फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Sitamarhi: NDA's support is only in name of Ram, JDU's Devesh Chandra faces RJD's Arjun Rai

Ground Report: सीतामढ़ी में एनडीए को राम नाम का ही सहारा, JDU के देवेश चंद्र का RJD के अर्जुन राय से मुकाबला

Wed, 15 May 2024 05:39 AM IST
निर्मल कांत भूपेंद्र कुमार, सीतामढ़ी
भूपेंद्र कुमार, सीतामढ़ी Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 15 May 2024 05:39 AM IST
सार

महागठबंधन की ओर से राजद नेता अर्जुन राय पर दांव लगाया गया है। भूगोल में पीएचडी अर्जुन मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं और हथियारों के शौकीन हैं। 2019 में पिंटू ने राय को हराया था। वहीं देवेश ने कांग्रेस में महाराष्ट्र की राजनीति से शुरुआत की। बाद में वे जदयू में शामिल हो गए। चार बार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं।

विज्ञापन
Sitamarhi: NDA's support is only in name of Ram, JDU's Devesh Chandra faces RJD's Arjun Rai
देवेश चंद्र ठाकुर और अर्जुन राय - फोटो : चुनाव आयोग हलफनामा

विस्तार

माता जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की संसदीय सीट कई मायनों में अलग है। अतीत में समाजवादियों का गढ़ रही इस सीट पर आजतक कभी भाजपा का प्रत्याशी नहीं जीता। भाजपा और जनता दल (यू) के बीच जो सीटों का समझौता हुआ उसमें यह सीट जदयू के खाते में गई। हालांकि जदयू के टिकट पर ही 2019 में यहां से जीते सुनील कुमार पिंटू इस बार पार्टी के प्रत्याशी नहीं हैं। उनकी जगह पार्टी ने विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर पर दांव लगाया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि अयोध्या में राममंदिर बनने का फायदा मिलेगा। दरअसल, स्थानीय लोगों के लिए जानकी धाम की तरह ही यह भावनात्मक मुद्दा है। सीतामढ़ी को हाल में रामायण सर्किट में शामिल किया गया है। क्षेत्र के निवासियों को इससे विकास और रोजगार की उम्मीदें हैं।

विज्ञापन


महागठबंधन की ओर से राजद नेता अर्जुन राय पर दांव लगाया गया है। भूगोल में पीएचडी अर्जुन मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं और हथियारों के शौकीन हैं। 2019 में पिंटू ने राय को हराया था। वहीं देवेश ने कांग्रेस में महाराष्ट्र की राजनीति से शुरुआत की। बाद में वे जदयू में शामिल हो गए। चार बार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। वह पार्टी का ब्राह्मण चेहरा हैं। यही बात उनके पक्ष में गई।
विज्ञापन


दरअसल, जब बिहार में नीतीश कुमार की जदयू और लालू की पार्टी राजद की मिलीजुली सरकार थी, तो पिंटू ने जातीय जनगणना पर सवाल उठाए और कहा कि इसमें कुछ सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं। इस पर नीतीश नाराज हो गए और उनका टिकट कट गया। सीतामढ़ी सीट समझौते के तहत जदयू के पास गई। पिंटू के बारे में चर्चा थी कि वह भाजपा में शामिल होंगे और पार्टी उन्हें किसी और सीट से टिकट देगी। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


समाजवादी दिग्गज जेबी कृपलानी थे पहले सांसद
1957 में इस सीट से पहली बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता और दिग्गज समाजवादी जेबी कृपलानी चुने गए। इससे पहले यह सीट मुजफ्फरपुर पूर्व के नाम से जानी जाती थी। 1962, 1967, 1971 में लगातार तीन बार यहां से कांग्रेस नेता नगेंद्र प्रसाद जीते। यह करिश्मा फिर कोई नहीं दोहरा पाया। 1977 में जनता पार्टी के श्याम सुंदर दास को जीत मिली तो 1980 में कांग्रेस के बलीराम भगत सांसद बने। 1984 में कांग्रेस के रामश्रेष्ठ खिरहर विजयी हुए। इसके बाद कांग्रेस को कभी यहां से जीत नहीं मिली। 

1989 में जनता दल के हुकुमदेव नारायण यादव जीते तो 91 और 96 में जनता दल के नवल किशोर ने परचम लहराया। 1998 में यह सीट राजद के सीताराम यादव को मिली। 1999 में जदयू से नवल किशोर तो 2004 में राजद से सीताराम की फिर जीत हुई। 2009 में जदयू से अर्जुन राय जीते। 2014 में यह सीट समझौते के तहत उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा के पास गई और राम किशोर विजयी हुए।


पिछले दो चुनावों के हाल
(2019)



(2014)


कैसे पड़ा सीतामढ़ी नाम  
सीतामड़ई का अपभ्रंश सीतामही और फिर सीतामढ़ी। यानी सीता जी की नगरी। शहर से पांच किलोमीटर पश्चिम में पुनौरा धाम है, माना जाता है कि माता जानकी यानी सीता जी का जन्म यहीं हुआ था। किंवदंती है कि मिथिला में एक बार भीषण अकाल पड़ा था, तब राजा जनक ने हल चलाया था, यहीं हल के फाल से टकराकर एक घड़ा मिला था जिसमें शिशु रूप में सीता जी थीं। यहां उनका भव्य मंदिर है। इसी वजह से इसे रामायण सर्किट से जोड़ा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed