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Hindi News ›   Fact Check ›   Nine-year-old video of police lathicharge goes viral with communal claim

Fact Check: नौ साल पुराने पुलिस के लाठीचार्ज का वीडियो सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल, पढ़े पड़ताल

Sat, 09 Nov 2024 04:40 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 09 Nov 2024 04:40 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। कहा है जा रहा है कि पुलिस ने मुसलमानों पर लाठीचार्ज किया। 

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Nine-year-old video of police lathicharge goes viral with communal claim
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोगों की भीड़ को पुलिस मार कर भगा रही है। 
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क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि पुलिस मुसलमानों को लाठी से मार रही है। कहा जा रहा है कि भारतीय प्रशासन द्वारा मुसलमानों पर हमला किया जा रहा है। 

शोभनाथ राव (@ShobhnathRao) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “भारतीय मुसलमानों पर प्रशासन द्वारा हमला भी खतरनाक होता है जबकि RSS के दंगाइयों को खुली छूट दी जाती है!! जब कि ये दंगाई पुलिस पर हमला करते हैं तो यहीं पुलिस वाले मार खाकर भी चुप रहते है..वास्तव में देश बदल रहा है...।”
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अहमद हुसैन (@ahmad_H1166) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “भारतीय नाटककारों पर प्रशासन द्वारा हमला भी खतरनाक है जबकि दंगाइयों को खुली छूट दी गयी है!!”
 

पड़ताल 
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां से हमें कई मीडिया वेबसाइट पर ये खबरें मिली। हमें न्यूज़ 18 में छपी हुई एक खबर मिली। इस खबर को 2015 में शेयर किया गया था। खबर के मुताबिक “मदरसा शिक्षक पिछले चार दिनों से पटना के गर्दनीबाग स्थित धरनास्थल पर अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठे थे। मांग पूरी न होते देख ये आक्रोशित हो उठे और विधानसभा का घेराव करने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।”  

आगे हमें टाइम्स ऑफ इंडिया पर भी ये रिपोर्ट मिली। यहां भी इस खबर को 27 अगस्त 2015 को छापा गया था। खबर के मुताबिक “ को पुलिस ने ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के समर्थकों और मदरसा शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया। वे गर्दनीबाग स्टेडियम में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।” 

पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि मामला 2015 का है जिसे अभी सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। 
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