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Fact Check: एसआईआर के खिलाफ किए गए प्रदर्शन के वीडियो को यूजीसी से जोड़कर किया जा रहा शेयर, पढ़ें पड़ताल

Wed, 28 Jan 2026 08:52 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 28 Jan 2026 08:52 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यूजीसी के खिलाफ लोगों ने पीएम मोदी और अमित शाह के पुतले जलाए। हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। 

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Fact Check: SIR protest video being shared with UGC link; read full investigation
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीर पर जूता फेंकते नजर आ रहे। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा कि लोगों ने यूजीसी कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया है। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ किए गए प्रदर्शन का है। 

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दरअसल, इसी महीने यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु “यूजीसी समता विनियम 2026” को अधिसूचित किया। इस नियम का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म करना है। यह नियम अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विकलांग व्यक्तियों को किसी भी तरह के भेदभाव से सुरक्षा देता है। नए नियम को सभी विश्वविद्यालय को लागू करना होगा। इसके बाद से जगह- जगह इस नियम के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे। 

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क्या है दावा 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर दावा किया जा रहा है कि यूजीसी के खिलाफ लोगों ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पुतले पर जूता फेंका और प्रदर्शन किया। 

इंडिया गंठबंधन (@IndiaAllliance) नाम के एक्स यूजर ने लिखा,” मोदी शाह के पोस्टर पर जूते.. UGC के नए कानून के विरोध में देश भर में सामान्य वर्ग (सवर्ण) सड़कों पर उतर आया है। विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पुतलों पर जूते बरसाए जा रहे हैं। ये गलत बात है। देश के नॉन बायोलॉजिकल मुखिया और आधुनिक चाणक्य की तस्वीरों के साथ इस तरह का सुलूक निंदनीय है। किसी भी बात का विरोध गांधीवादी तरीके से होना चाही।" पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

 

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें पत्रुकार नाम के फेसबुक यूजर के अकाउंट पर वायरल वीडियो से संबंधित क्लिप 47 सकेंड तक देखने को मिला। यह वीडियो 20 जनवरी 2026 को साझा किया गया है। इसके साथ ही यहां लिखा है कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के हरिहरपारा में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के विरोध में पुतला जलाकर प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित किया गया था, जिन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल आम मतदाताओं को परेशान करने और चुनिंदा रूप से वास्तविक मतदाताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान, टीएमसी समर्थकों ने विरोध के प्रतीक के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतले जलाए। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करते हुए नारे लगाए और केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

इसके बाद हमें एमएच न्यूज बंगाला नाम के यूट्यूब चैनल पर वायरल वीडियो के क्लिप देखने को मिले। हालांकि यह दूसरे एंगल से लिया गया है। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि हरिहरपारा में एसआईआर सुनवाई के संबंध में अनावश्यक उत्पीड़न के विरोध में पुतला जलाकर प्रदर्शन किया गया।

आगे की पड़ताल के लिए हमने कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें द इंडियन एक्सप्रेस बांगला की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 19 जनवरी 2026 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हरिहरपारा में एसआईआर के नाम पर आम लोगों के उत्पीड़न के आरोपों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। सोमवार दोपहर को विधायक नियामत शेख के नेतृत्व में हरिहरपारा किसान मंडी से एक विशाल विरोध और निंदा जुलूस निकला। जुलूस हरिहरपारा बस स्टैंड पहुंचा और सड़क जाम करके विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गया। विरोध प्रदर्शन में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और चुनाव आयुक्त के पुतले जलाए गए। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि एसआईआर के नाम पर आम जनता को बेवजह परेशान किया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। इसी दिन प्रदर्शनकारियों की ओर से डीएसपी तमाल कुमार बिस्वास को एक ज्ञापन सौंपा गया। ईआरओ और बीडीओ को भी अलग-अलग ज्ञापन दिए गए।

 

पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को एसआईआर प्रदर्शन का पाया है।

 

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