{"_id":"577f8aad4f1c1be42f7faf00","slug":"joke-on-miser","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कंजूस बाप के राज में कैसे खाएं घी","category":{"title":"Jokes","title_hn":"जोक्स ","slug":"jokes"}}
कंजूस बाप के राज में कैसे खाएं घी
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jul 2016 05:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक आदमी महा कंजूस था। उसने एक शीशी में घी भर कर उसका मुँह बंद करके रखा हुआ था। जब वह और उसके बेटे खाना खाते, तब शीशी को रोटी से रगड़ कर खाना खा लेते थे।
एक बार कंजूस किसी काम से बाहर चला गया। लौटने पर उसने बेटों से पूछा, "खाना खा लिया था।"
बेटे बोले- हाँ पिताजी।
विज्ञापन
एक बार कंजूस किसी काम से बाहर चला गया। लौटने पर उसने बेटों से पूछा, "खाना खा लिया था।"
बेटे बोले- हाँ पिताजी।
नालायकों क्या कर डाला तुमने
कंजूस: पर शीशी तो मैं अलमारी में बंद करके गया था।
बेटे बोले: हमने अलमारी के हैंडल से रोटियाँ रगड़ कर खा लीं।
कंजूस नाराज हो कर बोला: नालायकों, क्या तुम लोग एक दिन बिना घी के खाना नहीं खा सकते थे।
बेटे बोले: हमने अलमारी के हैंडल से रोटियाँ रगड़ कर खा लीं।
कंजूस नाराज हो कर बोला: नालायकों, क्या तुम लोग एक दिन बिना घी के खाना नहीं खा सकते थे।