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शरारती पर नेकदिल है यह फिल्मी चोर

Fri, 02 Aug 2013 11:53 AM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Fri, 02 Aug 2013 11:53 AM IST
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film review of chor chor superchor

फिर से दिल्ली। फिर से कॉमडी। बॉलीवुड ने सफलता का यह नया समीकरण गढ़ा है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। यहां दिल्ली के जेबतराशों की दुनिया है। लेकिन क्रूर यथार्थ से दो अंगुल की दूरी बनाए हुए। कॉमिक अंदाज में। यह एक नौजवान टीम द्वारा बनाई गई फिल्म है।

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एफटीआईआई, पुणे से ग्रेजुएट युवाओं ने पुरानी दिल्ली को खंगाल कर यह कहानी पर्दे पर रची है। निर्देशक के.राजेश से लेकर नायिकाओं प्रिया बथीजा और परु उमा की यह पहली फिल्म है। ओमकारा से चमकने वाले दीपक डोबरियाल भी पहली बार अकेले दम पर फिल्म को लेकर बॉक्स ऑफिस की डगर पर चल रहे हैं। उनकी अदाकारी फिल्म की ताकत है।
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चोर चोर सुपर चोर ऐसे युवाओं की कहानी है जो लोगों की जेब काटते हैं, ठगते हैं, लूटते हैं, चोरी करते हैं। ये सब उम्रदराज शुक्लाजी के चेले हैं, जो दिखाने के लिए फोटो स्टूडियो चलाते हैं। लेकिन उनका तैयार किया सतबीर (दीपक डोबरियाल) एक दिन यह काम करने से इंकार कर देता है और नेक राह पर चल पड़ता है। इस राह में उसे एक खूबसूरत लड़की नीना (प्रिया बथीजा) मिलती है। सतबीर उसे दिल दे बैठता है। नीना सतबीर के एक संगी की शिकार हो जाती है। लेकिन सतबीर के कारण उसकी अमानत लौट आती है।
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नैना यह जानकर हैरान होती है कि सतबीर को ठगी और लूट जैसे धंधे की बारीकियां पता है। वह हाथ की सफाई के बारे में सब कुछ जानना चाहती है। और जब वह सब कुछ जान जाती है तो कहानी में ट्विस्ट आता है। चोरों के गैंग के साथ उनके प्रतिद्वंद्वी अमोल का भी गैंग है, जो दिल्ली में जमने की कोशिश कर रहा है। जो शुक्लाजी के प्रतिभावान लड़कों को अपने साथ मिलाना चाहता है। वह चाहता है कि हीरे जैसे लड़के चिंदीचोरी से ऊपर उठें। वह उन्हें बड़े अपराध का रास्ता दिखाता है।

इस कहानी के साथ में एक ट्रैक हीरा व्यापारी महाकंजूस पुरुषोत्तमजी का चलता है, जिनका अपहरण हो जाता है मगर वे दमड़ी देने को भी राजी नहीं होते। फिल्म रोचक रास्तों से गुजरती है। दर्शक को अपने साथ लेकर चलती है।


चोर चोर सुपरचोर अपने ट्रीटमेंट में आधुनिक है। निर्देशक की कहानी पर पकड़ बनी रहती है। कलाकारों का काम अच्छा है। भेजा फ्राई और खोसला का घोसला ने जो रास्ता दिखाया था, चोर चोर... उसी दिशा में बढ़ती है। कॉमिक टाइमिंग, परिस्थितियां और संवाद गुदगुदाते हैं। ये चोर माउथ पब्लिसिटी के लिए शोर मचाते हैं।

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