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Bhimsen Joshi: हर देशवासी को 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' से एक सुर में पिरोया, भारत रत्न भीमसेन जोशी के किस्से

Fri, 24 Jan 2025 09:31 AM IST
अंजू बाजपेई एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अंजू बाजपेई Updated Fri, 24 Jan 2025 09:31 AM IST
सार

आज भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी की पुण्यतिथि है। वह भले ही आज हमारे बीच ना हो लेकिन उनका शास्त्रीय संगीत हर हिन्दुस्तानी के दिलों में बसा है।
 

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Pandit Bhimsen Joshi Death Anniversary the greatest Indian vocalists in the Hindustani classical tradition
पंडित भीमसेन जोशी की आज है पुण्यतिथि - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में अपने संगीत को अमर बनाने वाले पंडित भीमसेन जोशी का जन्म कर्नाटक के गड़क में हुआ था। आइए आज उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके संघर्ष की कहानी।
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पहली प्रस्तुति
भीमसेन जोशी ने 19 साल की उम्र में अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। उनका पहला एल्बम 20 साल की उम्र में आया, जिसमें कन्नड़ और हिन्दी में कुछ धार्मिक गीत थे। उन्होंने अपने शुरुआती संघर्ष भरे जीवन में रेडियो कलाकार के तौर पर मुंबई में काम किया।
 
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गुरु की खोज में पंडित भीमसेन जोशी
पंडित भीमसेन जोशी को बचपन से ही संगीत का बहुत शौक था। वह गुरु की तलाश में घर से निकले और जा पहुंचे अब्दुल करीम खान के पास। इसके बाद अगले दो सालों तक वह बीजापुर, पुणे और ग्वालियर में रहे। उन्होंने ग्वालियर के उस्ताद हाफिज अली खान से भी संगीत की शिक्षा ली। उन्होंने पंडित रामभाऊ कुंदगोलकर से शास्त्रीय संगीत की शुरूआती शिक्षा लेने के बाद, वह घर वापसी से पहले कलकत्ता और पंजाब भी गए।
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एक सुर में पिरोया
'मिले सुर मेरा तुम्हारा' को अपनी आवाज देकर हर देशवासी को एक सूत्र में पिरोने का सुरीला संदेश देने वाले भीमसेन जोशी की गायकी ने अपने शास्त्रीय संगीत जो इतिहास रचा वह आज भी चमकदार और रोशन है।
 

गाना गाकर कराई थी ट्रेन की टिकट माफ
भीमसेन गुरु की तलाश में जब घर से निकले तो उनके पास पैसे नहीं थे। वह बिना टिकट के ही ट्रेन में बैठ गए और उन्होंने बीजापुर तक का सफर तय किया। ट्रेन में टी.टी. को राग भैरव में 'जागो मोहन प्यारे' और 'कौन-कौन गुन गावे' सुनाकर अपनी ट्रेन टिकट माफ कर ली और फिर उसके बाद यात्रियों ने भीमसेन के लिए सफर के दौरान खाने-पीने का इंतजाम किया।

भारत रत्न से किए गए सम्मानित
पंडित भीमसेन जोशी को संगीत में उनके योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण समेत कई अन्य प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स दिए गए। लंबी बीमारी के बाद 24 जनवरी 2011 को भीमसेन जोशी का निधन हो गया।

 
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