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UP: एमएलसी लालजी निर्मल बोले- अखिलेश यादव का मुस्लिम प्रेम और दलित विरोध लगातार हो रहा जगजाहिर
Mon, 20 Apr 2026 02:26 PM IST
Kirtivardhan Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Mon, 20 Apr 2026 02:26 PM IST
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लालजी निर्मल का अखिलेश यादव पर वार।
- फोटो : Facebook/PTI
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यूपी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्व चेयरमैन और विधान परिषद के सदस्य डॉ. लालजी निर्मल ने कहा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव का मुस्लिम प्रेम और दलित विरोध लगातार जगजाहिर हो रहा है। वे मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसी कई शिक्षण संस्थाओं में दलितों और पिछड़ों का हक मारे जाने पर खामोश रहते हैं।
उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए अखिलेश यादव ने यूपी में दलितों के आरक्षण और दलित निवारण अत्याचार अधिनियम को निष्प्रभावी किया। प्रमोशन में आरक्षण को खत्म करके हजारों दलित वर्ग के कार्मिकों को डिमोट कर दिया, जिसका अपमान इस वर्ग के अधिकारी व कर्मचारी अब भी सहन कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए अखिलेश यादव ने यूपी में दलितों के आरक्षण और दलित निवारण अत्याचार अधिनियम को निष्प्रभावी किया। प्रमोशन में आरक्षण को खत्म करके हजारों दलित वर्ग के कार्मिकों को डिमोट कर दिया, जिसका अपमान इस वर्ग के अधिकारी व कर्मचारी अब भी सहन कर रहे हैं।
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डॉ. निर्मल ने कहा कि अखिलेश यादव को तो अल्पसंख्यक संस्थाओं में भी दलित व पिछड़े वर्ग के आरक्षण की मांग करनी चाहिए, लेकिन इसके ठीक उलट वह मुस्लिमों के आरक्षण की मांग कर रहे हैं। वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि मुस्लिमों को आरक्षण देने की उनकी मांग संविधान विरोधी है। इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैधानिक करार दिया है। इसके बावजूद वह मुस्लिमों के आरक्षण की मांग को लगातार दोहरा रहे हैं।
डॉ. निर्मल ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय समेत कई अल्पसंख्यक संस्थाएं जिनमें केन्द्र सरकार के नियमों और शर्तों के साथ ही उनके अनुदान से अच्छादित हैं। ऐसे में इस विश्वविद्यालय में दलितों के लिए आरक्षण न होना, केन्द्र सरकार की नीतियों के विपरीत व संविधान विरोधी है। हम अल्पसंख्यक संस्थाओं में दलितों के लिए आरक्षण की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। अब समय आ गया है कि इन संस्थाओं में भी दलितों व पिछड़ों को आरक्षण का लाभ मिले।
डॉ. निर्मल ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय समेत कई अल्पसंख्यक संस्थाएं जिनमें केन्द्र सरकार के नियमों और शर्तों के साथ ही उनके अनुदान से अच्छादित हैं। ऐसे में इस विश्वविद्यालय में दलितों के लिए आरक्षण न होना, केन्द्र सरकार की नीतियों के विपरीत व संविधान विरोधी है। हम अल्पसंख्यक संस्थाओं में दलितों के लिए आरक्षण की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। अब समय आ गया है कि इन संस्थाओं में भी दलितों व पिछड़ों को आरक्षण का लाभ मिले।