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कारसेवा: जिद कर पति के साथ निकली थीं शारदा देवी, अयोध्या का सफर रहा कठिन, लेकिन यादें आज भी ताजा

Mon, 08 Jan 2024 11:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो धर्मबीर मोर्य, ऐलनाबाद (सिरसा)
धर्मबीर मोर्य, ऐलनाबाद (सिरसा) Updated Mon, 08 Jan 2024 11:24 AM IST
सार

ऐलनाबाद से गए रवि नाम के व्यक्ति को दीवार पार करते समय काफी चोट लग गई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। शारदा देवी ने बताया कि गांव से भागते-भागते हम सभी एक फार्म में पहुंचे, जहां पर एक संत ने हमें सुरक्षा का आश्वासन देते हुए हौसला दिया।

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Sharda Devi insisted on going out with her husband, journey to Ayodhya difficult, but memories still fresh
शारदा देवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिरसा से 1992 में कारसेवा के लिए दो महिलाओं सहित 18 सेवक अयोध्या गए थे। सात दिनों की कारसेवा यात्रा को वे आज भी भूले नहीं हैं। ट्रेन से लोगों के कूदने के साथ ही दलदल में फंसने का सफर आज तक याद है। अयोध्या पहुंचने में करीब एक सप्ताह लग गए थे। श्रीराममंदिर प्राण प्रतिष्ठा की खुशी उनकी आंखों से टपकते आंसुओं में देखी जा सकती है। ऐलनाबाद के स्व. अमरनाथ गोयल की धर्मपत्नी शारदा देवी ने उस समय की यात्रा का वृतांत बताते हुए कहा कि उन्हें जिद करके पति के साथ जाना और कठिनाइयों से श्रीराम जन्मभूमि तक पहुंचना सब याद है।

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कारसेवक शारदा देवी ने बताया कि वर्ष 1992 में पति अमरनाथ गोयल को कारसेवा के लिए अयोध्या जाना था। ऐलनाबाद से कई लोगों ने अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे थे। मैंने भी पति के साथ जाने की जिद की। पति ने मुझे साथ ले जाने से इन्कार कर दिया, लेकिन अयोध्या जाने की जिद पर अड़ी रही। मैंने उनकी एक न सुनी और साथ अयोध्या के लिए चल दी।
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रात में दो महिलाओं और दो बच्चों सहित करीब 18 सेवक रेलवे स्टेशन पहुंचे। फिर ट्रेन से अयोध्या के लिए चल दिए। हम सभी पहले दिल्ली फिर लखनऊ पहुंचे। अयोध्या स्टेशन पर ट्रेन नहीं रुकी तो स्टेशन से निकलने के बाद कुछ दूरी पर किसी ने चेन खींच दी। पुलिस आई और शोर मच गया। शारदा ने बताया कि सभी ट्रेन से उतर गए और गांवों की ओर भागने लगे। ट्रेन पूरी तरह से खाली हो गई। पुलिस ने लोगों पर गोलियां भी चलाई थीं। पूरा दिन और रात भूखे प्यासे भागने के बाद अगली सुबह गोंडा गांव पहुंचे।
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ऐलनाबाद से गए रवि नाम के व्यक्ति को दीवार पार करते समय काफी चोट लग गई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। शारदा देवी ने बताया कि गांव से भागते-भागते हम सभी एक फार्म में पहुंचे, जहां पर एक संत ने हमें सुरक्षा का आश्वासन देते हुए हौसला दिया। यहां हम सभी पूरे दो दिन रुके और भोजन किया।


शारदा ने बताया कि पुलिस के आने की सूचना मिलने के साथ ही हम सभी पैदल अयोध्या के लिए रवाना हो गए। सभी हनुमानगढ़ी पहुंचे और एक रात मंदिर में गुजारी। वहां से हम सभी पैदल सरयू नदी के पास पहुंचे। नदी में पानी कम और दलदल ज्यादा था, जिसमें कुछ सेवक फंस गए। इन्हें आसपास के कुछ लोगों ने आकर निकाला। इसके बाद हम सभी नाव से दो घंटे का सफर तय कर अयोध्या पहुंचे और एक धर्मशाला में रोका गया। शारदा देवी ने बताया कि वे अयोध्या अपने सात दिनों के सफर में पहुंचे। जब हम अयोध्या से लौट रहे थे तो हमारा जगह-जगह स्वागत किया गया। ऐलनाबाद पहुंचने पर भी हमारा स्वागत किया गया।

ऐलनाबाद से ये गए थे अयोध्या
स्व. अमरनाथ गोयल
शारदा देवी
चाननमल तलवाड़िया
रतन लाल तलवाड़िया
बनवारी लाल तलवाड़िया
डॉ. सुरेंद्र गुप्ता
रवि कुमार
ललिता देवी
रामस्वरूप फौजी और उनके दो बच्चे
सतीश खिचवानिया
दीन दयाल धानुका
विश्वमुनि महाराज
रामलाल मेहता
लक्ष्मण देव मेहता
प्रेम कुमार जोशी
मुरलीधर जोशी
सुभाश हिमानी

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