इस बार 280 मीट्रिक टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है। फिलीपींस और ईरान ने अपने यहां चीनी के आयात पर पाबंदी लगा दी है। पाटिल ने कहा कि भारत सरकार को भी इस तरह के कदम उठाना चाहिए। यूपीए सरकार के समय विदेशों को चीनी निर्यात किए गए थे। इससे गन्ना किसानों को लाभ हुआ था। परंतु, मोदी सरकार में चीनी का निर्यात बंद है।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सहकारिता मंत्री हर्षवर्धन पाटिल की पश्चिम महाराष्ट्र में तीन चीनी मिले हैं। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि पाकिस्तान ने इस साल 15 लाख टन चीनी निर्यात का लक्ष्य रखा है। पाकिस्तान ने प्रति मैट्रिक टन चीनी निर्यात पर 125 रुपये ट्रांसपोर्ट सब्सिडी भी घोषित की है। पहले भी बाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तानी चीनी भारत आती रही है। जो पंजाब और हरियाणा से होकर दिल्ली पहुंचती है। वहीं, महाराष्ट्र राज्य शक्कर संघ के प्रबंध निदेशक संजय खताल ने बताया कि जब पाकिस्तान से चीनी सस्ते में मिल रही है तो ट्रेडर्स वहां की शक्कर खरीदेंगे ही। इससे स्वदेशी चीनी मिल मालिकों व किसानों की परेशानी लाजिमी है।
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उत्तर प्रदेश में जहां इस साल 100 मीट्रिक टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है वहीं, महाराष्ट्र में 75 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन की संभावना है। तीन साल के बाद इस वर्ष देश में भी गन्ने का अच्छा उत्पादन हुआ है। लेकिन, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश होने के बावजूद भारत में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध है। दूसरी ओर, बीते 20 दिनों के भीतर प्रति क्विंटल 500 रुपये की गिरावट आई है। चीनी का अतिरिक्त स्टाक भारी मात्रा में होने के प्रचार के चलते कीमतों में गिरावट आ रही है जबकि लंदन व न्यूयार्क का बाजार स्थिर बना हुआ है।
फिलीपींस और ईरान की तर्ज पर लगे आयात पर पाबंदी
महाराष्ट्र राज्य शक्कर संघ के आंकड़ों पर गौर करें तो देश में सालाना 250 मीट्रिक टन चीनी की जरूरत होती है। लेकिन, इस बार 280 मीट्रिक टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है। फिलीपींस और ईरान ने अपने यहां चीनी के आयात पर पाबंदी लगा दी है। पाटिल ने कहा कि भारत सरकार को भी इस तरह के कदम उठाना चाहिए। यूपीए सरकार के समय विदेशों को चीनी निर्यात किए गए थे। इससे गन्ना किसानों को लाभ हुआ था। परंतु, मोदी सरकार में चीनी का निर्यात बंद है।