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5th Phase: क्षत्रपों के गढ़ में परीक्षा; एनडीए के सामने प्रदर्शन दोहराने की चुनौती, विपक्ष को बेहतरी की आस

Mon, 20 May 2024 05:51 AM IST
Deepak Mishra Deepak Mishra
Updated Mon, 20 May 2024 05:51 AM IST
सार

2019 में पांचवें चरण की 49 सीटों में 41 पर एनडीए का कब्जा था। इस बार एनडीए के सामने प्रदर्शन दोहराने की बड़ी चुनौती है। महाराष्ट्र के बदले सियासी समीकरण एनडीए की राह मुश्किल कर सकते हैं। वहीं, विपक्ष को बेहतर प्रदर्शन की आस है।  

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Lok sabha election 2024 phase fifth 49 seats voting bjp bjd congress shiv sena and other parties in race
राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, राहुल गांधी, पीयूष गोयल, चिराग पासवान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए सरकार की कड़ी परीक्षा होगी। छह राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों की 49 सीटों पर सोमवार को वोटिंग होगी। सीटों की संख्या के लिहाज से यह सबसे छोटा, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण चरण है। पिछले चुनाव में एनडीए ने इनमें से 41 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस चरण में उसकी लड़ाई मुख्य रूप से क्षेत्रीय दलों से है। मगर, महाराष्ट्र के बदले सियासी समीकरण ने असर डाला तो एनडीए की राह मुश्किल हो सकती है। वहीं, विपक्ष इन्हीं समीकरणों के भरोसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें पाले बैठा है। इस चरण में बिहार की 5, झारखंड की 3, महाराष्ट्र की 13, ओडिशा की 5, उत्तर प्रदेश की 14, पश्चिम बंगाल की 7 और केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की 1-1 सीटें शामिल हैं।  

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सीटों के लिहाज से यह चरण मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में केंद्रित है। इस चरण की कुल 49 में से 34 सीटें इन्हीं राज्यों में हैं। 2019 में इनमें से 32 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। इनमें यूपी की 14 में से 13, महाराष्ट्र की 13 में से छह, बिहार की 5 में से तीन और झारखंड की तीनों सीटें शामिल थीं। शिवसेना को 7, तृणमूल कांग्रेस को 4, बीजू जनता दल को 2 और कांग्रेस, एलजेपी, जदयू और नेशनल कॉन्फ्रेंस को 1-1 सीटें मिली थीं।  

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महाराष्ट्र में भाजपा के लिए आसान नहीं 2019 दोहराना 
महाराष्ट्र में 2019 में भाजपा और शिवसेना मिलकर चुनाव लड़े थे और सभी 13 सीटों पर इसी गठबंधन को जीत मिली थी। इनमें से भाजपा के पास 6 और शिवसेना के पास 7 सीटें थीं। इस बार शिवसेना दो फाड़ है। हालांकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वाला धड़ा भाजपा के साथ है, लेकिन मराठी मानुष का भावनात्मक रूप से उद्धव ठाकरे के साथ जुड़ाव है, इसलिए भाजपा के लिए प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होगा। इस बार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी टूट गई है और अजीत पवार के नेतृत्व वाला मुख्य धड़ा भाजपा के साथ है। राज ठाकरे भी भाजपा के साथ हैं। इससे वह कुछ राहत की स्थिति में है, हालांकि लड़ाई कठिन ही होने वाली है। 

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बंगाल में सीएए पर आई लड़ाई 
बंगाल में जिन सात सीटों पर मतदान होंगे, उनमें से तीन सीटें भाजपा और चार तृणमूल के पास है। इंडिया गठबंधन में रहते हुए भी तृणमूल बंगाल में अकेले चुनाव लड़ रही है। राज्य में मुस्लिमों की अच्छी आबादी के चलते सीएए और एनआरसी का मुद्दा छाया हुआ है। ममता सीएए और एनआरसी को बंगाल में किसी भी कीमत पर लागू नहीं करने की बात करती हैं। वहीं, भाजपा हर हाल में सीएए को लागू करने की बात कर रही है। यहां पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह तक भाजपा के दिग्गज नेताओं ने चुनावी रैलियों को संबोधित किया है। इस बार भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।   

इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर 
राजनाथ सिंह : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिर लखनऊ से मैदान में हैं। यहां 1991 से लगातार भाजपा जीतती आई है। सपा ने लखनऊ मध्य से विधायक रविदार मेहरोत्रा को प्रत्याशी बनाया है, जबकि बसपा ने लखनऊ उत्तरी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके सरवर अली को उतारा है।  

स्मृति ईरानी : गांधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी से स्मृति इरानी लगातार दूसरी बार लोकसभा पहुंचने की कोशिश में हैं। कांग्रेस ने यहां से गांधी परिवार के भरोसेमंद रहे किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में स्मृति ने राहुल गांधी को 55,000 से अधिक मतों से पराजित किया था।  

राहुल गांधी : कांग्रेस नेता इस बार परंपरागत सीट अमेठी छोड़कर रायबरेली से मैदान में हैं। वह केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं। रायबरेली में उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पूरी ताकत झोंक दी है।  

करण भूषण सिंह : महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न में फंसे बृजभूषण शरण सिंह की जगह भाजपा ने उनके बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज सीट से मैदान में उतारा है। करण यूपी कुश्ती संगठन के अध्यक्ष और गोंडा में सहकारी बैंक के चेयरमैन हैं।  

रोहिणी आचार्य : राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य बिहार के सारण सीट से सियासी सफर शुरू कर रही हैं। उनके सामने भाजपा के राजीव प्रताप रूडी हैं। रूडी यहां पिछले दो बार से लगातार विजयी रहे हैं। 2014 में उन्होंने रोहिणी की मां और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी को हराया था और 2019 में चंद्रिका राय को, जो रोहिणी के भाई तेज प्रताप यादव के ससुर हैं।  

पीयूष गोयल : भाजपा नेता पीयूष गोयल पहली बार लोकसभा चुनाव के मैदान में हैं। वह मुंबई उत्तर से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने उन्हें गोपाल शेट्टी की जगह मैदान में उतारा है। गोयल के सामने कांग्रेस के भूषण पाटिल मैदान में है।   

उज्ज्वल निकम : मुंबई आतंकी हमले और 1993 के बम धमाके मामलों की सुनवाई के दौरान चर्चा में आए वकील उज्ज्वल निकम को भाजपा ने मुंबई उत्तर-मध्य से मैदान में उतारा है। यहां से पूनम महाजन पिछली बार जीती थीं। कांग्रेस ने उनके खिलाफ वर्षा गायकवाड़ को मैदान में उतारा है।  

उमर अब्दुल्ला : कश्मीर की बारामुला सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला चुनाव लड़ रहे हैंै। उमर के सामने महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी से फैयाज अहमद हैं। पिछली बार यह सीट नेशनल कॉन्फ्रेंस के अकबर लोन ने जीती थी।  

चिराग पासवान : बिहार में हाजीपुर सीट इस चुनाव की चर्चित सीटों में शुमार है। यहां एनडीए से लोजपा (आर) के चिराग पासवान मैदान में हैं। राजद ने शिवचंद्र राम को टिकट दिया है। शिवचंद्र विधायक व बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 2019 में यहां से चिराग के चाचा लोजपा से पशुपति पारस जीते थे। 

379 लोकसभा सीटों के लिए हो चुकी है वोटिंग 

  • 695 प्रत्याशी हैं मैदान में 
  • 82 प्रत्याशी यानी 12% महिलाएं 

कहांं कितनी सीटों पर मतदान

प्रदेश सीट प्रत्याशी 
उत्तर प्रदेश  14   144 
महाराष्ट्र 13  264 
प. बंगाल   07   88 
बिहार   05 80 
ओडिशा   05  40 
झारखंड    03  54 
जम्मू-कश्मीर   01   22 
लद्दाख   01 03  

यूपी में 7 सीटों पर कड़ी टक्कर 
यूपी में इस चरण की लड़ाई अवध व बुंदेलखंड में पहुंच गई है। इस चरण में 14 सीटों पर मतदान होना है। लखनऊ, मोहनलालगंज, रायबरेली, अमेठी, फैजाबाद, कैसरगंज, बाराबंकी, गोंडा, जालौन, झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर और कौशाम्बी सीट है।  

पिछले आम चुनाव में इनमें से रायबरेली को छोड़कर सभी सीटें भाजपा के पास थीं। कौशाम्बी, फैजाबाद, बांदा, मोहनलालगंज, अमेठी और कैसरगंज में भाजपा को एक लाख से बहुत कम वोटों से जीत मिली थी। भाजपा इन सीटों को अपने पास रखने के लिए जोर लगाए हुए है, वहीं विपक्ष अपना दम दिखाने के लिए जुटा हुआ है। 

अमेठी-रायबरेली पर सबकी नजर  
यूपी की दो सीटों अमेठी और रायबरेली पर सबकी नजर है। पिछले चुनाव में अमेठी में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 55 हजार मतों से पराजित किया था। इस बार राहुल अमेठी छोड़ रायबरेली चले गए हैं। रायबरेली गांधी परिवार की परंपरागत सीट रही है। यहां अखिलेश सिंह का भी दबदबा रहा है। अब उनकी सियासी विरासत उनकी बेटी अदिति सिंह संभाल रही हैं, जो इस चुनाव में भाजपा के साथ हैं। ऐसे में राहुल के लिए जीत दर्ज करना आसान नहीं है।  

अमेठी से स्मृति ईरानी लगातार तीसरी बार मैदान में हैं। 2014 में वह हार गई थीं, पर 2019 में लोकसभा पहुंचने में सफल रही थीं। उनके सामने गांधी परिवार के करीबी किशोरी लाल शर्मा मैदान में हैं। 

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