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कंजूस बाप के राज में कैसे खाएं घी
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jul 2016 05:11 PM IST
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एक आदमी महा कंजूस था। उसने एक शीशी में घी भर कर उसका मुँह बंद करके रखा हुआ था। जब वह और उसके बेटे खाना खाते, तब शीशी को रोटी से रगड़ कर खाना खा लेते थे।
एक बार कंजूस किसी काम से बाहर चला गया। लौटने पर उसने बेटों से पूछा, "खाना खा लिया था।"
बेटे बोले- हाँ पिताजी।
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एक बार कंजूस किसी काम से बाहर चला गया। लौटने पर उसने बेटों से पूछा, "खाना खा लिया था।"
बेटे बोले- हाँ पिताजी।
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नालायकों क्या कर डाला तुमने
कंजूस: पर शीशी तो मैं अलमारी में बंद करके गया था।
बेटे बोले: हमने अलमारी के हैंडल से रोटियाँ रगड़ कर खा लीं।
कंजूस नाराज हो कर बोला: नालायकों, क्या तुम लोग एक दिन बिना घी के खाना नहीं खा सकते थे।
बेटे बोले: हमने अलमारी के हैंडल से रोटियाँ रगड़ कर खा लीं।
कंजूस नाराज हो कर बोला: नालायकों, क्या तुम लोग एक दिन बिना घी के खाना नहीं खा सकते थे।