Fact Check: उद्धव ठाकरे ने मुंबई में 1992 के दंगों के लिए नहीं मांगी माफी, अखबार की वायरल खबर फर्जी
Fact Check: महाराष्ट्र में चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लेकर एक पोस्ट काफी वायरल हुई। दावा किया जा रहा है कि सीएम ने मुस्लिम नेताओं से 1992 के दंगों में शामिल होने के लिए माफी मांगी। हालांकि, हमारी पड़ताल में वायरल दावा फर्जी निकला।
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विस्तार
क्या है दावा?
इस तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे ने 1992 के दंगों में शामिल होने के लिए मुस्लिम नेताओं से माफी मांगी है।
सनातनी सुरेश के नाम के एक फेसबुक अकाउंट से लिखा गया “कल तक जो शेखी बघार रहे थे कि 1992 के दंगों से मुंबई को शिवसेना ने बचाया, उसी दंगो के लिए आज उद्धव ठाकरे मुस्लिम समाज से माफ़ी मांगते हुए दिख रहे है।”
https://www.facebook.com/photo/?fbid=1285825075928989&set=gm.2033258970460769&idorvanity=346130549173628
वीर बहादुर सिंह “रघुवंशी” (@hariom1259) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “क्या से क्या हो गए ..कल तक जो 1992 के दंगों से मुंबई को बचाने की जिम्मेदारी ले रहे थे, आज उद्धव ठाकरे मुस्लिम समाज से माफ़ी मांगते हुए दिख रहे है।
क्या से क्या हो गए ..
— वीर बहादुर सिंह “रघुवंशी” (@hariom1259) November 19, 2024
कल तक जो 1992 के दंगों से मुंबई को बचाने की जिम्मेदारी ले रहे थे
आज उद्धव ठाकरे मुस्लिम समाज से माफ़ी मांगते हुए दिख रहे है। pic.twitter.com/FlGbQXSYo4
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने इस अखबार की कटिंग को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। ताकि हमें यह खबर पूरी मिल सकें लेकिन हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली। हमें इस कटिंग में राष्ट्रीय उजाला का नाम दिखा। इस नाम को इंटरनेट पर सर्च करने पर हमें पता चला कि ये एक लोकल अखबार है जो नोएडा से प्रकाशित होता है। हमने इसकी वेबसाइट पर जाकर ई-पेपर देखें लेकिन हमें ये खबर नहीं मिली।
आगे हमें इसका फेसबुक अकाउंट मिला यहां 19 नवंबर को वायरल हो रही पेपर कटिंग को गलत बताते हुए लिखा गया था “सूचना सभी को सूचित किया जाता है कि कुछ फेक न्यूज क्लिपिंग सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय उजाला समाचार पत्र के नाम से प्रसारित की जा रही हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि रिपोर्टर्स प्रणव डोगरा और अंकित पाठक का हमारे समाचार पत्र से कोई संबंध नहीं है। कृपया ऐसी भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें और इनकी जानकारी मिलने पर तुरंत हमें सूचित करें। राष्ट्रीय उजाला सत्यता और पत्रकारिता की उच्चतम मान्यताओं का पालन करता है। धन्यवाद, राष्ट्रीय उजाला।"
आगे हमें कीवर्ड से सर्च करने पर भी ऐसी कोई खबर किसी और चैनल पर भी नहीं मिली। लेकिन हमें शिवसेना का इंस्टाग्राम अकाउंट मिला जहां इस अखबार में छपी खबर को गलत बताया गया था। इस अखबार की कटिंग पर भ्रामक लिखा हुआ था साथ ही एक मराठी में एक कैप्शन भी था जिसका हिंदी अनुवाद है “फर्जी खबरों और फर्जी लोगों से सावधान रहें!”
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि ये खबर झूठ है।