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भरी जवानी में मरी थी ये हीरोइन, मय्यत को बनाया गया दुल्हन

Sun, 20 Dec 2015 11:53 AM IST
Updated Sun, 20 Dec 2015 11:53 AM IST
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Smita patil's life was a series of accidents

भले ही स्मिता पाटिल का फिल्मी सफर सिर्फ 10 साल का रहा है लेकिन काम ऐसा कि आज भी वो चर्चा में रहता है। लेकिन वो ना सिर्फ फिल्मों, बल्कि राज बब्बर से अपने सम्बन्धों की वजह से भी चर्चा में रही।

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सिर्फ 31 साल की उम्र में उनकी अचानक मौत आज भी रहस्यमयी है। पढें: स्मिता पाटिल की जिंदगी की कहानी।

'मुझे याद है जब हम फिल्म मंथन की शूटिंग राजकोट से कहीं बाहर कर रहे थे। शूटिंग के दौरान स्मिता पाटिल गांव की औरतों के साथ उन्हीं केकपडे पहनकर बैठी हुई थीं, वहां पर शूटिंग देखने के लिए कॉलेज के कुछ बच्चे आए और उन्होंने पूछा की इस फिल्म की हीरोइन कहां है? किसी ने स्मिता की तरफ इशारा किया कि वो है, फिल्म की हीरोइन, तो उस स्टूडेंट ने कहा कि क्या तुम मजाक कर रहे हो, ये गांव की औरत किसी बॉम्बे फिल्म की हीरोइन कैसे हो सकती है। यही खासियत थी स्मिता की।
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वो जो भी करती थीं उस रोल में ढल जाती थीं। वो जो भी कैमरे के सामने करतीं वो उसका हिस्सा बन जाता था।' कुछ ऐसे ही किस्सों से फिल्म निर्देशक और स्क्रीन राइटर श्याम बेनेगल स्मिता पाटिल को याद करते हैं।
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अपने सशक्त अभिनय से पहचान बनाने वाली स्मिता पाटिल का जन्म 17 अक्टूबर 1956 में हुआ था। उनका नाम स्मिता रखने जाने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।

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मुस्कान पर रख दिया नाम स्मिता

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असल में जन्म के समय उनके चेहरे पर मुस्कराहट देख कर उनकी मां विद्या ताई पाटिल ने उनका नाम स्मिता रख दिया। यह मुस्कान आगे चलकर भी उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक पहलू बना।

स्मिता पाटिल अपने गंभीर अभिनय के लिए जानी जाती हैं, लेकिन बहुत काम लोग जानते है कि फिल्मी परदे पर सहज और गंभीर दिखने वाली स्मिता पाटिल असल जिंदगी में बहुत शरारती थीं।

स्मिता पाटिल की जीवनी लिखने वाली मैथिलि राव बताती हैं, 'वो निजी जिन्दगी में बहुत साधारण थीं। उनके अंदर ऐसी कोई चाहत नही थीं कि वो कोई बहुत बडी स्टार बनें। जिन्दगी के प्रति गंभीर होने के साथ साथ वो बहुत शरारती थीं, बहुत मस्ती करती थीं, उन्हें गाडी चलाने का बहुत शौक था। यही कारण है कि 14 -15 साल की उम्र में ही उन्होंने चुपके से ड्राइविंग सीख ली।'


स्मिता पाटिल ने अपने छोटे फिल्मी सफर में ऐसी फिल्में की जो भारतीय फिल्मों के इतिहास में मील का पत्थर बन गईं। उनकी छाप छोडने वाली फिल्मों में जहां भूमिका, मंथन, मिर्च मसाला, अर्थ, मंडी और निशांत जैसी कलात्मक फिल्में शामिल हैं, तो दूसरी तरफ नमक हलाल और शक्ति जैसी व्यावसायिक फिल्में भी कतार में है।

फिल्मों से पहले मराठी में पढ़ती थी समाचार

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फिल्मों में आने से पहले स्मिता पाटिल बॉम्बे दूरदर्शन में मराठी में समाचार पढा करती थीं। समाचार पढने से पहले उनके लिए साडी पहनना जरूरी होता था और स्मिता को जीन्स पहनना अच्छा लगता था तो स्मिता अक्सर न्यूज पढने से पहले जीन्स के ऊपर ही साडी लपेट लिया करती थीं। स्मिता के फिल्मी करियर की शुरुआत अरुण खोपकर की डिप्लोमा फिल्म से हुई, लेकिन मुख्यधारा के सिनेमा में स्मिता ने 'चरणदास चोर' से अपनी मौजूदगी दर्ज की। इसके निर्देशक थे श्याम बेनेगल।

वो बताते हैं, 'मैं अपनी फिल्म निशांत के लिए एक नए चेहरे की तलाश में था। मेरे एक साउंड रिकार्डिस्ट हुआ करते थे हितेन्दर घोष वो स्मिता पाटिल के दोस्त थे। हितेन्दर घोष ने मुझे बताया क मेरी एक दोस्त है स्मिता पाटिल। मैं उसके परिवार को जानता हूं।'

'वो पुणे से हैं लेकिन फिलहाल बॉम्बे में हैं और अपने पिता के साथ आयीं हैं। उनके पिता उस समय महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री थे। जब मैं स्मिता से मिला तो मैंने तय किया कि फिल्म निशांत में स्मिता को कास्ट करने से पहले मैं स्मिता का एक छोटा सा ऑडिशन लेना चाहता हूं और मैंने स्मिता को अपनी बाल फिल्म 'चरणदास चोर' में प्रिंसेस के रोल के लिए चुना।

जब गर्मी के बावजूद स्मिता ने किया काम

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वो बताते हैं, जब हम छत्तीसगढ में शूटिंग कर रहे थे तब मैंने पाया कि ये लडकी तो बहुत टैलेंटेड और इसमें भरपूर आत्मविश्वास है। तभी मैंने तय किया कि स्मिता ही मेरी फिल्म निशांत में काम करेंगी।'

साल 1977 स्मिता पाटिल के लिए एक अहम पडाव साबित हुआ इसी साल उनकी फिल्म भूमिका आई इस फिल्म के लिए स्मिता पाटिल को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भूमिका से स्मिता पाटिल का जो सफर शुरू हुआ वो चक्र, निशांत, आक्रोश, गिद्ध, मिर्च मसाला जैसी फिल्मों तक जारी रहा। 1981 में आई फिल्म चक्र के लिए उन्हें एक बार फिर से नेशनल आवर्ड मिला।

फिल्म मिर्च मसाला उनके निधन के बाद रिलीज हुई, लेकिन इस फिल्म में निभाये गए सोन बाई के किरदार को उनके बेहतरीन काम में से एक माना जाता है। इसी फिल्म ने निर्देशक केतन मेहता को अन्तरराष्ट्रीय ख्याति दिलवाई।

केतन मेहता बताते हैं, 'मिर्च मसाला मेरी तीसरी फिल्म थी और जब मुझे पता चला की मेरी स्क्रिप्ट नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन से एप्रूव्ड हो गई है तो मैं लोकेशन देखने गुजरात गया। उस फिल्म में मिर्च का एक अहम रोल है।

जब मैंने वहां जाकर देखा की मिर्च का सीजन शुरू हो चुका है और ये सीजन दो महीने बाद खत्म हो जाएगा तो मैं भाग कर बॉम्बे आया और स्मिता से मिला और ये सारी बातें उन्हें बताईं और कहा कि अगर हम चूके तो अगले साल तक के लिए करना होगा।

स्मिता ने किसी भी तरह और फिल्मों की डेट आगे बढा दी और इस फिल्म की शूटिंग शुरू की।' 'सीन कुछ ऐसे थे कि एक मिर्च फैक्ट्री के अंदर कुछ औरतें काम करती हैं, गर्मी का मौसम था। धूप और गर्मी के बावजूद स्मिता ने बहुत ही स्पिरिट के साथ काम किया और यूनिट के दूसरे लोगों को भी प्रोत्साहित किया।'

राज बब्बर की शादी तुड़वाने का लगा आरोप

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स्मिता पाटिल को जहां उनके किरदारों के लिए सराहा गया वहीं दूसरी तरफ एक्टर और पॉलिटिशियन राज बब्बर से जुडे उनके सम्बन्ध को लेकर उनकी आलोचना भी की गई। उनके बारे में लोगों ने कहा कि उन्होंने राज बब्बर और नादिरा बब्बर की शादी तुडवा दी।

मैथिलि राव इस पर कहती हैं, 'स्मिता पाटिल की मां स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते के खिलाफ थीं। वो कहती थीं कि महिलाओं के अधिकार के लिए लडने वाली स्मिता किसी और का घर कैसे तोड सकती है। स्मिता के लिए उनकी मां रोल मॉडल थीं। उनकी जिन्दगी में मां फैसला बहुत मायने रखता था।

लेकिन राज बब्बर से अपने रिश्ते को लेकर स्मिता ने मां की भी नहीं सुनी। उनकी मां इस बात का दुःख था कि आखिरी समय में उनका रिश्ता अपनी बेटी से खराब हो गया।' प्रतीक के जन्म के कुछ दिनों बाद 13 दिसंबर 1986 को स्मिता का निधन हो गया।

मैथिलि राव कहती हैं, 'स्मिता को वायरल इन्फेक्शन की वजह से ब्रेन इन्फेक्शन हुआ था। प्रतीक के पैदा होने के बाद वो घर आ गई थीं। वो बहुत जल्द हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार नहीं होती थीं, कहती थीं कि मैं अपने बेटे को छोडकर हॉस्पिटल नही जाऊंगी। लेकिन जब ये इन्फेक्शन बहुत बढ गया तो उन्हें जसलोक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। स्मिता के अंग एक के बाद एक फेल होते चले गए।'

जब मर जाऊं तो मुझे दुल्हन बना देना

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हालांकि राजबब्बर के साथ रिश्ता भी कुछ बहुत सहज नहीं रह गया था। स्मिता अपने आखिरी दिनों में बहुत अकेला महसूस करती थीं। राज बब्बर जब हॉस्पिटल में पहुंचे, उस वक्त तक स्मिता ने ये फैसला कर लिया था की वो राज बब्बर से रिश्ता तोड लेंगी।

अपनी किताब लिखते हुए मैथिलि राव को पता लगा की राज बब्बर और स्मिता लिव इन रिलेशनशिप में हैं और राज बब्बर कहते थे कि वो अपनी पत्नी को तलाक देकर स्मिता से शादी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और स्मिता को वो धीरे धीरे अपने फ्रेंड सर्किल से भी दूर रखने लगे थे।

स्मिता पाटिल की एक आखिरी इच्छा थी। उनके मेक अप आर्टिस्ट दीपक सावंत बताते हैं, 'स्मिता कहा करती थीं कि दीपक जब मर जाउंगी तो मुझे सुहागन की तरह तैयार करना।'

स्मिता का मुर्दा शरीर बना दुल्हन

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'एक बार उन्होंने राज कुमार को एक फिल्म में लेटकर मेकअप कराते हुए देखा और मुझे कहने लगीं कि दीपक मेरा इसी तरह से मेक अप करो और मैंने कहा कि मैडम मुझसे ये नहीं होगा। ऐसा लगेगा जैसे किसी मुर्दे का मेकअप कर रहे हैं।'

'ये बहुत दुखद है कि एक दिन मैंने उनका ऐसे ही मेकअप किया। शायद ही दुनिया में ऐसा कोई मेकअप आर्टिस्ट होगा जिसने इस तरह से मेकअप किया हो।' मरने के बाद उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक, स्मिता के शव का सुहागन की तरह मेकअप किया गया।

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