Fact Check: भारत में ट्रेन पटरियों के बीच सोलर पैनल लगाए जाने का दावा गलत, पड़ताल में पढ़ें सच
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। तस्वीर में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति ट्रेन का पटरियों पर सोलर पैनल लगाते हुए नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि भारत में ट्रेन की पटरियों पर सोलर पैनल लगाया जा रहा है। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला है।
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विस्तार
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। इस तस्वीर में एक कर्मचारी रेल की पटरियों पर काम करता हुआ नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि वह ट्रेन की पटरियों पर सोलर पैनल लगा रहा है। इस तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि भारत रेल की पटरियों को बिजली संयंत्रों में बदल रहा है। भारत की स्टार्टअप कंपनी सन-वेज रेलवे पटरियों के बीच सौर पैनल लगाने का काम कर रही है। इससे सालाना 1 टेरावॉट-घंटे से अधिक बिजली का उत्पादन हो सकता है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी जांच में यह सामने आया कि रेलवे ट्रैक पर रिमूवेबल सोलर पैनल लगाने का प्रोजेक्ट असल में भारत में नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड में चल रहा है। इस सोलर पैनल को लगाने का काम सन-वेज कंपनी कर रही वो भारत में नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड में है।
क्या है दावा
ट्रेन का पटरियों पर काम करते एक व्यक्ति की तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा है कि भारत में ट्रेन की पटरियों पर सोलर पैनल लगाने का काम किया जा रहा है। ट्रेन पटरियों से भी बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें सूर्या एनर्जी इंडोटामा नाम की एक वेबसाइट मिली। यहां इस तस्वीर को 19 मई 2025 को पोस्ट किया गया था। इसके साथ एक रिपोर्ट भी छपी थी जिसमें लिखा गया था “स्वच्छ ऊर्जा नवाचार अब स्विट्जरलैंड से आ रहा है। अपनी सटीक परिवहन प्रणाली के लिए मशहूर देश ने एक बार फिर सक्रिय रेलवे ट्रैक पर सौर पैनल लगाने की पायलट परियोजना के माध्यम से सफलता हासिल की है। इस परियोजना की शुरुआत सन-वेज नामक स्विस स्टार्टअप ने की थी, जो अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी के विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।”
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल से यह साफ है कि स्विट्जरलैंड की ट्रेन का पटरियों पर लग रहे सोलर पैनल की तस्वीर को भारत का बताकर भ्रामक दावा किया जा रहा है।