मुबारक बेगम: तुम जैसे गए ऐसे भी तो जाता नहीं कोई

रिज़वान/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 19 Jul 2016 01:23 PM IST
Legendary playback singer Mubarak Begum's life and carrier
ये सच है, हमेशा के लिए आता नहीं कोई
तुम जैसे गए, ऐसे भी तो जाता नहीं कोई


मुबारक बेगम के लिए शेर एकदम सटीक बैठता है। अपने जमाने की मशहूर गायिका मुबारक हमे छोड़कर चली गई हैं। मुबारक अपने हालात से, अपनी बीमारी से बहुत लड़ीं और लड़ते-लड़ते ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। हां, मुबारक का जाना कुछ अलग है, फिल्मी दुनिया के किसी भी दूसरे सितारे से बिल्कुल अलग। बरसों तक मुबारक के गाए फिल्मी गीत खूब पंसद किए जाते रहे, हर बड़े सितारे के साथ उन्होंने काम किया। मगर वक्त बदलने के साथ कोई ना था जो मुबारक के काम आ सके।

मुबारक बेगम की आवाज में एक खास कशिश थी, जो सुनने वाले को अपनी ओर खींच लेती थी। ये बहुत मुमकिन है कि आज की फेसबुक पीढ़ी मुबारक को ना जानती हो, लेकिन जो 50, 60 और 70 के दशक के संगीत से जुड़ाव रखते हैं, वो मुबारक को जरूर जानते हैं। आज भी कहीं रेडियो पर 'मुझको मेरे गले लगा लो ओ मेरे हमराही' या 'वादा हमसे किया, दिल किसी को दिया' कानों में पड़ जाए तो बरबस ही कदम ठिठक जाते हैं। दिल चाहता है कि जरा कुछ लम्हों के लिए इस आवाज को सुना जाए। यही मुबारक बेगम की आवाज है, जो कानों के जरिए आपके दिल तक चली जाती है।

सफर में ऐसे कई मरहले भी आते हैं
हर एक मोड़ पे कई लोग छूट जाते हैं।


मुबारक की जिंदगी में भी हर मोड़ पर लोग पीछे छूटते रहे और वो आखिर में वो तन्हा रह गईं। 80 साल की मुबारक ने जवानी में शोहरत की बुलंदिया देखीं तो ढलती उम्र के साथ गुमनामी के सियाह पहाड़ों से भी उनको टकराना पड़ा। 70 के दशक के बाद उनको काम मिलना बंद हो गया था, वो धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से कट गईं। बीमार बेटी को बचाने के लिए जिंदगी भर की कमाई लुटा दी लेकिन बेटी चल बसी। बेटे को अच्छी तालीम भी वो ना दिला सकी। बेटी की मौत और बिगड़ती माली हालत ने उन्हें एक कमरे के छोटे से घर में रहने को मजबूर कर दिया। बेटे ने कोई और चारा ना देख टैक्सी चलाने का फैसला किया।

एक तरफ तो बेहद सीमित कमाई और दूसरी तरफ बेटे का परिवार, उस पर मुबारक की सेहत जब गिरने लगी तो घर से हालात बद से बदतर होते चले गए। एक के बाद एक कई बीमारियों ने मुबारक को घेर लिया, गरीब बेटा बड़े अस्पताल में मां को लेकर नहीं जा सका और मुबारक ने बिस्तर पकड़ लिया।

दो साल पहले मुबारक की तंगहाली की खबरें मीडिया में आईं तो महाराष्ट्र सरकार और कई फिल्मी सितारों ने मदद की बात कही। राज्य सरकार ने मशहूर गायिका के इलाज की बात कही लेकिन ये सब वादे ही ज्यादा थे। बीबीसी से एक बातचीत में मुबारक के बेटे की बीवी जरीना ने बताया था कि कैमरे के सामने वादा करने वाले सियासतदान बाद में उनके घर का रास्ता भूल गए, मदद के वादे को बहुत हुए, कुछ मदद भी हुई लेकिन ये नाकाफी थी।

जरीना ने बताया था कि वो आज भी कभी-कभी गुनगुनाती हैं लेकिन आवाज कम और आंख से आंसू ज्यादा निकलते हैं। मुबारक बेगम की कहानी फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के पीछे के सच को भी बताती है कि कैसे ये दुनिया आपकी जरूरत ना होने पर आपको किसी मशीन के खराब पुर्जे की तरह निकालकर अलग कर देती है। मुबारक अब इस दुनिया में नहीं रही। आखिर 80 साल की मुबारक बेगम कब तक अपने छोटे से कमरे की सीलन, बेटी के चले जाने का दुख, फिल्मी दुनिया के उनसे मुंह फेर लेने की टीस और नेताओं की वादाखिलाफी का बोझ उठाती।

भले ही दुनिया ने उनको आखिरी वक्त में भुला दिया लेकिन मुबारक कुछ ऐसा छोड़ गई हैं हमेशा उनकी याद दिलाता रहेगा। मुबारक अपने गाए गानों को का खूबसूरत तोहफा हमें दे गई हैं। हम तो सिर्फ यही कह सकते हैं कि हो सके तो हमें हमारी खुदगर्जी के लिए माफ कर देना, अलविदा मुबारक बेगम। 'कभी तन्हाइयों में यू हमारी याद आएगी'।

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