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LS Election: राशन की गारंटी से मनरेगा जैसे असर की उम्मीद, 10 किलो राशन की घोषणा पर क्यों मजबूर हुई कांग्रेस?
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कांग्रेस की चुनावी रणनीति।
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अमर उजाला
विस्तार
केंद्र में सत्ता में आने से पहले भाजपा मनमोहन सिंह सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना की खूब आलोचना करती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसने इस योजना को नहीं रोका। उलटे समय-समय पर इस योजना के लिए जारी की गई धनराशि में लगातार बढ़ोतरी ही की गई। इसका सबसे बड़ा कारण है कि मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं के बीच खूब लोकप्रिय हुई थी और 2009 में यूपीए की केंद्र में दोबारा वापसी के पीछे भी इसी योजना की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण थी।
अब पासा पलट चुका है। भाजपा केंद्र में सत्ता में है और इस चुनाव में जीतकर वह लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। वहीं, कांग्रेस सबसे बड़े विपक्षी दल की भूमिका में है और वह केंद्र को उसकी योजनाओं पर घेर कर सत्ता में आने की रणनीति बना रही है। लेकिन इस बार दोनों के बीच राशन योजना पर युद्ध छिड़ गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावों की घोषणा होने से पहले ही यह एलान कर चुके हैं कि देश के 80 करोड़ गरीबों को मिलने वाले पांच किलो मुफ्त राशन को अगले पांच सालों के लिए बढ़ा दिया गया है। यानी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत दिया जाने वाला पांच किलो राशन देश के 80 करोड़ गरीबों को 2029 तक मिलता रहेगा।
कांग्रेस इस योजना की अब तक आलोचना करती रही है। कांग्रेस नेताओं का दावा रहा है कि 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देकर सरकार यह सिद्ध कर रही है कि इस देश के 80 करोड़ लोग अभी भी गरीबी के जाल में फंसे हुए हैं। वे भोजन करने के लिए भी केंद्र सरकार की सहायता योजना पर निर्भर कर रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार यह सरकार का कबूलनामा है कि इस देश में अभी भी गरीबी बनी हुई है। कांग्रेस के अनुसार, इस आधार पर देश से गरीबी कम करने का केंद्र सरकार का दावा स्वयं ही फेल हो जाता है।
तब 10 किलो अनाज की घोषणा क्यों?
लेकिन आज (15 मई) ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह घोषणा की है कि यदि इंडिया गठबंधन की केंद्र में सरकार बनती है, तो पांच किलो मिलने वाले राशन को बढ़ाकर 10 किलो हर महीने कर दिया जाएगा। उन्होंने इसे कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की गारंटी बताया है। लेकिन भाजपा प्रवक्ता एसके सिंह का दावा है कि मुफ्त राशन योजना को जारी रखने की घोषणा कर कांग्रेस ने यह स्वीकार कर लिया है कि केंद्र सरकार की यह योजना न केवल सफल है, बल्कि यह देश के गरीबों के बीच बहुत लोकप्रिय भी है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज तक केंद्र सरकार की योजनाओं की राशन योजना की आलोचना करने वाली कांग्रेस आज स्वयं राशन देने की घोषणा कर रही है।
भाजपा नेता एसके सिंह के अनुसार, कांग्रेस ने केवल एक योजना की नकल करने की कोशिश की है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला योजना, लखपति दीदी योजना और जनधन योजना जैसी पचास योजनाएं शुरू की हैं, जो जनता के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस के लिए उन सभी योजनाओं की कॉपी करना और उनके प्रति जनता में भरोसा पैदा कर पाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दस किलो राशन योजना से कोई लाभ नहीं है क्योंकि जनता को कांग्रेस की गारंटी पर कोई भरोसा नहीं है।
मनरेगा जैसा असर पैदा कर सकती है राशन योजना
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने अमर उजाला से कहा कि 2019 में भाजपा के केंद्र की सत्ता में दोबारा वापस आने के पीछे केवल बालाकोट और पुलवामा की घटना ही जिम्मेदार नहीं थी। जिस तरह केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए गरीब घरों की महिलाओं को घरों का मालिकाना अधिकार दिया और किसान सम्मान निधि के रूप में किसानों के खाते में सीधे पैसा पहुंचाया, उसने केंद्र की सत्ता में वापसी की राह आसान की। यह मनरेगा के कारण यूपीए की सत्ता में वापसी के जैसा कदम था।
कुमार राकेश के अनुसार, राशन योजना कोरोना काल में जितनी लोकप्रिय हुई थी, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। यदि केंद्र सरकार ने उस समय राशन योजना को लेकर खजाना नहीं खोला होता, तो कोरोना से ज्यादा भुखमरी के कारण गरीबों की मौत हो जाती। चूंकि, उस गरीब समुदाय के मन में इस राशन योजना का वह असर आज भी जिंदा है, यदि केंद्र सरकार की सत्ता में वापसी होती है, तो इसके पीछे इस योजना का बड़ा असर हो सकता है। संभवतः यही कारण है कि चुनावी समर बेला की शुरुआत के काफी पहले ही प्रधानमंत्री ने इसे अगले पांच साल के लिए बढ़ाकर बड़ा दांव खेल दिया था। हालांकि, कांग्रेस ने बीच चुनाव में दस किलो राशन देने की घोषणा कर बड़ा दांव खेला है। कुमार राकेश के अनुसार, लेकिन उसे इसका लाभ तभी मिल पाएगा जब वह इसे निचले स्तर तक जनता के बीच ले जा पाएगी।