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सीट का समीकरण: कभी कांग्रेस का गढ़ रही सलोन सीट पर अब भाजपा का दबदबा, ऐसा है यहां का सियासी इतिहास
Wed, 21 Oct 2026 10:38 AM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 21 Oct 2026 10:38 AM IST
सार
रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट 1957 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आई थी। यहां के पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। बाद के चुनावों में सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, भाजपा और सपा ने भी इस सीट पर समय-समय पर जीत हासिल की। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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सलोन सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा और किसे जनता का फैसला स्वीकारना पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। इस चुनावी महासंग्राम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं सलोन विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला रायबरेली है। जिले के अंतर्गत कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं- बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली, सलोन, सरेनी और ऊंचाहार। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम सलोन विधानसभा सीट की बात करेंगे। रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट साल 1957 में 'सलोन' नाम से नए स्वरूप में स्वतंत्र/द्वि-सदस्यीय सीट के रूप में अस्तित्व में आई। इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। बता दें कि यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीट है। पिछले दो चुनावों में यहां से भाजपा ने जीत दर्ज की है।
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पहले जानते हैं सलोन विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला रायबरेली है। जिले के अंतर्गत कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं- बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली, सलोन, सरेनी और ऊंचाहार। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम सलोन विधानसभा सीट की बात करेंगे। रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट साल 1957 में 'सलोन' नाम से नए स्वरूप में स्वतंत्र/द्वि-सदस्यीय सीट के रूप में अस्तित्व में आई। इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। बता दें कि यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीट है। पिछले दो चुनावों में यहां से भाजपा ने जीत दर्ज की है।
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सलोन विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
सलोन विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में पासी, मौर्य, कुर्मी, यादव, मुस्लिम और कोरी समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी पासी (अनुसूचित जाति) मतदाताओं की है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 26% हैं। इसके बाद मौर्य समाज, कुर्मी समाज, यादव समुदाय और मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 10% - 10% के आसपास है, जबकि कोरी समाज के मतदाताओं की आबादी करीब 10% है।
अन्य प्रमुख वर्गों में ब्राह्मण और लोध समुदाय के मतदाता लगभग 6-6% हैं, जबकि क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 5% है। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
सलोन विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे से शुरुआत
सलोन विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट दो-सदस्यीय सीट थी। यानी कि यहां से दो विधायक चुने जाते थे। उस समय इस चुनाव में सलोन की दोनों सीटों पर कांग्रेस के दो उम्मीदवार- सुनीता चौहान और राम प्रसाद विजयी हुए थे।
सलोन विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में पासी, मौर्य, कुर्मी, यादव, मुस्लिम और कोरी समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी पासी (अनुसूचित जाति) मतदाताओं की है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 26% हैं। इसके बाद मौर्य समाज, कुर्मी समाज, यादव समुदाय और मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 10% - 10% के आसपास है, जबकि कोरी समाज के मतदाताओं की आबादी करीब 10% है।
अन्य प्रमुख वर्गों में ब्राह्मण और लोध समुदाय के मतदाता लगभग 6-6% हैं, जबकि क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 5% है। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
सलोन विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे से शुरुआत
सलोन विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट दो-सदस्यीय सीट थी। यानी कि यहां से दो विधायक चुने जाते थे। उस समय इस चुनाव में सलोन की दोनों सीटों पर कांग्रेस के दो उम्मीदवार- सुनीता चौहान और राम प्रसाद विजयी हुए थे।
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इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1962: सलोन में पहली बार जीती सोशलिस्ट पार्टी
इस चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट पर पहली बार सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी पितई विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम प्रसाद को 4,586 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में पितई को 21,014 वोट, जबकि राम प्रसाद को 16,428 वोट मिले।
1967: सलोन में कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के डी.बी. सिंह विजयी हुए। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के एस.पी. पंडिया को 9,774 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में डी.बी. सिंह को 22,160 वोट, जबकि एस.पी. पंडिया को 12,386 वोट मिले।
सलोन में 1969 में पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी जीती
इस चुनाव में रायबरेली की सलोन विधानसभा सीट पर पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी) ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में एसएसपी के शिव प्रसाद पंडिया विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के दल बहादुर सिंह को 8,262 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव प्रसाद पंडिया को 26,164 वोट, जबकि दल बहादुर सिंह को 17,902 वोट मिले।
इस चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट पर पहली बार सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी पितई विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम प्रसाद को 4,586 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में पितई को 21,014 वोट, जबकि राम प्रसाद को 16,428 वोट मिले।
1967: सलोन में कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के डी.बी. सिंह विजयी हुए। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के एस.पी. पंडिया को 9,774 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में डी.बी. सिंह को 22,160 वोट, जबकि एस.पी. पंडिया को 12,386 वोट मिले।
सलोन में 1969 में पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी जीती
इस चुनाव में रायबरेली की सलोन विधानसभा सीट पर पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी) ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में एसएसपी के शिव प्रसाद पंडिया विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के दल बहादुर सिंह को 8,262 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव प्रसाद पंडिया को 26,164 वोट, जबकि दल बहादुर सिंह को 17,902 वोट मिले।
सलोन में हुई भारतीय क्रांति दल की एंट्री
1969 के चुनाव के बाद राज्य में 1974 के चुनाव हुए। इसमें पहली बार भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बीकेडी के दीनानाथ विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम फेर को 2,640 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दीनानाथ को 16,832 वोट, जबकि राम फेर को 14,192 वोट मिले।
आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
1969 के चुनाव के बाद राज्य में 1974 के चुनाव हुए। इसमें पहली बार भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बीकेडी के दीनानाथ विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम फेर को 2,640 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दीनानाथ को 16,832 वोट, जबकि राम फेर को 14,192 वोट मिले।
आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
सलोन में पहली बार जीती जनता पार्टी
1974 के चुनाव के बाद एक बार फिर सीट का समीकरण बदला। साल 1977 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से जनता पार्टी के दीनानाथ सेवक विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक को 1,468 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दीनानाथ सेवक को 21,381 वोट, जबकि शिव बालक को 19,913 वोट मिले।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1974 के चुनाव के बाद एक बार फिर सीट का समीकरण बदला। साल 1977 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से जनता पार्टी के दीनानाथ सेवक विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक को 1,468 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दीनानाथ सेवक को 21,381 वोट, जबकि शिव बालक को 19,913 वोट मिले।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1980 के चुनाव में कांग्रेस (आई) ने मारी बाजी
इस चुनाव में सलोन विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के शिव बालक विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस (यू) के विश्वनाथ प्रसाद को 12,808 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव बालक को 19,479 वोट, जबकि विश्वनाथ प्रसाद को 6,671 वोट मिले।
कांग्रेस लगातार तीन चुनाव जीती
इसके बाद 1985, 1989 और 1991 के चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस ने लगातार जीत हासिल की। 1985 के चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक विजयी हुए। उन्होंने लोक दल के राम लाल को 21,895 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद हुए 1989 के चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक लगातार दूसरी बार विजयी हुए। इस बार उन्होंने जनता दल के रामनाथ अमलकर को 16,340 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1991 के चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक पासी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की और जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने भाजपा के दल बहादुर को 10,433 वोटों के अंतर से हराया।
सलोन में पहली बार जीती भाजपा
इन चुनाव के बाद 1993 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के दल बहादुर कोरी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के बिंदेश्वरी प्रसाद को 7,542 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दल बहादुर कोरी को 37,402 वोट, जबकि बिंदेश्वरी प्रसाद को 29,860 वोट मिले।
इस चुनाव में सलोन विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के शिव बालक विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस (यू) के विश्वनाथ प्रसाद को 12,808 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव बालक को 19,479 वोट, जबकि विश्वनाथ प्रसाद को 6,671 वोट मिले।
कांग्रेस लगातार तीन चुनाव जीती
इसके बाद 1985, 1989 और 1991 के चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस ने लगातार जीत हासिल की। 1985 के चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक विजयी हुए। उन्होंने लोक दल के राम लाल को 21,895 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद हुए 1989 के चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक लगातार दूसरी बार विजयी हुए। इस बार उन्होंने जनता दल के रामनाथ अमलकर को 16,340 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1991 के चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक पासी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की और जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने भाजपा के दल बहादुर को 10,433 वोटों के अंतर से हराया।
सलोन में पहली बार जीती भाजपा
इन चुनाव के बाद 1993 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के दल बहादुर कोरी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के बिंदेश्वरी प्रसाद को 7,542 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दल बहादुर कोरी को 37,402 वोट, जबकि बिंदेश्वरी प्रसाद को 29,860 वोट मिले।
1996: भाजपा ने दोहराई जीत
इस चुनाव में भाजपा के दल बहादुर कोरी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इस बार उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक पासी को 4,710 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दल बहादुर कोरी को 39,423 वोट, जबकि शिव बालक पासी को 34,713 वोट मिले।
सलोन में पहली बार जीती सपा
1996 के बाद राज्य में 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में एक बार फिर सीट पर नई पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में समाजवादी पार्टी की आशा किशोर विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक पासी को 4,027 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आशा किशोर को 36,536 वोट, जबकि शिव बालक पासी को 32,509 वोट मिले।
2007 में कांग्रेस ने मारी बाजी
2002 के चुनाव के बाद 2007 के चुनाव में सलोन सीट पर एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक पासी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी की आशा किशोर को 13,109 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव बालक पासी को 45,078 वोट, जबकि आशा किशोर को 31,969 वोट मिले।
इस चुनाव में भाजपा के दल बहादुर कोरी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इस बार उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक पासी को 4,710 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दल बहादुर कोरी को 39,423 वोट, जबकि शिव बालक पासी को 34,713 वोट मिले।
सलोन में पहली बार जीती सपा
1996 के बाद राज्य में 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में एक बार फिर सीट पर नई पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में समाजवादी पार्टी की आशा किशोर विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक पासी को 4,027 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आशा किशोर को 36,536 वोट, जबकि शिव बालक पासी को 32,509 वोट मिले।
2007 में कांग्रेस ने मारी बाजी
2002 के चुनाव के बाद 2007 के चुनाव में सलोन सीट पर एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के शिव बालक पासी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी की आशा किशोर को 13,109 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव बालक पासी को 45,078 वोट, जबकि आशा किशोर को 31,969 वोट मिले।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
सलोन में सपा की हुई वापसी
वहीं 2012 के चुनाव में एक बार फिर सपा ने बाजी मारी। चुनाव में समाजवादी पार्टी की आशा किशोर विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक पासी को 20,577 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आशा किशोर को 69,020 वोट, जबकि शिव बालक पासी को 48,443 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के विजय अंबेडकर 23,069 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1996 के बाद सीट पर भाजपा की हुई वापसी
2012 के बाद सलोन सीट पर 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में सलोन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दल बहादुर विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के सुरेश चौधरी को 16,055 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दल बहादुर को 78,028 वोट, जबकि सुरेश चौधरी को 61,973 वोट मिले।
2022: भाजपा ने दोहराई जीत
वहीं 2022 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अशोक कुमार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जगदीश प्रसाद को 2,111 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अशोक कुमार को 87,715 वोट, जबकि जगदीश प्रसाद को 85,604 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के अर्जुन कुमार 11,439 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
वहीं 2012 के चुनाव में एक बार फिर सपा ने बाजी मारी। चुनाव में समाजवादी पार्टी की आशा किशोर विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के शिव बालक पासी को 20,577 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आशा किशोर को 69,020 वोट, जबकि शिव बालक पासी को 48,443 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के विजय अंबेडकर 23,069 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1996 के बाद सीट पर भाजपा की हुई वापसी
2012 के बाद सलोन सीट पर 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में सलोन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दल बहादुर विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के सुरेश चौधरी को 16,055 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दल बहादुर को 78,028 वोट, जबकि सुरेश चौधरी को 61,973 वोट मिले।
2022: भाजपा ने दोहराई जीत
वहीं 2022 के चुनाव में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अशोक कुमार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जगदीश प्रसाद को 2,111 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अशोक कुमार को 87,715 वोट, जबकि जगदीश प्रसाद को 85,604 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के अर्जुन कुमार 11,439 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।