Election: महज 35,139 वोटों के साथ सैफुद्दीन सोज बन गए सांसद, पंजाब की भी इन तीन सीटों में सबसे कम वोटिंग
सबसे कम वोटिंग के मामले में तीन लोकसभा क्षेत्र पंजाब के हैं। खासकर आतंकवाद के दौर में यहां बेहद कम वोटिंग होती रही है। 1991-92 के लोकसभा चुनाव में तरनतारन 9.50 फीसदी और संगरूर 10.90 फीसदी वोटों के साथ चौथे और पांचवें नंबर पर है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सर्वाधिक मतदान के उलट सबसे कम मतदान वाले शीर्ष 10 लोकसभा क्षेत्र भी तीन ही राज्यों में स्थित हैं। इनमें भी शीर्ष तीन समेत चार सीटें आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में हैं। सूची में शीर्ष पर है अनंतनाग, जहां 1989 में सिर्फ 5.07 फीसदी वोटिंग हुई। कुल मतदान का 97.69 फीसदी यानी 36,055 वोट पाकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के पीएल हांडू सांसद बन गए।
सबसे कम वोटिंग
5.07 % मतदान अनंतनाग में। दूसरा स्थान बारामूला का है, जहां 1989 में 5.48 फीसदी वोट पड़े। कुल मतदान का 93.89 फीसदी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सैफुद्दीन सोज को मिला और सिर्फ 35,139 वोटों के सहारे सोज संसद में पहुंच गए। 2019 में 8.98 फीसदी वोट के साथ तीसरा स्थान फिर से अनंतनाग का रहा।
पंजाब की तीन सीटें भी सूची में
सबसे कम वोटिंग के मामले में तीन लोकसभा क्षेत्र पंजाब के हैं। खासकर आतंकवाद के दौर में यहां बेहद कम वोटिंग होती रही है। 1991-92 के लोकसभा चुनाव में तरनतारन 9.50 फीसदी और संगरूर 10.90 फीसदी वोटों के साथ चौथे और पांचवें नंबर पर है। पंजाब का ही बठिंडा इसी चुनाव में 13.92 फीसदी वोट के साथ 10 नंबर पर रहा। खास बात यह है कि सबसे कम मतदान वाली इस सूची में सातवें से नौवें स्थान पर तीन नाम ओडिशा से हैं जहां 1962 के आम चुनावों में भंजनगर, कोरापुट और फूलबनी में क्रमश: 12.04, 12.17 और 13.92 फीसदी वोट पड़े।