फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Rajgarh Ground Report: Digvijay Singh political skills will be tested in Lok Sabha elections 2024

राजगढ़ रिपोर्ट: सहानुभूति के दांव के साथ दिग्गी के राजनीतिक कौशल की होगी परीक्षा, कांटे की टक्कर में फंसी सीट

प्रेम प्रताप सिंह प्रेम प्रताप सिंह
Updated Sun, 05 May 2024 07:00 AM IST
सार

दिग्विजय सियासी जंग में अपनाई जाने वाली हर रणनीति आजमा रहे हैं। भाजपा पर हमले कर रहे हैं तो इमोशनल कार्ड भी खेल रहे हैं। सहानुभूति की लहर पर पूरी तरह सवार दिग्विजय लोगों के बीच जाकर कह रहे हैं कि मेरा आखिरी चुनाव है। राघौगढ़ मेरी जन्मस्थली, तो राजगढ़ कर्मभूमि है। 

विज्ञापन
Rajgarh Ground Report: Digvijay Singh political skills will be tested in Lok Sabha elections 2024
दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह अपने जीवन का सबसे कठिन चुनाव लड़ रहे हैं। वह 2019 में भोपाल से भाजपा की प्रज्ञा ठाकुर से हार गए थे। इस बार लड़ना नहीं चाहते थे। पार्टी ने मैदान में उतार दिया, तो 77 साल के 32 साल बाद राजगढ़ किले को बचाने के लिए खूब मेहनत कर रहे हैं। यह चुनाव दिग्गी राजा के राजनीतिक कौशल की असली परीक्षा भी ले रहा है। दिग्गी के इस इम्तिहान में उनका पूरा कुनबा मैदान में जुटा है। बेटे और राघौगढ़ विधायक जयर्वधन सिंह ने राघौगढ़ और चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र में मोर्चा संभाला है। दिग्विजय की पत्नी अमृता राय गांव-गांव घूम रही हैं। भाई और दोस्त भी अलग-अलग विधानसभा सीटों में लगे हैं।

विज्ञापन


दिग्विजय सियासी जंग में अपनाई जाने वाली हर रणनीति आजमा रहे हैं। भाजपा पर हमले कर रहे हैं तो इमोशनल कार्ड भी खेल रहे हैं। सहानुभूति की लहर पर पूरी तरह सवार दिग्विजय लोगों के बीच जाकर कह रहे हैं कि मेरा आखिरी चुनाव है। राघौगढ़ मेरी जन्मस्थली, तो राजगढ़ कर्मभूमि है। भाजपा के लिए भी राजगढ़ मजबूत गढ़ है। इस संसदीय सीट में राजगढ़, ब्यावरा, खिलचीपुर, सारंगपुर, नरसिंहगढ़, राघौगढ़, चाचौड़ा, सुसनेर विधानसभा सीटें आती हैं। छह पर भाजपा का कब्जा है। सिर्फ राघौगढ़ और सुसनेर सीट कांग्रेस के पास है। पूरे इलाके में आरएसएस की सक्रियता काफी अधिक है।
विज्ञापन


सांसद रोडमल नागर की कम सक्रियता को लेकर वोटर नाराज हैं, लेकिन मोदी के नाम पर खामोश हैं। इस सीट पर महिलाएं तय करेंगी कि किसे विजय का तिलक लगेगा क्योंकि महिला वोटर उज्ज्वला, राशन और लाडली बहना योजना को लेकर काफी खुश हैं। इस सीट पर लगभग 18 लाख वोटर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजगढ़ संसदीय सीट पर मीणा, दांगी, सौंधिया, गुर्जर, तंवर, धाकड़, राजपूत समाज का सबसे अधिक प्रभाव है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की ओर से जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश की जा रही है। पिछले दो चुनाव से यहां कांग्रेस को हार मिल रही है लेकिन दिग्विजय के आने से इस बार चुनाव थोड़ा अलग तरह का हो गया है।

चर्चा में गृह मंत्री शाह का बयान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बयान चर्चा में है। राजगढ़ में जनसभा के दौरान शाह ने कहा, दिग्विजय सिंह की राजनीति की परमानेंट विदाई करो। आशिक का जनाजा जरा धूम से निकले। सम्मानजनक लीड से हराकर उन्हें घर पर बैठाने का काम राजगढ़ वाले करें।


चुनावी मुद्दा
राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में बेरोजगारी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार है। रोजगार के कोई संसाधन नहीं है। रोजगार के लिए यहां के लोग राजस्थान और गुजरात पलायन करते है। शिक्षा के लिए यहां के युवा इंदौर, भोपाल और कोटा जाते है। मेडिकल कॉलेज बनाने का काम चल रहा है। यह कृषि बहुल इलाका है।

पिछले दो चुनावों का हाल
2019

उम्मीदवार दल मत%
रोडमल नागर भाजपा 65.4
मोना सुस्तानी कांग्रेस 31.2


 2014

उम्मीदवार दल मत%
रोडमल नागर भाजपा 59
एएन सिंह कांग्रेस 36.4
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed