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खबरों के खिलाड़ी: स्वाति मालीवाल से जुड़ा मामला सामने आने के बाद क्या AAP के प्रचार की धार कमजोर होगी?

Sat, 18 May 2024 04:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 18 May 2024 04:19 PM IST
सार

Khabron Ke Khiladi, Swati Maliwal Assault Case: स्वाति मालीवाल ने मुख्यमंत्री आवास के अंदर मारपीट होने का आरोप लगाया है। इस मामले को राजनीति हो रही है। स्वाति मालीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच भी बयानबाजी चल रही है। इस मामले का कितना असर होगा? 

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Khabaron Ke Khiladi: What impact will Swati Maliwal case on Aam Aadmi Party loksabha campaign
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वाति मालीवाल आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य हैं और पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी बिभव कुमार पर मुख्यमंत्री आवास के अंदर मारपीट का आरोप लगाया है। ऐसा तब हुआ, जब केजरीवाल आबकारी नीति से जुड़े घोटाला मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। उनकी रिहाई के बाद आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव के प्रचार में और मुखर और आक्रामक हो गई। खुद केजरीवाल ने यह कह दिया कि प्रधानमंत्री तो 75 साल की उम्र पूरी करने के बाद हटने वाले हैं। उनके आक्रामक रुख के बीच ही यह नया विवाद सामने आ गया। इसी मुद्दे पर 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा के लिए इस बार वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।

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केजरीवाल ने जेल से बाहर आते ही सीधे प्रधानमंत्री पर पलटवार किया, इस रणनीति को किस तरह देखते हैं?
समीर चौगांवकर:
जब केजरीवाल जेल से बाहर आए तो उन्होंने कहा कि मोदी प्रधानमंत्री पद से हट जाएंगे। उनकी जगह अमित शाह पीएम बनेंगे। योगी आदित्यनाथ को भी मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जाएगा। उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि जेल से बाहर आने के बाद माहौल तो उन्होंने ही बनाया और बाकी विपक्षी दल अब तक ऐसा नहीं कर पा रहे थे। जब अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, तब कहा गया कि 75 साल से ज्यादा उम्र के नेता मार्गदर्शक की भूमिका में आएं। तब उन्होंने यह कभी नहीं कहा था कि ऐसे नेताओं को रिटायर कर देंगे। येदियुरप्पा, हेमा मालिनी जैसे नेता उदाहरण हैं, जो 75 साल से ज्यादा उम्र के होने के बाद भी पार्टी में सक्रिय हैं। 
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इसी बीच, स्वाति मालीवाल से जुड़ी घटना हो गई। घटना के बाद अरविंद केजरीवाल चुप्पी बनाए हुए हैं। लखनऊ में जब उनसे सवाल हुआ तो उन्होंने माइक संजय सिंह की तरफ बढ़ा दिया। बिभव कुमार पर अब तक पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की है। दिल्ली में मतदान से पहले आबकारी घोटाला मामले और स्वाति मालीवाल के मामले ने आम आदमी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। हालांकि, जब अपनी ही पार्टी के नेता पर आरोप लगते हैं तो राजनीतिक दल चुप्पी साध लेते हैं, चाहे भाजपा के लिए बृजभूषण शरण सिंह का मामला हो या आम आदमी पार्टी के लिए स्वाति मालीवाल से जुड़ा मामला हो। 
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इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन के रुख को किस तरह देखते हैं?
अवधेश कुमार:
इंडी गठबंधन की किसी एक पार्टी ने भी संदेशखाली के मामले की खुलकर आलोचना नहीं की। रेवन्ना मामले में सब एक हो गए। एक मुख्यमंत्री को सशर्त जमानत पर रिहा किया गया है। इसी बीच, स्वाति मालीवाल का मामला सामने आ गया। मालीवाल ने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसमें कही गईं बातें बहुत गंभीर है। अब उनकी ही पार्टी उनके खिलाफ हो गई है। उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, उनमें से अगर आधी से ज्यादा बातें भी सच हैं तो यह बहुत ही स्तब्ध कर देने वाला मामला है। ऐसा लग रहा है कि धृतराष्ट्र के दरबार में सभी ने आंखें बंद कर ली हैं। इंडी गठबंधन का एक भी नेता कुछ नहीं बोल रहा। कहा जा रहा है कि स्वाति मालीवाल को राज्यसभा सदस्य पद छोड़ने को कहा जा रहा था। यहीं से विवाद शुरू हुआ।

क्या यह गंभीर मामला पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है?
पूर्णिमा त्रिपाठी:
हम इस मामले की बहुत सारी चीजें नहीं जानते, इसलिए किसी एक को निर्दोष और दूसरे को पूरी तरह दोषी नहीं करार दिया जा सकता। घटना निंदनीय है, इसमें कोई दो राय नहीं है। इसे राजनीतिक मसला नहीं बनाना चाहिए। केजरीवाल जब तिहाड़ से लौटकर आए, तब आम आदमी पार्टी ने एक माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन अब लोगों का ध्यान बंटकर स्वाति मालीवाल से जुड़े मामले की तरफ चला गया है। 

अनुराग वर्मा: भारतीय राजनीति के साथ इस तरह की विडंबना हमेशा से रही है। जब से आम आदमी पार्टी सक्रिय राजनीति में है, तब से हमने सियासत में गिरावट का नया आयाम देखा। आम आदमी पार्टी बेहद अप्रत्याशित है। जब स्वाति मालीवाल की बात हो रही है तो वे इसे रेवन्ना मामले से जोड़ दे रहे हैं। वे अपनी बात नहीं कर रहे, जबकि मालीवाल आम आदमी पार्टी की पुरानी नेता हैं। ऐसे में इस पार्टी के बाकी नेताओं के आत्मसम्मान की क्या गारंटी है, यह कहना मुश्किल है। 

क्या इस मामले से केजरीवाल के प्रचार का असर कम होगा?
विनोद अग्निहोत्री:
यह मुद्दा आम आदमी पार्टी को परेशान तो करेगा। जब केजरीवाल तिहाड़ से छूटकर आए तो माना जाने लगा कि वे ही भाजपा को उसी की भाषा में जवाब दे सकते हैं। केजरीवाल ने जब प्रधानमंत्री को लेकर टिप्पणी की तो भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत पलटवार किया। दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री के रिटायरमेंट के मुद्दे पर तो भाजपा ने प्रतिक्रिया दी, लेकिन योगी पर कुछ नहीं कहा। एक तरह से केजरीवाल ने भाजपा को फंसा जरूर दिया, लेकिन इसी बीच स्वाति मालीवाल का मामला सामने आने से आम आदमी पार्टी बैकफुट पर आ गई। पूरा मामला निंदनीय है। अब यह जांच का विषय है। एफआईआर और क्रॉस एफआईआर हुई है। दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग ने पूरी तत्परता से इस मामले का संज्ञान लिया। यही तत्परता मणिपुर के मामले में, बृजभूषण शरण सिंह और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के मामले में भी दिखनी चाहिए थी। स्वाती मालीवाल, महिला पहलवानों से जुड़ा मामला, संदेशखाली, रेवन्ना केस जैसे सारे मामले एक जैसे हैं। जिस तरह निर्भया कांड में पूरा देश उठ खड़ा हुआ था, वैसे ही इन मुद्दों पर भी होना चाहिए था। अब संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है। महिला सम्मान के लिए बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन जब कोई मामला सामने आता है तो राजनीतिक दल अलग-अलग रुख अपनाते हैं।




अस्वीकरण: 'खबरों के खिलाड़ी' डिजिटल मीडिया के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक है। इसमें शामिल होने वाले अतिथि वक्ता विषय  विशेषज्ञ या विश्लेषक के तौर पर अपनी राय रखते हैं। चर्चा के दौरान उनकी कही बातें उनके स्वतंत्र विचारों पर आधारित होती हैं। इन विचारों को या इनके किसी हिस्से को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

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