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Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   former HC judges Letter to President, saying in a hung situation, democratic traditions should be followed

Polls: हाईकोर्ट के पूर्व जजों का राष्ट्रपति को खत, कहा- त्रिशंकु की स्थिति में लोकतांत्रिक परंपरा का पालन हो

Tue, 04 Jun 2024 05:58 AM IST
निर्मल कांत ब्यूरो, नई दिल्ली।
ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 04 Jun 2024 05:58 AM IST
सार

Polls: हाईकोर्ट के पूर्व जजों ने खुले खत में कहा कि यह वास्तविक चिंता है कि यदि मौजूदा सत्तारूढ़ सरकार जनादेश खो देती है तो सत्ता का हस्तांतरण सुचारू नहीं हो पाएगा और सांविधानिक संकट पैदा हो सकता है।

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former HC judges Letter to President, saying in a hung situation, democratic traditions should be followed
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

लोकसभा चुनाव के नतीजों के एक दिन पहले हाईकोर्ट के सात पूर्व जजों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को खुला खत लिखा है। इसमें इन सभी ने चुनाव नतीजों में त्रिशंकु संसद की स्थिति में स्थापित लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करने और खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए सबसे बड़े चुनाव पूर्व गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का आग्रह किया। सेवानिवृत्त जजों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और मुख्य चुनाव आयुक्त से भी आग्रह किया कि यदि मौजूदा सत्तारूढ़ सरकार जनादेश गंवा देती है तो वे सत्ता का सुचारु हस्तांतरण सुनिश्चित करके संविधान को कायम रखें।

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खुले खत में मद्रास हाईकोर्ट के छह पूर्व न्यायाधीशों जीएम अकबर अली, अरुणा जगदीशन, डी हरिपरंथमन, पीआर शिवकुमार, सीटी सेल्वम, एस विमला और पटना हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश अंजना प्रकाश के हस्ताक्षर हैं। खुले खत में कहा, यह वास्तविक चिंता है कि यदि मौजूदा सत्तारूढ़ सरकार जनादेश खो देती है तो सत्ता का हस्तांतरण सुचारू नहीं हो पाएगा और सांविधानिक संकट पैदा हो सकता है। पूर्व सिविल सेवकों के सांविधानिक आचरण समूह (सीसीजी) के 25 मई के बयान से सहमति जताते हुए पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि हम सीसीजी के कथन में जिक्र किए परिदृश्य से सहमत हैं। 
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त्रिशंकु संसद की स्थिति में राष्ट्रपति के कंधों पर भारी जिम्मेदारियां आ जाएंगी। हमें पूरा विश्वास है कि वह सबसे अधिक सीटें जीतने वाले चुनाव पूर्व गठबंधन को पहले आमंत्रित करने की स्थापित लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करेंगी। इसके अलावा, वह खरीद-फरोख्त की संभावनाओं को रोकने का भी प्रयास करेंगी। इसने मुख्य न्यायाधीश और मुख्य चुनाव आयुक्त से ऐसी स्थिति में संविधान को कायम रखने और सत्ता का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।
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खत में कहा गया है कि हम हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों का किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है लेकिन हम संविधान में निहित आदर्शों और चुनावी लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हम 2024 के संसदीय चुनावों के संबंध में हाल की और वर्तमान घटनाओं पर गहरी पीड़ा के साथ यह खुला पत्र लिख रहे हैं। पिछले सप्ताहों में घटित अनेक घटनाएं बहुत ही गंभीर कहानी कह रही हैं जो संभवतः एक हिंसक निष्कर्ष पर पहुंच सकती है। ये हमारे अधिकांश लोगों के मन में वास्तविक आशंकाएं हैं। प्रतिष्ठित नागरिक और मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने भी यही आशंका जताई है।

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