फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Lok Sabha Elections PM Modi Chirag Paswan

चिराग पासवान: वक्त बदला...वनवास से चाचा की कीमत पर लौटे मोदी के हनुमान, बने भाजपा की आंखों के सुरमा

Thu, 21 Mar 2024 07:05 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Thu, 21 Mar 2024 07:05 AM IST
सार

चिराग के पक्ष में भाजपा में वातावरण तब बना, जब जदयू ने अचानक एनडीए से किनारा करते हुए राजद के साथ सरकार बना ली। इस बीच, भाजपा के आंतरिक सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि चिराग के स्वजातीय मतदाताओं में पशुपति की मजबूत पैठ नहीं है।

विज्ञापन
Lok Sabha Elections PM Modi Chirag Paswan
लोक जन शक्ति पार्टी रामविलास प्रमुख चिराग पासवान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजनीति में वक्त बदलते देर नहीं लगती। ताजा उदाहरण लोजपा के एक धड़े के नेता और लंबे समय से सियासी वनवास भोग रहे चिराग पासवान हैं। कभी भाजपा ने खुद को मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग पर उनके चाचा पशुपति पारस को तरजीह देकर उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया था। अब वक्त बदल गया है। अब वही चिराग भाजपा की आंखों के सूरमा हैं।
विज्ञापन


दरअसल, चिराग के बुरे दिन की शुरुआत 2021 के बिहार विधानसभा चुनाव से शुरू हुई। नीतीश से अदावत के बीच उन्होंने पार्टी को अपने दम पर चुनाव मैदान में उतारते हुए बिहारी फर्स्ट का नारा दिया। गठबंधन से दूरी के बावजूद भाजपा नहीं, सिर्फ जदयू की सीटों पर उम्मीदवार उतारे। इस रणनीति से लोजपा एक सीट ही जीत पाई, मगर दो दर्जन सीटों पर नुकसान के बाद जदयू की हैसियत भाजपा के छोटे भाई की रह गई। इससे भाजपा और जदयू में मतभेद गहरे हो गए।
विज्ञापन


नुकसान से खफा नीतीश ने चिराग के चाचा पशुपति पारस को साधा। चिराग के खिलाफ बगावत हुई। छह में से पांच सांसदों ने चिराग का साथ छोड़ दिया। तब मजबूर और बैकफुट पर खड़ी भाजपा ने चिराग पर पशुपति को न सिर्फ तरजीह दी, बल्कि दिवंगत रामविलास पासवान की जगह उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


चिराग के पक्ष में भाजपा में वातावरण तब बना, जब जदयू ने अचानक एनडीए से किनारा करते हुए राजद के साथ सरकार बना ली। इस बीच, भाजपा के आंतरिक सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि चिराग के स्वजातीय मतदाताओं में पशुपति की मजबूत पैठ नहीं है। इस वर्ग में चिराग के प्रति सहानुभूति है। राज्य के अहम दलित वोट बैंक को साधने में जुटी भाजपा ने अब चिराग को तरजीह देने का मन बनाया।

भाजपा से गठबंधन कराने में थी अहम भूमिका
वह चिराग ही थे, जब 2014 के चुनाव से पहले उन्होंने अपने पिता रामविलास पासवान को भाजपा से गठबंधन करने के लिए राजी किया था। इसके बाद हुए दोनों चुनावों में चिराग ने ही पार्टी की रणनीति तय की थी। बीते चुनाव में खराब स्वास्थ्य के कारण जब पासवान ने राज्यसभा से आने का फैसला किया, तब उनकी परंपरागत सीट हाजीपुर से चिराग के कहने पर पशुपति को उम्मीदवार बनाया गया। हालांकि, पासवान के निधन के बाद पशुपति ने चिराग को पार्टी में अलग-थलग कर दिया था।


हनुमान को मिल गई संजीवनी
नए समझौते के मुताबिक, भाजपा ने चिराग को दिवंगत पासवान की हाजीपुर समेत पांच सीटें दे दी हैं। पशुपति ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि भाजपा ने उन्हें राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव दिया था। फिलहाल तो मोदी के हनुमान को संजीवनी मिली है। वहीं, भाजपा ने अब न सिर्फ पशुपति को उनके हाल पर छोड़ दिया, बल्कि उनके पैरोकार बिहार के सीएम नीतीश कुमार की भी एक नहीं सुनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed