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Milkipur: कभी लेफ्ट का गढ़ रही, सुरक्षित हुई तो दो बार जीते अवधेश प्रसाद, ऐसा है मिल्कीपुर विधानसभा का इतिहास
Thu, 17 Oct 2024 06:41 AM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 17 Oct 2024 06:41 AM IST
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मिल्कीपुर सीट
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
चुनाव आयोग ने मंगलवार को महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की। इसके साथ ही देश भर में 14 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो राज्यों की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव का भी एलान किया गया है। हालांकि, एक लोकसभा सीट और तीन विधानसभा सीट और रिक्त हैं। इन सीटों पर भी उपचुनाव की घोषणा होने की उम्मीद थी, लेकिन इस पर फैसला नहीं लिया गया है। इन चार में से एक सीट उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की मिल्कीपुर है।मिल्कीपुर के लिए उपचुनाव न घोषित होने से भी यह सीट चर्चा में आ गई है। इस मुद्दे पर सियासत भी शुरू है। जहां सपा समेत कई विपक्षी दल जानबूझकर चुनाव में देरी का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं भाजपा कानूनी मुकदमे का हवाला दे रही है।
आइये जानते हैं मिल्कीपुर सीट के चुनावी इतिहास के बारे में, यहां से जीते उम्मीदवारों की कहानी, पिछले चुनाव में इस सीट पर क्या हुआ यह भी जानेंगे, सीट क्यों रिक्त हुई? इस बार कैसे समीकरण बन रहे हैं?
1967 में अस्तिव में आई मिल्कीपुर सीट
साल 1967 में मिल्कीपुर नाम से सीट अस्तित्व में आई। तब मिल्कीपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के रामलाल मिश्रा को जीत मिली। दो साल बाद 1969 में राज्य में फिर से चुनाव हुए। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट भारतीय जन संघ के खाते में गई। जन संघ के उम्मीदवार हरिनाथ तिवारी ने कांग्रेस के कांग्रेस के बृजबासी लाल को 3579 मत से शिकस्त दी। 1974 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर में फिर कांग्रेस की वापसी हुई। पार्टी के उम्मीदवार धरम चंद्र ने भारतीय जनसंघ के शंकर नाथ त्रिपाठी को 14949 वोट से हराया।
साल 1967 में मिल्कीपुर नाम से सीट अस्तित्व में आई। तब मिल्कीपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के रामलाल मिश्रा को जीत मिली। दो साल बाद 1969 में राज्य में फिर से चुनाव हुए। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट भारतीय जन संघ के खाते में गई। जन संघ के उम्मीदवार हरिनाथ तिवारी ने कांग्रेस के कांग्रेस के बृजबासी लाल को 3579 मत से शिकस्त दी। 1974 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर में फिर कांग्रेस की वापसी हुई। पार्टी के उम्मीदवार धरम चंद्र ने भारतीय जनसंघ के शंकर नाथ त्रिपाठी को 14949 वोट से हराया।
1977 से 1985 तक भाकपा जीती
साल 1977, आपातकाल के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होते हैं। 1977 के चुनाव में मिल्कीपुर में धरम चंद्र ने जनता पार्टी के टिकट पर दावेदारी पेश की लेकिन चुनाव में असफलता मिली। इस चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के मित्रसेन यादव ने जनता पार्टी के उम्मीदवार धरम चंद्र को 14609 वोट से हराया। यही मित्रसेन बाद में फैजाबाद सीट से तीन बार लोकसभा के सदस्य भी बने और सपा और बसपा से भी उन्होंने राजनीति की।
1977 के बाद उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव 1980 में हुए। इस चुनाव में एक बार फिर भाकपा के मित्रसेन यादव की जीत हुई। मित्रसेन ने कांग्रेस (आई) के प्रत्याशी राम हेत सिंह को 5825 वोट से हराया। 1985 के विधानसभा चुनाव में भी भाकपा उम्मीदवार मित्रसेन यादव को सफलता मिली। इस तरह से उन्होंने मिल्कीपुर सीट पर जीत की हैट्रिक लगा दी। मित्रसेन ने अबकी बार कांग्रेस उम्मीदवार हनुमान प्रसाद त्रिपाठी को 6060 मत से शिकस्त दी।
1989 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीन चुनाव जीत चुके मित्रसेन यादव को हार का सामना करना पड़ा। इस बार कांग्रेस के बृजभूषण मणि त्रिपाठी को जीत मिली। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ने 6044 वोट से यह चुनाव जीता। साल के अंत में हुए लोकसभा चुनाव में मित्रसेन यादव फैजाबाद लोकसभा सीट से मैदान में उतरे और जीत दर्ज करने में सफल रहे।
साल 1977, आपातकाल के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होते हैं। 1977 के चुनाव में मिल्कीपुर में धरम चंद्र ने जनता पार्टी के टिकट पर दावेदारी पेश की लेकिन चुनाव में असफलता मिली। इस चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के मित्रसेन यादव ने जनता पार्टी के उम्मीदवार धरम चंद्र को 14609 वोट से हराया। यही मित्रसेन बाद में फैजाबाद सीट से तीन बार लोकसभा के सदस्य भी बने और सपा और बसपा से भी उन्होंने राजनीति की।
1977 के बाद उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव 1980 में हुए। इस चुनाव में एक बार फिर भाकपा के मित्रसेन यादव की जीत हुई। मित्रसेन ने कांग्रेस (आई) के प्रत्याशी राम हेत सिंह को 5825 वोट से हराया। 1985 के विधानसभा चुनाव में भी भाकपा उम्मीदवार मित्रसेन यादव को सफलता मिली। इस तरह से उन्होंने मिल्कीपुर सीट पर जीत की हैट्रिक लगा दी। मित्रसेन ने अबकी बार कांग्रेस उम्मीदवार हनुमान प्रसाद त्रिपाठी को 6060 मत से शिकस्त दी।
1989 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीन चुनाव जीत चुके मित्रसेन यादव को हार का सामना करना पड़ा। इस बार कांग्रेस के बृजभूषण मणि त्रिपाठी को जीत मिली। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ने 6044 वोट से यह चुनाव जीता। साल के अंत में हुए लोकसभा चुनाव में मित्रसेन यादव फैजाबाद लोकसभा सीट से मैदान में उतरे और जीत दर्ज करने में सफल रहे।
भारतीय जनता पार्टी को मिली पहली जीत
अब आता है 1991 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी का खाता खुला। भाजपा के प्रत्याशी मथुरा प्रसाद तिवारी ने पार्टी को पहली जीत दिलाई। उन्होंने भाकपा के कमलासन पांडे को महज 415 मत से हराकर यह चुनाव जीता।
1993 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मित्रसेन यादव की वापसी हुई। 12 साल बाद फिर भाकपा के मित्रसेन मिल्कीपुर में जीतने में कामयाब हुए। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार मथुरा प्रसाद तिवारी को महज 775 मत से हराया।
1996 में मिल्कीपुर सीट पर फिर मित्रसेन यादव ने जीत का परचम लहराया लेकिन इस बार वह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे। इस चुनाव में मित्रसेन ने भाजपा उम्मीदवार बृजभूषण मणि त्रिपाठी को 6162 वोट से शिकस्त दी।
दो साल बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर मित्रसेन यादव सपा के टिकट पर फैजाबाद सीट से जीतकर सांसद बने। मित्रसेन के सांसद बनने के बाद मिल्कीपुर सीट खाली हो गई। इसके बाद यहां उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में सपा ने रामचंद्र यादव को टिकट दिया। रामचंद्र यादव उपचुनाव में जीतने में सफल रहे और मिल्कीपुर सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रहा।
अब आता है 1991 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी का खाता खुला। भाजपा के प्रत्याशी मथुरा प्रसाद तिवारी ने पार्टी को पहली जीत दिलाई। उन्होंने भाकपा के कमलासन पांडे को महज 415 मत से हराकर यह चुनाव जीता।
1993 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मित्रसेन यादव की वापसी हुई। 12 साल बाद फिर भाकपा के मित्रसेन मिल्कीपुर में जीतने में कामयाब हुए। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार मथुरा प्रसाद तिवारी को महज 775 मत से हराया।
1996 में मिल्कीपुर सीट पर फिर मित्रसेन यादव ने जीत का परचम लहराया लेकिन इस बार वह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे। इस चुनाव में मित्रसेन ने भाजपा उम्मीदवार बृजभूषण मणि त्रिपाठी को 6162 वोट से शिकस्त दी।
दो साल बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर मित्रसेन यादव सपा के टिकट पर फैजाबाद सीट से जीतकर सांसद बने। मित्रसेन के सांसद बनने के बाद मिल्कीपुर सीट खाली हो गई। इसके बाद यहां उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में सपा ने रामचंद्र यादव को टिकट दिया। रामचंद्र यादव उपचुनाव में जीतने में सफल रहे और मिल्कीपुर सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रहा।
मित्रसेन के बेटे को मिली जीत
2002 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट सपा ने मौजूदा विधायक रामचंद्र यादव की जगह मित्रसेन यादव के बेटे आनंद सेन यादव को टिकट दिया। आनंद सेन यादव ने जीत के साथ इस सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रखा। उन्होंने भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह को 3086 मत से हराया। दो साल बाद 2004 में देश में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में आनंद सेन के पिता मित्रसेन बसपा के टिकट पर फैजाबाद से चुनाव लड़े। मित्रसेन बसपा के टिकट पर सांसद बनने में सफल रहे। वहीं, उनके बेटे आनंद सेन ने भी पार्टी और विधायकी छोड़ दी। इसके बाद मिल्कीपुर सीट पर एक बार फिर उपचुनाव की नौबत आई।
इस उपचुनाव में आंनद सेन बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे। वहीं, सपा ने 1998 में यहां से जीते रामचंद्र यादव को टिकट दिया। इस उपचुनाव में सत्ताधारी सपा के उम्मीदवार रामचंद्र यादव को जीत मिली। रामचंद्र ने आनंद सेन को 35018 वोट से हरा दिया। ये दूसरा मौका था जब रामचंद्र उपचुनाव जीतकर विधायक बने थे।
2002 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट सपा ने मौजूदा विधायक रामचंद्र यादव की जगह मित्रसेन यादव के बेटे आनंद सेन यादव को टिकट दिया। आनंद सेन यादव ने जीत के साथ इस सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रखा। उन्होंने भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह को 3086 मत से हराया। दो साल बाद 2004 में देश में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में आनंद सेन के पिता मित्रसेन बसपा के टिकट पर फैजाबाद से चुनाव लड़े। मित्रसेन बसपा के टिकट पर सांसद बनने में सफल रहे। वहीं, उनके बेटे आनंद सेन ने भी पार्टी और विधायकी छोड़ दी। इसके बाद मिल्कीपुर सीट पर एक बार फिर उपचुनाव की नौबत आई।
इस उपचुनाव में आंनद सेन बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे। वहीं, सपा ने 1998 में यहां से जीते रामचंद्र यादव को टिकट दिया। इस उपचुनाव में सत्ताधारी सपा के उम्मीदवार रामचंद्र यादव को जीत मिली। रामचंद्र ने आनंद सेन को 35018 वोट से हरा दिया। ये दूसरा मौका था जब रामचंद्र उपचुनाव जीतकर विधायक बने थे।
जेल में थे आनंदसेन और लेनी थी मंत्री पद की शपथ
2007 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर मुख्य मुकाबला रामचंद्र और आनंद सेन के बीच ही हुआ। हालांकि, इस बार मिल्कीपुर सीट का नतीजा बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार आनंदसेन यादव के पक्ष में रहा। उन्होंने सपा उम्मीदवार रामचंद्र यादव को 9379 वोट से हराया। इस जीत के बाद उन्हें मायावती के मंत्रिमंडल में खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री बनाया गया। हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान आनंदसेन जेल में थे और एक अदालत ने उन्हें मोहलत देने से मना कर दिया क्योंकि वे 'गंभीर आपराधिक आरोपों' के चलते जेल में थे। आखिरकार, उनके लिए दूसरा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। नवंबर 2007 में आनंदसेन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और जांच शुरू हो गई।
2007 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर मुख्य मुकाबला रामचंद्र और आनंद सेन के बीच ही हुआ। हालांकि, इस बार मिल्कीपुर सीट का नतीजा बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार आनंदसेन यादव के पक्ष में रहा। उन्होंने सपा उम्मीदवार रामचंद्र यादव को 9379 वोट से हराया। इस जीत के बाद उन्हें मायावती के मंत्रिमंडल में खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री बनाया गया। हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान आनंदसेन जेल में थे और एक अदालत ने उन्हें मोहलत देने से मना कर दिया क्योंकि वे 'गंभीर आपराधिक आरोपों' के चलते जेल में थे। आखिरकार, उनके लिए दूसरा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। नवंबर 2007 में आनंदसेन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और जांच शुरू हो गई।
सपा के अवधेश प्रसाद जीते
2008 में राज्य की विधानसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन हुआ। इसके बाद मिल्कीपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गई। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की तरफ से अवधेश प्रसाद उम्मीदवार बने और जीते भी। उन्होंने बसपा के पवन कुमार को 34237 मत से शिकस्त दी थी। ये वही अवधेश हैं जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा के तत्कालीन सांसद लल्लू सिंह को हराया। इस जीत के बाद अवधेश सपा के पोस्टर ब्वॉय बन गए।
2017 के विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर सीट भाजपा के खाते में गई। मिल्कीपुर की सियासी लड़ाई भाजपा के उम्मीदवार बाबा गोरखनाथ के नाम रही। उन्होंने सपा के टिकट पर उतरे अवधेश प्रसाद को 13338 मत से शिकस्त दी।
2008 में राज्य की विधानसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन हुआ। इसके बाद मिल्कीपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गई। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की तरफ से अवधेश प्रसाद उम्मीदवार बने और जीते भी। उन्होंने बसपा के पवन कुमार को 34237 मत से शिकस्त दी थी। ये वही अवधेश हैं जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा के तत्कालीन सांसद लल्लू सिंह को हराया। इस जीत के बाद अवधेश सपा के पोस्टर ब्वॉय बन गए।
2017 के विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर सीट भाजपा के खाते में गई। मिल्कीपुर की सियासी लड़ाई भाजपा के उम्मीदवार बाबा गोरखनाथ के नाम रही। उन्होंने सपा के टिकट पर उतरे अवधेश प्रसाद को 13338 मत से शिकस्त दी।
पिछले चुनाव में अवधेश ने बाबा गोरखनाथ को हराया
2022 के विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर में मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। सपा ने अवधेश प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया तो भाजपा के टिकट पर बाबा गोरखनाथ उतरे। सपा के अवधेश यह चुनाव 13338 मत से जीतने में सफल रहे। सपा प्रत्याशी को 103905 वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी को 90567 वोट मिले।
2022 के विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर में मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। सपा ने अवधेश प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया तो भाजपा के टिकट पर बाबा गोरखनाथ उतरे। सपा के अवधेश यह चुनाव 13338 मत से जीतने में सफल रहे। सपा प्रत्याशी को 103905 वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी को 90567 वोट मिले।
चार राज्यों की चार सीट पर नहीं हुई उपचुनाव की घोषणा, मिल्कीपुर भी शामिल
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अब उपचुनाव की जरूरत क्यों?
हाल के लोकसभा चुनाव के बाद जिन सीटों पर हार-जीत की सबसे ज्यादा चर्चा हुई उसमें फैजाबाद (अयोध्या) शामिल है। यूपी में भाजपा की सीटें कम होने के साथ अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा था। मिल्कीपुर से विधायक और सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद यहां से करीब 54 हजार मतों से जीत गए। बाद में उन्होंने यूपी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और लोकसभा के सदस्य बन गए। इस तरह से अवधेश प्रसाद के सांसद बनने से मिल्कीपुर विधानसभा सीट रिक्त हो गई। मंगलवार को चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव के साथ 14 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो राज्यों की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव का भी एलान किया। लेकिन मिल्कीपुर विधानसभा सीट के निर्वाचन का मामला कोर्ट में होने के कारण यहां उपचुनाव का एलान नहीं किया है।
उपचुनाव से पहले सपा ने मिल्कीपुर सीट से सांसद अवधेश के बेटे अजीत को अपना चेहरा बना दिया है। वहीं भाजपा भी इस सीट पर अपनी चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य और जिले के प्रभारी प्रताप शाही के साथ संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, खेल राज्यमंत्री गिरीश चंद यादव और खाद्य रसद राज्यमंत्री सतीश शर्मा की ड्यूटी यहां पर लगाई गई है। चारों मंत्री यहां का नियमित दौरा कर संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य दलों की बात करें तो बसपा ने मिल्कीपुर सीट से रामसागर कोरी को अपना उम्मीदवार बनाया है।
हाल के लोकसभा चुनाव के बाद जिन सीटों पर हार-जीत की सबसे ज्यादा चर्चा हुई उसमें फैजाबाद (अयोध्या) शामिल है। यूपी में भाजपा की सीटें कम होने के साथ अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा था। मिल्कीपुर से विधायक और सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद यहां से करीब 54 हजार मतों से जीत गए। बाद में उन्होंने यूपी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और लोकसभा के सदस्य बन गए। इस तरह से अवधेश प्रसाद के सांसद बनने से मिल्कीपुर विधानसभा सीट रिक्त हो गई। मंगलवार को चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव के साथ 14 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो राज्यों की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव का भी एलान किया। लेकिन मिल्कीपुर विधानसभा सीट के निर्वाचन का मामला कोर्ट में होने के कारण यहां उपचुनाव का एलान नहीं किया है।
उपचुनाव से पहले सपा ने मिल्कीपुर सीट से सांसद अवधेश के बेटे अजीत को अपना चेहरा बना दिया है। वहीं भाजपा भी इस सीट पर अपनी चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य और जिले के प्रभारी प्रताप शाही के साथ संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, खेल राज्यमंत्री गिरीश चंद यादव और खाद्य रसद राज्यमंत्री सतीश शर्मा की ड्यूटी यहां पर लगाई गई है। चारों मंत्री यहां का नियमित दौरा कर संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य दलों की बात करें तो बसपा ने मिल्कीपुर सीट से रामसागर कोरी को अपना उम्मीदवार बनाया है।