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Fact Check: साधुओं की पिटाई के एक साल पुराने वीडियो को गाजियाबाद का बताकर किया जा रहा भ्रामक दावा

Mon, 04 Aug 2025 07:24 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Mon, 04 Aug 2025 07:24 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। वीडियो में कुछ साधुओं को पीटा जा रहा है। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो गाजियाबाद का है। हमारी पड़ताल में वीडियो पुराना और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया का निकला है।   


 

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one year old video of a sadhu being beaten up is being falsely claimed to be from Ghaziabad
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साधुओं को पीटते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग चार साधुओं को पीट रहे हैं। इस वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर गंगनहर में मंदिर के बाहर चेंजिंग रूम में कैमरा लगा हुआ था और कैमरे की सारी गतिविधि महंत मुकेश गोस्वामी के मोबाइल पर दिख रही थी। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में यह सामने आया कि वीडियो 13 जनवरी 2024 से इंटरनेट पर मौजूद है और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया का है।

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  क्या है दावा

साधुओं के पीटने के वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर गंगनहर के मंदिर के बाहर चेंजिंग रूम में कैमरा लगा था। 

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अमित यादव_10 (@Amityadav_7272) नाम के एक एक्स यूजर ने वीडियो को शेयर करके लिखा, “आज के दिन की सबसे बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर गंगनहर के मंदिर के बाहर चेंजिंग रूम में कैमरा लगा मिला और उसका Live फीड महंत मुकेश गोस्वामी के मोबाइल पे था। महंत के mobile से महिलाओं के कपड़े बदलते हुए वीडियो मिली है महंत पर FIR दर्ज महंत हुआ फरार।'' पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

इस तरह के कई और दावों का लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।  

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें भाजपा के आईटी सेल इंचार्ज अमित मालवीय के एक्स अकाउंट पर यह वीडियो 13 जनवरी 2024 को पोस्ट मिला। इस वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया था “पश्चिम बंगाल में साधुओं की लिंचिंग का एक और भयावह वीडियो सामने आया है, जिसमें वर्दी पहने एक व्यक्ति सादे कपड़े पहने साधुओं को दीवार से पीठ टिकाकर बेरहमी से पीटता हुआ दिखाई दे रहा है। क्या ममता बनर्जी ने पुलिस को इस व्यक्ति की पहचान कर उस पर हत्या के प्रयास का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है या वह पहले उसका धर्म जांंच रही हैं?”  

  कीवर्ड के माध्यम से सर्च करने पर हमें यह वीडियो  टाइम्स नाउ के यूट्यूब चैनल पर देखने को मिला। इस वीडियो को को 13 जनवरी 2024 को पोस्ट किया गया था। वीडियो को शेयर करके लिखा गया था “पश्चिम बंगाल में भीड़ द्वारा साधुओं पर हमला किया गया और उनके कपड़े उतारकर उन पर हमला करते हुए देखा गया।” अनुराग ठाकुर ने कहा, "तुष्टिकरण की राजनीति से पैदा हुए माहौल के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं जहां लोग साधुओं पर हमला कर रहे हैं और उनकी हत्या कर रहे हैं। तुष्टिकरण की राजनीति पश्चिम बंगाल सरकार को कहां ले जाएगी?" 

  आगे हमें अमित मालवीय द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो पर न्यूज 18 पर एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि “पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में "छिपे हुए अपहरणकर्ता" होने के संदेह में भीड़ द्वारा तीन साधुओं पर हमला करने का एक कथित वीडियो ऑनलाइन सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद के बाद विपक्षी भाजपा ने राज्य में कानून-व्यवस्था के ध्वस्त होने का आरोप लगाया है।”  


पड़ताल का नतीजा  

हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो 2024 है। इस वीडियो को गाजियाबाद का बताकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो गाजियाबाद का नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल का है।

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