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सीट का समीकरण: 1991 तक बछरावां में रहा कांग्रेस का दबदबा, अब सपा-भाजपा में टक्कर; ऐसा है यहां का सियासी इतिहास
Wed, 21 Oct 2026 09:45 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 21 Oct 2026 09:45 PM IST
सार
रायबरेली जिले की बछरावां विधानसभा सीट 1957 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आई। शुरुआती दौर में इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा, जबकि बाद के चुनावों में भाजपा, बसपा और सपा ने भी जीत दर्ज की। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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बछरावां सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो रही है। सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात रायबरेली जिले की बछरावां विधानसभा सीट की होगी। आइए जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं बछरावां विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला रायबरेली है। जिले के अंतर्गत कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली, सलोन, सरेनी और ऊंचाहार शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम बछरावां विधानसभा सीट की बात करेंगे। रायबरेली जिले की बछरावां विधानसभा सीट साल 1957 में अस्तित्व में आई थी। यहां साल 1957 में पहला चुनाव हुआ था। उस समय यह विधानसभा एक द्वि-सदस्यीय सीट थी। यहां के पहले चुनाव में चंद्रिका प्रसाद और रामेश्वर प्रसाद विजयी हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी। बता दें कि बछरावां विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है।
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पहले जानते हैं बछरावां विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला रायबरेली है। जिले के अंतर्गत कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली, सलोन, सरेनी और ऊंचाहार शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम बछरावां विधानसभा सीट की बात करेंगे। रायबरेली जिले की बछरावां विधानसभा सीट साल 1957 में अस्तित्व में आई थी। यहां साल 1957 में पहला चुनाव हुआ था। उस समय यह विधानसभा एक द्वि-सदस्यीय सीट थी। यहां के पहले चुनाव में चंद्रिका प्रसाद और रामेश्वर प्रसाद विजयी हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी। बता दें कि बछरावां विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है।
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बछरावां विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
बछरावां विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में पासी, लोध, ब्राह्मण, यादव और क्षत्रिय (ठाकुर) समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी पासी मतदाताओं की है, जो लगभग 22% हैं। इसके बाद लोध मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14% और ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी लगभग 13% है, जबकि यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 13% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है। अन्य प्रमुख वर्गों में मुस्लिम समाज के मतदाता लगभग 11% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
बछरावां विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957: कांग्रेस के दबदबे के साथ शुरुआत
रायबरेली की बछरावां विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में चंद्रिका प्रसाद और रामेश्वर प्रसाद विजयी हुए थे। उस समय यह एक द्वि-सदस्यीय (दो सदस्यों वाली) विधानसभा सीट थी, इसलिए इस सीट से दो विधायक चुने गए थे। चुनाव में चंद्रिका प्रसाद को 19,760 वोट, जबकि रामेश्वर प्रसाद को 21,077 वोट मिले थे। वहीं, चंद्रिका प्रसाद के मुकाबले निर्दलीय भगवान दीन को 12,962 वोट मिले, जबकि रामेश्वर प्रसाद के मुकाबले निर्दलीय राम कृष्ण को 14,800 वोट मिले थे।
बछरावां विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में पासी, लोध, ब्राह्मण, यादव और क्षत्रिय (ठाकुर) समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी पासी मतदाताओं की है, जो लगभग 22% हैं। इसके बाद लोध मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14% और ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी लगभग 13% है, जबकि यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 13% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है। अन्य प्रमुख वर्गों में मुस्लिम समाज के मतदाता लगभग 11% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
बछरावां विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957: कांग्रेस के दबदबे के साथ शुरुआत
रायबरेली की बछरावां विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में चंद्रिका प्रसाद और रामेश्वर प्रसाद विजयी हुए थे। उस समय यह एक द्वि-सदस्यीय (दो सदस्यों वाली) विधानसभा सीट थी, इसलिए इस सीट से दो विधायक चुने गए थे। चुनाव में चंद्रिका प्रसाद को 19,760 वोट, जबकि रामेश्वर प्रसाद को 21,077 वोट मिले थे। वहीं, चंद्रिका प्रसाद के मुकाबले निर्दलीय भगवान दीन को 12,962 वोट मिले, जबकि रामेश्वर प्रसाद के मुकाबले निर्दलीय राम कृष्ण को 14,800 वोट मिले थे।
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इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1962 में जीती सोशलिस्ट पार्टी
इसके बाद राज्य में 1962 के चुनाव हुए। इस चुनाव में रायबरेली जिले की बछरावां विधानसभा सीट से सोशलिस्ट पार्टी के भगवान दीन विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के रामेश्वर प्रसाद को 11,464 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भगवान दीन को 20,681 वोट, जबकि रामेश्वर प्रसाद को 9,217 वोट मिले।
1962 के चुनाव के बाद साल 1967 से लेकर 1991 तक रायबरेली की बछरावां विधानसभा सीट पर लगातार कांग्रेस का दबदबा रहा। उस दौरान बछरावां में प्रत्याशी के नाम तो बदले, लेकिन हर बार नतीजा कांग्रेस के पक्ष में रहा।
बछरावां में हुई कांग्रेस के दबदबे की शुरुआत
1967 के चुनाव में रायबरेली की बछरावां सीट से कांग्रेस के राम दुलारे विजयी हुए। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के शिव दर्शन को 10,355 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1969 के चुनाव में कांग्रेस के राम दुलारे लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के शिव दर्शन को 13,120 वोटों के अंतर से हराया।
इसके बाद राज्य में 1962 के चुनाव हुए। इस चुनाव में रायबरेली जिले की बछरावां विधानसभा सीट से सोशलिस्ट पार्टी के भगवान दीन विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के रामेश्वर प्रसाद को 11,464 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भगवान दीन को 20,681 वोट, जबकि रामेश्वर प्रसाद को 9,217 वोट मिले।
1962 के चुनाव के बाद साल 1967 से लेकर 1991 तक रायबरेली की बछरावां विधानसभा सीट पर लगातार कांग्रेस का दबदबा रहा। उस दौरान बछरावां में प्रत्याशी के नाम तो बदले, लेकिन हर बार नतीजा कांग्रेस के पक्ष में रहा।
बछरावां में हुई कांग्रेस के दबदबे की शुरुआत
1967 के चुनाव में रायबरेली की बछरावां सीट से कांग्रेस के राम दुलारे विजयी हुए। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के शिव दर्शन को 10,355 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1969 के चुनाव में कांग्रेस के राम दुलारे लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के शिव दर्शन को 13,120 वोटों के अंतर से हराया।
1974 और 1977 का चुनाव
1974 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राम दुलारे ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करते हुए जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन) के राम प्रसाद को 7,187 वोटों के अंतर से हराया। जबकि 1977 के चुनाव में राम दुलारे लगातार चौथी बार विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के राम प्रसाद को 855 वोटों के अंतर से हराया।
1980: कांग्रेस आई ने जीती चुनाव
इसके बाद राज्य में 1980 के चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस (आई) के शिव दर्शन विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के ईश्वर दीन पासी को 8,922 वोटों के अंतर से हराया।
शिव दर्शन ने दोहराई जीत
इसके बाद 1985 के चुनाव में कांग्रेस के शिव दर्शन लगातार दूसरी बार विजयी हुए। इस बार उन्होंने लोकदल के कन्हैया लाल सोनकर को 13,114 वोटों के अंतर से हराया।
1974 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राम दुलारे ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करते हुए जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन) के राम प्रसाद को 7,187 वोटों के अंतर से हराया। जबकि 1977 के चुनाव में राम दुलारे लगातार चौथी बार विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के राम प्रसाद को 855 वोटों के अंतर से हराया।
1980: कांग्रेस आई ने जीती चुनाव
इसके बाद राज्य में 1980 के चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस (आई) के शिव दर्शन विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के ईश्वर दीन पासी को 8,922 वोटों के अंतर से हराया।
शिव दर्शन ने दोहराई जीत
इसके बाद 1985 के चुनाव में कांग्रेस के शिव दर्शन लगातार दूसरी बार विजयी हुए। इस बार उन्होंने लोकदल के कन्हैया लाल सोनकर को 13,114 वोटों के अंतर से हराया।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1989: कांग्रेस के शिव दर्शन ने लगाई जीत की हैट्रिक
इस चुनाव में कांग्रेस के शिव दर्शन ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करते हुए जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने जनता दल के कन्हैया लाल सोनकर को 8,689 वोटों के अंतर से हराया।
1991: कांग्रेस के शिव दर्शन लगातार चौथी बार दर्ज की जीत
जबकि 1991 के चुनाव में शिव दर्शन लगातार चौथी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राजाराम त्यागी को 419 वोटों के मामूली अंतर से हराया। चुनाव में शिव दर्शन को 21,085 वोट, जबकि राजाराम त्यागी को 20,666 वोट मिले।
1993: बछरावां में पहली बार जीती भाजपा
इन चुनावों के बाद साल 1993 में रायबरेली की बछरावां सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में रायबरेली की बछरावां सीट से राजा राम त्यागी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राम लाल अकेला को 10,240 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजा राम त्यागी को 42,188 वोट, जबकि राम लाल अकेला को 31,948 वोट मिले।
इस चुनाव में कांग्रेस के शिव दर्शन ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करते हुए जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने जनता दल के कन्हैया लाल सोनकर को 8,689 वोटों के अंतर से हराया।
1991: कांग्रेस के शिव दर्शन लगातार चौथी बार दर्ज की जीत
जबकि 1991 के चुनाव में शिव दर्शन लगातार चौथी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राजाराम त्यागी को 419 वोटों के मामूली अंतर से हराया। चुनाव में शिव दर्शन को 21,085 वोट, जबकि राजाराम त्यागी को 20,666 वोट मिले।
1993: बछरावां में पहली बार जीती भाजपा
इन चुनावों के बाद साल 1993 में रायबरेली की बछरावां सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में रायबरेली की बछरावां सीट से राजा राम त्यागी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राम लाल अकेला को 10,240 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजा राम त्यागी को 42,188 वोट, जबकि राम लाल अकेला को 31,948 वोट मिले।
1996: बछरावां सीट पर बसपा की पहली जीत
1996 के चुनाव में रायबरेली जिले की बछरावां सीट पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने चुनाव में जीत हासिल की। यहां से बसपा के प्रत्याशी श्याम सुंदर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राजा राम को 9,064 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम सुंदर को 46,850 वोट, जबकि राजा राम को 37,786 वोट मिले।
2002: बछरावां में सपा ने जीता पहला चुनाव
2002 के चुनाव में रायबरेली की बछरावां विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने पहला चुनाव जीता। यहां से सपा के राम लाल अकेला विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के श्याम सुंदर भारती को 29,610 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम लाल अकेला को 53,982 वोट, जबकि श्याम सुंदर भारती को 24,372 वोट मिले।
2007:कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव के बाद राज्य में 2007 के चुनाव हुए। इस चुनाव में बछरावां सीट पर 1991 के बाद कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के राजा राम विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राम लाल अकेला को 11,581 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजा राम को 40,117 वोट, जबकि राम लाल अकेला को 28,536 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अजय पासी 18,252 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1996 के चुनाव में रायबरेली जिले की बछरावां सीट पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने चुनाव में जीत हासिल की। यहां से बसपा के प्रत्याशी श्याम सुंदर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राजा राम को 9,064 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम सुंदर को 46,850 वोट, जबकि राजा राम को 37,786 वोट मिले।
2002: बछरावां में सपा ने जीता पहला चुनाव
2002 के चुनाव में रायबरेली की बछरावां विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने पहला चुनाव जीता। यहां से सपा के राम लाल अकेला विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के श्याम सुंदर भारती को 29,610 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम लाल अकेला को 53,982 वोट, जबकि श्याम सुंदर भारती को 24,372 वोट मिले।
2007:कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव के बाद राज्य में 2007 के चुनाव हुए। इस चुनाव में बछरावां सीट पर 1991 के बाद कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के राजा राम विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राम लाल अकेला को 11,581 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजा राम को 40,117 वोट, जबकि राम लाल अकेला को 28,536 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अजय पासी 18,252 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2012 में सपा ने की वापसी
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के रामलाल अकेला विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी के सुशील कुमार पासी को 27,948 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामलाल अकेला को 59,576 वोट, जबकि सुशील कुमार पासी को 31,628 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के राजा राम त्यागी 29,317 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017: भाजपा ने दर्ज की जीत
इस चुनाव में 1993 के बाद भाजपा ने बछरावां सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राम नरेश रावत विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के साहब शरण को 22,309 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम नरेश रावत को 65,324 वोट, जबकि साहब शरण को 43,015 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के श्याम सुंदर 33,582 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने फिर की वापसी
वहीं 2022 के चुनाव में सपा ने एक बार फिर वापसी करते हुए बछरावां सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के श्याम सुंदर भारती विजयी हुए। उन्होंने अपना दल (सोनेलाल) के लक्ष्मीकांत को 2,812 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम सुंदर भारती को 65,747 वोट, जबकि लक्ष्मीकांत को 62,935 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के सुशील कुमार पासी 56,835 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के रामलाल अकेला विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी के सुशील कुमार पासी को 27,948 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामलाल अकेला को 59,576 वोट, जबकि सुशील कुमार पासी को 31,628 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के राजा राम त्यागी 29,317 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017: भाजपा ने दर्ज की जीत
इस चुनाव में 1993 के बाद भाजपा ने बछरावां सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राम नरेश रावत विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के साहब शरण को 22,309 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम नरेश रावत को 65,324 वोट, जबकि साहब शरण को 43,015 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के श्याम सुंदर 33,582 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने फिर की वापसी
वहीं 2022 के चुनाव में सपा ने एक बार फिर वापसी करते हुए बछरावां सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के श्याम सुंदर भारती विजयी हुए। उन्होंने अपना दल (सोनेलाल) के लक्ष्मीकांत को 2,812 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम सुंदर भारती को 65,747 वोट, जबकि लक्ष्मीकांत को 62,935 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के सुशील कुमार पासी 56,835 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।