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सियासत: MP में बदलती पीढ़ी की परीक्षा; नए CM के सामने शिवराज का रिकॉर्ड, पटवारी को साबित करना होगा नेतृत्व

Thu, 11 Apr 2024 05:20 AM IST
यशोधन शर्मा प्रेम प्रताप सिंह, जबलपुर
प्रेम प्रताप सिंह, जबलपुर Published by: यशोधन शर्मा Updated Thu, 11 Apr 2024 05:20 AM IST
सार

कांग्रेस की कमान संभालने के बाद जीतू पटवारी के लिए भी यह पहला चुनाव है। जिस तरह से कांग्रेस के विधायक और कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उसको रोकना पटवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

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Elections 2024 and Madhya Pradesh Politics Generation Change BJP Congress Shivraj Kamal Nath and other leaders
MP में बदलती पीढ़ी की परीक्षा - फोटो : Social Media

विस्तार

मध्य प्रदेश में विधानसभा के नतीजों ने सियासी तौर पर बदलाव का काम किया। जनता ने इतना बड़ा जनादेश दिया कि भाजपा ने दो दशक से सत्ता की बागडोर संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया। मोहन यादव को सत्ता के शीर्ष पर बैठाया। कांग्रेस की बुरी हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने युवा नेता जीतू पटवारी को पार्टी की कमान दी है।
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विधानसभा चुनाव के बाद दोनों ही पार्टियों में पीढ़ी परिवर्तन हो चुका है। इसके बाद यहां लोकसभा का पहला चुनाव होने जा रहा है। भाजपा पूरी तरह से पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ रही है, जबकि कांग्रेस या विपक्ष के पास कोई चेहरा नहीं है। चुनावी रणनीति पर इसका भी असर है। सीएम के तौर पर मोहन यादव के लिए यह पहला चुनाव है। उनकी कोशिश सभी 29 सीटें जीतकर 2019 का रिकॉर्ड ध्वस्त करने का है, जिससे उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर खुद को स्थापित करने में आसानी हो सके।
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भाजपा मिशन 29 पर तो हाथ के सामने अस्तित्व बचाने की लड़ाई
मिशन-29 के लिए पार्टी ने बड़े-बड़े नेताओं को मैदान में उतार दिया है। हालांकि, छिंदवाड़ा, मंडला और झाबुआ सीट सबसे अधिक चर्चा में है, क्योंकि कांग्रेस को आदिवासी वोट बैंक पर सबसे अधिक भरोसा है। राहुल गांधी की प्रदेश में पहली जनसभा आठ अप्रैल को आदिवासी इलाके मंडला और शहडोल संसदीय क्षेत्र में ही हुई।
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कांग्रेस की कमान संभालने के बाद जीतू पटवारी के लिए भी यह पहला चुनाव है। जिस तरह से कांग्रेस के विधायक और कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उसको रोकना पटवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। कमलनाथ के बेहद करीबी रहे तीन बार के विधायक कमलेश शाह, दीपक सक्सेना कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं। इससे पार्टी की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

हर इलाके से कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में पटवारी की कोशिश है कि किसी भी तरह से प्रतिष्ठा बचाई जाए। 29 में से कुछ सीटें किसी भी तरह से कांग्रेस के खाते में चलीं जाएं, जिससे वे अपने नेतृत्व को साबित कर सकें, लेकिन मोदी के मैजिक के आगे पटवारी किस तरह से लड़ाई लड़ते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। कांग्रेस ने उमंग सिंघार को नए और आदिवासी चेहरे के तौर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया है। पटवारी और सिंघार के कंधे पर ही पार्टी को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है।

भाजपा की राजनीति पिछड़े वर्ग पर फोकस
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है। इसलिए भाजपा ने मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग से आने वाले शिवराज को हटाया तो उनकी जगह ओबीसी से ही आने वाले मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया। ताकि किसी भी सूरत में ओबीसी वर्ग नाराज न होने पाए। राहुल गांधी की ओर से कुछ महीने पहले तक ओबीसी को लेकर प्रमुखता से मुद्दा उठाया जा रहा था।

दिग्गजों का अधिक फोकस खुद की सीटों पर
शिवराज सिंह चौहान को सीएम पद से हटाने के बाद से ऐसा लग रहा था कि पार्टी का एक वर्ग नाराज हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिवर्तन के बाद शिवराज खामोश रहे, नतीजतन, उन्हें भाजपा ने लोकसभा के चुनावी मैदान में उतार दिया। वह विदिशा से संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव में पूरा प्रदेश मथने वाले शिवराज अपनी ही सीट पर सिमट गए हैं। आसपास की कुछ सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों के लिए भी प्रचार कर चुके हैं, लेकिन पहले की तरह नहीं।


कांग्रेस में पूर्व सीएम कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ को किसी भी तरह से चुनावी जीत दिलाने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं। वह लगातार छिंदवाड़ा में कैंप कर रहे हैं। वहीं, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी अपनी सीट राजगढ़ तक ही सीमित होकर रह गए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें मोदी लहर में भोपाल से हार का सामना करना पड़ा था।

मध्य प्रदेश: कुल सीटें 29

2019
पार्टी      सीट     मत%
भाजपा   28      58.5
कांग्रेस   01       34.8

2014
पार्टी      सीट     मत%
भाजपा    27      43.4
कांग्रेस    02      40.1



मध्य प्रदेश में इस बार चार चरणों में चुनाव संपन्न होंगे। मतदान 19 व 26 अप्रैल और 7 व 13 मई को होगा।
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