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Fact Check: पाकिस्तान में महिला की पीटाई के छह साल पुराने वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर किया जा रहा शेयर

Wed, 09 Jul 2025 03:02 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Wed, 09 Jul 2025 03:02 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर हो रहा है, जिसमें एक महिला को बुरी तरह से पीटा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान में हिंदू महिला को पीटा जा रहा है। हमारी पड़ताल में यह वीडियो छह साल पुराना निकला है। 

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Video of a woman brutally beaten up in a court in Pakistan shared with a communal angle
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, इस वीडियो में दिख रहा है कि कुछ वकील और पुलिस कर्मी एक महिला को पीट रहे है। कुछ लोग इसे भारत का वीडियो बता रहे हैं तो कुछ लोग पाकिस्तान का बताकर शेयर कर रहे हैं। वीडियो को शेयर करके सांप्रदायिक एंगल देने की कोशिश की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि जिस महिला की पिटाई हो रही है वह हिंदू है। महिला की बड़ी बहन से जबरन निकाह कर लिया गया है। इसके बाद वह इंसाफ मांगने के लिए कोर्ट पहुंचती है। लेकिन वहां लोग उसे कोर्ट के अंदर घुसने ही नहीं देते हैं। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को भ्रामक पाया है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो 2019 का है। इस घटना का हाल फिलहाल से कोई संबंध नहीं है। साथ ही जांच में महिला की बड़ी बहन का जबरन निकाह करने जैसी कोई जानकारी नहीं मिली है। साथ ही इस घटना में किसी भी सांप्रदायिक के होने की कोई जानकारी नहीं मिली। घटना के पाकिस्तान के होने की जानकारी पड़ताल में साफ है। 

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  क्या है दावा 
  महिला के साथ मारपीट के वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान में हिंदू होने के कारण महिला को कोर्ट के अंदर घुसने से रोका गया। साथ ही उसके साथ बेरहमी से मारपीट भी की गई है। 
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विनि (@Vini__007) नाम के एक एक्स यूजर ने वीडियो को शेयर करके लिखा “हिंदू धर्म की लड़की है इसकी बड़ी बहन को उठाकर जबरदस्ती निकाह कर लिया और छोटी बहन कोर्ट पहुंच गई,,,लेकिन कोर्ट में उसको घुसने ही नहीं दे रहे हैं,,,, मंजर देखिए कैसा? वहाँ कोर्ट में भी उसको नहीं जाने दे रहे हैं,,, धक्के देकर, लात मारकर भगा रहे हैं, हिन्दुओं के लिए वहां कोई लोकतंत्र नहीं, अब समझे CAA/NRC क्यों जरूरी है? फिर भी यहां का हिंदू भाईचारा निभाना चाहता है।" पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल 

वायरल हो रहे दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में वायरल हो रहे वीडियो के कुछ विजुअल मौजूद थे। 31 अक्तूबर 2019 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया था कि “यह घटना शकरगढ़ शहर में एक स्थानीय अदालत के बाहर हुई। शकरगढ़ पुलिस के एक अधिकारी ने इस घटना की पुष्टि की है। यह घटना वकीलों और अम्रत (अदालत में सुनवाई के लिए आई महिला) के बीच झगड़े के बाद घटी।” वीडियो में कहीं भी सांप्रदायिक कारण से महिला का पीटे जाने की बात नहीं कही गई थी। 

  आगे कीवर्ड से सर्च करने पर हमें टाइम्स ऑफ इंडिया का रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट को 30 अक्तूबर 2019 को प्रकाशित करके बताया गया था कि “एक वायरल वीडियो में, पाकिस्तानी वकीलों की भीड़ एक स्थानीय अदालत के बाहर एक महिला को लात-घूंसों से पीटती हुई दिखाई दे रही है, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। यह घटना कथित तौर पर शकरगढ़ में हुई, जहां अमरत नाम की महिला ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। महिला सुनवाई के लिए अदालत में आई थी। महिला का आरोप है कि वकीलों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उस पर हमला किया, जबकि वकीलों का दावा है कि महिला ने पहले उन पर हमला किया था।”

  आगे हमें पाकिस्तान के अखबार डॉन में इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था पुलिस ने भूमि विवाद मामले में एक महिला याचिकाकर्ता और उसके चचेरे भाई की पिटाई करने के आरोप में सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें तीन वकील भी शामिल हैं। इस रिपोर्ट को 31 अक्तूबर 2019 को प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट में आगे बताया गया था कि “शाहपुर भंगू गांव की निवासी अमृत शहज़ादी ज़मीन विवाद के सिलसिले में शकरगढ़ की एक अदालत में गई थीं। वकीलों सहित कुछ लोगों ने उनकी और उनके साथ आए उनके चचेरे भाई अब्दुल कय्यूम की पिटाई कर दी। मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार ने घटना का संज्ञान लिया और जिला पुलिस अधिकारी जुल्फिकार अहमद के आदेश पर पुलिस ने वकील यासिर खान, वसीम लतीफ और आसिफ खान तथा चार अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया।” 

 

पड़ताल का नतीजा

हमारी पड़ताल में यह साफ है वीडियो छह साल पुराना है। महिला अदालत में जमीन से जुड़े विवाद की सुनवाई के लिए पहुंची थी। महिला की हिंदू होने के कारण पिटाई करने का दावा हमारी पड़ताल में गलत साबित हुआ है।

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