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Mani Ratnam: मणिरत्नम ने मोह लिया IFFI में मन, कहा-'साहित्य के करीब रहकर ही सिनेमा बेहतर बनेगा'

Sat, 23 Nov 2024 12:42 AM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: पूनम कंडारी Updated Sat, 23 Nov 2024 12:42 AM IST
सार

इन दिनों 55वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव गोवा में चल रहा है। हाल ही में निर्माता-निर्देशक मणिरत्नम ने सिनेमा को बेहतर बनाने से जुड़ी कुछ बातें वहां साझा कीं।

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Mani Ratnam Impressed Everyone At IFFI said Cinema Will Become Better By Staying Close To Literature
निर्माता-निर्देशक मणिरत्नम - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में 'साहित्यिक कृतियों को आकर्षक फिल्मों में बदलना' विषय पर एक मास्टरक्लास हुई। इसमें मणिरत्नम भी शामिल रहे। यहां उन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया। निर्देशक गौतम वी. मेनन के साथ बातचीत के दौरान मणिरत्नम ने साहित्य को सिनेमा में ढालने की कला पर चर्चा की। इस बारे में उन्होंने फिल्म निर्माताओं और सिनेमा देखने वालों को एक कीमती सलाह दी। 

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साहित्य और सिनेमा को करीब लाने की बात 
बातचीत में मणिरत्नम कहते हैं, 'मैं अभी भी दर्शकों के बीच बैठा एक आम इंसान हूं। कई मायनों में मैं अभी भी एक नौसिखिया जैसा महसूस करता हूं। इसके अलावा मेरा मानना है कि सिनेमा और साहित्य के बीच का ग्राफ जितना करीब होगा, भारतीय सिनेमा उतना ही बेहतर होगा।' साथ ही मणिरत्नम में इस बात पर भी जोर दिया कि फिल्म निर्माताओं को लिखे हुए शब्दों को आकर्षक दृश्य और कहानियों में बदलने की कला को निखारना चाहिए।

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कल्पनाशील बनने पर जोर दिया
मणिरत्नम साहित्य को फिल्मों में ढालने की बारीकियों पर चर्चा करते हुए आगे कहते हैं, 'फिल्में एक दृश्य माध्यम हैं, जबकि किताबें मुख्य रूप से कल्पनाशील होती हैं। एक फिल्म निर्माता को पाठक की कल्पना को जीवंत करने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।'  मणिरत्नम ने यह भी कहा कि स्क्रिप्ट में समायोजन की जरूरत हो सकती है, लेकिन इन बदलावों से कहानी का सार बदलने के बजाय कहानी को बेहतर बनना चाहिए।

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पोन्नियन सेल्वम पोस्टर- मणिरत्नम - फोटो : इंस्टाग्राम-@ponniyinselvan_movie/ani

प्राचीन भारतीय इतिहास से रहे प्रभावित  
मणिरत्नम ने इसी बातचीत में यह भी बताया कि वह पौराणिक कथाओं और प्राचीन भारतीय इतिहास से प्रभावित हैं। इन चीजों ने उनके दृष्टिकोण को बहुत प्रभावित किया है। ऐसा होने पर उन्हें अपनी फिल्म के पात्रों को अनोखे तरीके से दिखाने में कामयाबी मिली। मणिरत्नम की फिल्म 'पोन्नियिन सेल्वन' उनका ऐसा ही एक बेहतरीन प्रयास रहा। इस फिल्म में वह चोल राजवंश की कहानी को शानदार तरीके से दिखाने में कामयाब रहे। 

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