Rafuchakkar Review: मनीष पॉल की दिखी जबरदस्त अदाकारी, थोड़े से चूक गए सीरीज के निर्देशक
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अभिनेता मनीष पॉल ठग पवन कुमार बावरिया के जीवन पर आधारित सीरीज रफूचक्कर के जरिए ओटीटी प्लेटफार्म पर डेब्यू कर रहे हैं। इस सीरीज में मनीष पॉल ने खुद को जादूगर मानने वाले एक आम आदमी की भूमिका निभाई है, जो भ्रष्ट और अमीर लोगों को करोड़ों का चूना लगाता है। इस सीरीज के लिए मनीष पॉल जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन से गुजरे है, उन्होंने लगभग चार महीनों में इस सीरीज के लिए अपना 10 किलो वजन बढ़ाया और फिर 15 किलो अपना वजन कम किया। देखा जाए बतौर अभिनेता मनीष पॉल को इस सीरीज में सही मौका मिला मिला है। अब तक अपने कॉमिक अंदाज से दर्शकों का मनोरंजन करते आ रहे है मनीष पॉल का इस सीरीज में अभिनय के नए- नए रंग देखने को मिल रहे हैं।
वेब सीरीज 'रफूचक्कर' की शुरुआत नैनीताल से होती है, जब पवन कुमार बावरिया अपने माता- पिता की शादी की सालगिरह मना रहा है। अचानक क्राइम ब्रांच की ऑफिसर शौर्या चौटाला, पवन कुमार बावरिया को देश भर में कई जगह बहरूपिया बनकर करोड़ों की ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करती है। कोर्ट रूम में उसके अलग -अलग ठगी के मामले को लेकर जिरह होती है। पहले एपिसोड में दिल्ली के रसूखदार सर्वेश पठानिया की बेटी को इस्तेमाल करके वह 10 करोड़ का ठगी करता है। इसी तरह से कोर्ट में उसके अलग -अलग ठगी के कारनामों को लेकर दोनों पक्ष के वकील की जिरह होती है।
निर्माता- निर्देशक प्रकाश झा के साथ 'आरक्षण', 'चक्रव्यूह' और 'सत्याग्रह' जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक के तौर पर काम कर चुके रितम श्रीवास्तव एमएक्स प्लेयर के लिए 'रक्तांचल' जैसी सीरीज बना चुके हैं। सच्ची घटनाओं आधारित इस सीरीज के दो सीजन रिलीज हो चुके है। वेब सीरीज 'रफूचक्कर' के जरिए उन्होंने एक बार फिर एक सच्ची कहानी को बहुत ही अच्छे तरीके से पेश करने की कोशिश की है। लेकिन सीरीज के पटकथा और संवाद पर थोड़ी और मेहनत की जानी चाहिए थी। खास करके कोर्ट रूम में चलने वाले चुटकुले के अलावा संवाद थोड़े गंभीर होते तो उसका असर कुछ और ही होता। इस बात फिल्म के निर्देशक रितम श्रीवास्तव को थोड़ा सा ध्यान रखना चाहिए था।
काफी लंबे समय के बाद अभिनेता मनीष पॉल को एक ऐसा किरदार निभाने को मिला है,जिसमे कई शेड्स हैं। कोर्ट के कटघरे में खड़ा होने वाला शख्स पवन कुमार बावरिया को देखकर लगता है कि वह कितना मासूम और भोला भाला है। लेकिन अजय चौहान की भूमिका में 'केजीएफ' के यश की याद दिला जाते हैं। इस सीरीज में मनीष पॉल ने पांच अलग -अलग गेटअप में किरदार को बहुत ही बखूबी से निभाया है। जिसमे एक अधेड़ उम्र के मोटे आदमी से युवा आदमी के किरदार में जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन देखने को मिला है। खास करके जब वह जिम ट्रेनर की भूमिका निभाते हैं, उसमें उनका जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन देखने को मिला है।
वेब सीरीज 'सिटी ऑफ ड्रीम्स 3' में मुख्यमंत्री की भूमिका निभा चुकी प्रिया बापट ने इस सीरीज में वकील रितु अरोड़ा का किरदार निभाया है। इस किरदार में वह बहुत ही इंप्रेसिव लगी है। आकाश दहिया ने पवन कुमार बावरिया के वकील जयदेव की भूमिका निभाई है। कोर्ट रूप में दोनों पक्षों के वकील की जिरह कई ट्विस्ट पैदा करती है। क्राइम ब्रांच की ऑफिसर शौर्या चौटाला की भूमिका में अक्शा पारदर्शनी का काम भी कमाल का है। सुशांत सिंह जैसे मंझे हुए कलाकार सर्वेश पठानिया की भूमिका में उनकी उपस्थिति ही इस सीरीज को खास बनाती है।