फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Lok Sabha Elections 2024 political atmosphere in Kolhapur, know ground report

ग्राउंड रिपोर्ट कोल्हापुर: आरक्षण की जमीन पर छत्रपति की अस्मिता और पीएम मोदी की गारंटी के बीच लड़ाई

Mon, 06 May 2024 05:54 AM IST
शिव शरण शुक्ला सुरेन्द्र मिश्र
सुरेन्द्र मिश्र Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 06 May 2024 05:54 AM IST
सार

शाहू छत्रपति महाराज वैचारिक तौर पर लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। 90 के दशक से वह चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उनकी तमन्ना अब जाकर पूरी हुई है। छत्रपति शिवाजी महाराज की यह दूसरी गद्दी है, जहां के राजा छत्रपति राजर्षि शाहू महाराज ने 1902 में आरक्षण लागू किया था। इसलिए उन्हें आरक्षण का जनक कहा जाता है।

विज्ञापन
Lok Sabha Elections 2024 political atmosphere in Kolhapur, know ground report
अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ऐतिहासिक शहर कोल्हापुर में राजा छत्रपति राजर्षि शाहूजी महाराज चौक के पास पहुंचते ही बोर्डिंग मदरसा दिखाई देता है। मदरसे के अंदर जाने पर अब्दुल कादिर अलबारी मिलते हैं, जो यहां के प्रशासक हैं। कहते हैं कि छत्रपति शाहू जी महाराज ने इसी तरह लिंगायत, मराठा, सारस्वत, सोनार, सुतार, जैन, हरिजन जैसे विभिन्न समाजों के लिए 22 बोर्डिंग स्कूल खुलवाए थे। अलबारी बताते हैं, छत्रपति शाहूजी महाराज ने 1906 में इसका उद्घाटन किया था। तब से मदरसा के अलावा स्कूल और कॉलेज भी चल रहा है। महाराज ने 48 एकड़ जमीन मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान के लिए दी थी। इसमें से 36 एकड़ अब भी हमारे पास है। हम उन्हीं की दी सुविधाओं को भोग रहे हैं। इस लोकसभा चुनाव में उन्हीं छत्रपति राजर्षि शाहूजी महाराज के पोते और छत्रपति शिवाजी महाराज के 12वें वंशज शाहू छत्रपति महाराज कोल्हापुर से कांग्रेस उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय मंडलिक से है। आरक्षण की भूमि कहे जाने वाले कोल्हापुर में इस बार छत्रपति की अस्मिता और मोदी की गारंटी की लड़ाई है।

विज्ञापन


शाहू छत्रपति महाराज वैचारिक तौर पर लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। 90 के दशक से वह चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उनकी तमन्ना अब जाकर पूरी हुई है। छत्रपति शिवाजी महाराज की यह दूसरी गद्दी है, जहां के राजा छत्रपति राजर्षि शाहू महाराज ने 1902 में आरक्षण लागू किया था। इसलिए उन्हें आरक्षण का जनक कहा जाता है। शाहू छत्रपति महाराज बहुजन वर्ग के हितैशी माने जाते हैं। मुस्लिम समाज में भी उनकी प्रतिष्ठा है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के गठबंधन महा विकास आघाड़ी के उम्मीदवार शाहू छत्रपति महाराज को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एएमआईएम और प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) का भी समर्थन है। लेकिन, शाहू महाराज के राजघराने के कुछ लोग उनके साथ नहीं है। इसलिए उनके लिए गद्दी के प्रति सम्मान को वोट में परिवर्तित करने की बड़ी चुनौती है।
विज्ञापन


पहलवानों व फुटबॉलरों की नगरी में रोजगार का टोटा
पंचगंगा नदी के तट पर बसे कोल्हापुर और आसपास के इलाके में गन्ने की खेती किसानों की आय का सबसे बड़ा साधन है। इसलिए इसे चीनी का कटोरा भी कहा जाता है। यह शहर फुटबाल, कुश्ती और कोल्हापुरी चप्पलों के लिए जाना जाता है। लेकिन, रोजगार का टोटा है। युवाओं में पीएम मोदी का क्रेज है, लेकिन रोजगार अहम मुद्दा है। लोग कहते हैं कि आईटी पार्क के लिए करीब 200 एकड़ जमीन अधिगृहीत की गई है लेकिन यहां गिनी-चुनी आईटी कंपनियां हैं। इसलिए रोजगार के लिए पुणे, मुंबई जाना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विरासत नहीं विकास पर बात करें महाराज
शिवसेना उम्मीदवार संजय मंडलिक कहते हैं कि उनकी लड़ाई शाहू महाराज से नहीं, बल्कि कोल्हापुर के लोगों के स्वाभिमान के लिए है। हमने काम किया है, जिसके आधार पर वोट मांग रहे हैं। शाहू छत्रपति महाराज ने 50 साल में लोगों के लिए क्या किया है। जब पलटवार हुआ तो नारा बदल गया-मान गादी (गद्दी) को, मत मोदी को। कारोबारी मनोज कोल्हेकर कहते हैं कि महाराज की गद्दी का सम्मान है, लेकिन देश के लिए पीएम मोदी जरूरी हैं। इसलिए हम उनका समर्थन करेंगे। एक पूर्व सैनिक भी यही बात दोहराते हैं। यहां मराठा आरक्षण का मुद्दा उतना प्रभावी नहीं है, लेकिन जातिगत समीकरण महत्वपूर्ण है।

खेती करे तो कुनबी, हथियार चलाए तो मराठा
कांग्रेस उम्मीदवार शाहू छत्रपति महाराज मराठा आरक्षण के प्रबल समर्थक हैं। वे मराठा समाज में ऊंच-नीच नहीं मानते। कहते हैं कि कुनबी और असल मराठा में कोई अंतर नहीं है। कुनबी भी मराठा हैं जो छत्रपति शिवाजी महाराज के सैनिक रहे हैं।


अजब संयोग : पिता ने छत्रपति के पुत्र को हराया, अब बेटे से लड़ रहे हैं महाराज
कोल्हापुर में इस बार अजब संयोग बना है। साल 2009 में सदाशिव मंडलिक ने शाहू छत्रपति महाराज के पुत्र संभाजी राजे को चुनाव में शिकस्त दी थी। अब शाहू महाराज सदाशिव मंडलिक के बेटे संजय मंडलिक से लड़ रहे हैं। छत्रपति घराने में 15 साल के बाद शाहू छत्रपति महाराज के रूप में कोई चुनाव मैदान में है। साल 2004 के विधानसभा चुनाव में शाहू छत्रपति महाराज के छोटे बेटे मालोजी राजे कांग्रेस से विधायक चुने गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed