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Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Ground Report: Tribal vs Tribal for the first time in Gujarat's Bharuch seat, Chettar's challenge to Mansukh

ग्राउंड रिपोर्ट: गुजरात की भरूच सीट पर पहली बार आदिवासी बनाम आदिवासी, मनसुख को युवा चेतर की चुनौती

Fri, 03 May 2024 07:01 AM IST
निर्मल कांत उपमिता वाजपेयी, भरूच (गुजरात)
उपमिता वाजपेयी, भरूच (गुजरात) Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 03 May 2024 07:01 AM IST
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सार
Lok Sabha Election: भाजपा के मनसुख 67 साल के अनुभवी आदिवासी नेता हैं। मुकाबले में 30 साल के चेतर वसावा हैं। वैसे तो मनसुख दूर के रिश्ते में चेतर के मामा लगते हैं, लेकिन फिलहाल रिश्ता पक्ष-विपक्ष का है। चेतर कहते हैं राजनीति में युवा होने का फायदा है, आप ज्यादा काम कर पाते हैं।
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Ground Report: Tribal vs Tribal for the first time in Gujarat's Bharuch seat, Chettar's challenge to Mansukh
ग्राउंड रिपोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गुजरात में 15 प्रतिशत आबादी आदिवासी है। यहां की चार लोकसभा सीटें दाहोद, छोटा उदयपुर, बारडोली और वलसाड आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटें हैं। इसके अलावा 40 प्रतिशत आबादी वाला भरूच जिला है तो सामान्य सीट पर यहां जीत-हार आदिवासी आबादी ही तय करती है।



यही नहीं, गुजरात विधानसभा में 182 में से 27 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। बाकी 40 सीटों पर भी आदिवासियों का दबदबा है। शायद यही वजह है कि राज्य में आदिवासियों के दो राजनीतिक दल भी हैं। पहली भारतीय ट्राइबल पार्टी और दूसरी उससे टूटकर बनी भारतीय आदिवासी पार्टी। पिछले छह बार से भाजपा के आदिवासी नेता मनसुख वसावा भरूच से सांसद हैं। हालांकि यह इलाका देश में कांग्रेस नेता अहमद पटेल की जन्मभूमि और कर्मभूमि के नाम से जाना जाता है। हालांकि, उन्होंने आखिरी बार 1984 में यहां से चुनाव जीता था।


भरूच के एक गांव में छोटे ट्रक पर बज रहे डीजे पर गाना चल रहा है...एक ही चाले, चेतर भाई चाले। कुछ आदिवासी कलाकार यही गाना गा रहे हैं। यह वह गाना है, जिसपर नाचे बिना आजकल इलाके की शादियां अधूरी मानी जाती हैं। चेतर भरूच से विपक्षी गठबंधन में आप पार्टी के प्रत्याशी हैं। राजनीतिक अनुमान के मुताबिक कांग्रेस को मिलने वाले मुस्लिम वोट चेतर के हिस्से जा सकते हैं। आदिवासी, उम्र और कांग्रेस के पारंपरिक मुस्लिम वोट चेतर की बढ़त की तीन मजबूत वजहें हो सकते हैं। हालांकि कांग्रेस नेता अहमद पटेल की मौत के बाद हो रहे पहले चुनाव में उनके परिवार से किसी को टिकट न देने से जुड़ी नाराजगी भी मुद्दा है। भरूच में 57% आबादी और 22% वोटर मुस्लिम हैं, जो शायद गुजरात की किसी भी सीट पर सबसे ज्यादा हैं। अहमद पटेल के नजदीकी नाजूभाई फड़वाला कहते हैं, चेतर के कार्यकर्ता जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलते हैं तो कहते हैं, आपके मुसलमान अगर चेतर भाई को वोट दे देंगे तो वह जीत जाएंगे।

दिलीप वसावा भारतीय आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी और ट्राइबल पार्टी के सर्वेसर्वा छोटू वसावा के बेटे हैं। छोटू वसावा सबसे बड़े आदिवासी नेता होने के बावजूद चार बार चुनाव लड़े, लेकिन कभी 1.5 लाख से ज्यादा वोट नहीं मिले। उनके बड़े बेटे महेश वसावा, जिनके हिस्से भारतीय ट्राइबल पार्टी आई है, वह कुछ माह पहले ही भाजपा में जा चुके हैं। भाजपा ने अपने पुरातन नेता मनसुख वसावा को टिकट दिया है। कहानी यह है कि भरूच में मुकाबला वसावा बनाम वसावा बनाम वसावा ही है। 1989 के बाद भाजपा यहां कभी हारी नहीं है।

मामा-भांजे की जंग...कौन मारेगा बाजी
भाजपा के मनसुख 67 साल के अनुभवी आदिवासी नेता हैं। मुकाबले में 30 साल के चेतर वसावा हैं। वैसे तो मनसुख दूर के रिश्ते में चेतर के मामा लगते हैं, लेकिन फिलहाल रिश्ता पक्ष-विपक्ष का है। चेतर कहते हैं राजनीति में युवा होने का फायदा है, आप ज्यादा काम कर पाते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 6 बार के सांसद का भरूच में दफ्तर तक नहीं है। सालों से भाजपा ने यहां आदिवासी उम्मीदवार को ही टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने मुस्लिम, पटेल और राजपूत को। पहली बार मुकाबला आदिवासी बनाम आदिवासी है। शायद यही वजह है कि चुनाव प्रचार की शुरुआत जय जोहार बोलकर होती है। देखना यह होगा कि भाजपा की लंबी पारी और मजबूत आधार का मुकाबला जब आदिवासी, आप और कांग्रेस के मतदाताओं से होगा तो जीतता कौन है।

प्रचार संभाल रहीं दोनों पत्नियां
चेतर जेल में थे और उन्हें डेडियापाड़ा जाने की मनाही थी, तब उनकी पत्नियां बैठकें और प्रचार का काम देखती थीं। चेतर की दो पत्नियां हैं, शकुंतला व वर्षा। दोनों साथ रहती हैं। दोनों ने पति की मदद के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी है। लोकसभा का पर्चा भरने गए तो दोनों चेतर के साथ थीं। नामांकन के वक्त उनकी पत्नी ने भी डमी उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा था। चेतर कहते हैं, घर की बातें हों या राजनीति के फैसले तीनों साथ करते हैं।

दिग्गजों के प्रचार के बावजूद जीते विधायकी
चेतर आप से विधायक का चुनाव लड़े, तो उनके इलाके में राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी और देश के गृह मंत्री अमित शाह दोनों भाजपा के प्रचार के लिए आए थे। इसके बावजूद चेतर जीतकर विधानसभा पहुंचे। भरूच की 7 विस में वह इकलौते गैर भाजपाई विधायक थे। 2015 में चेतर ने साढ़े चार साल एग्रीकल्चर ऑफिस की नौकरी करने के बाद आदिवासियों के हित में काम करने के लिए सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में उतर आए।

चेतर पर 14 केस, जिले में जाने पर थी रोक
चेतर वसावा पर 14 कोर्ट केस हैं। पिछले 6.5 महीने तक उन्हें नर्मदा जिले में घुसने की इजाजत नहीं थी। अपने घर और उस डेडियापाड़ा इलाके में जाने पर पाबंदी थी, जहां से वह विधायक हैं। यही नहीं भरूच शहर में रात ठहरने की भी मनाही थी। उन पर वनकर्मियों को धमकाने का कोर्ट केस था, जिसके चलते चेतर, उनकी पत्नी और गार्ड को जेल जाना पड़ा था। जेल से बाहर ऐसी ही पाबंदियों वाली शर्त पर आए थे। नामांकन के एक दिन पहले ही उन्हें जून के दूसरे हफ्ते तक के लिए अपने इलाके में जाने की छूट मिली है।

पिछले दो चुनावों का हाल
2019
उम्मीदवार            दल          मत%
मनसुख वसावा      भाजपा        55.43
शेरखां पठान         कांग्रेस      26.38

2014
उम्मीदवार             दल           मत%
मनसुख वसावा        भाजपा     51.73
जयेश पटेल           कांग्रेस        37.29

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