Praniti Shinde: पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील शिंदे की बेटी, तीन बार की विधायक, सोलापुर से संसद जाने की आस
मुंबई के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स कॉलेज से अर्थशास्त्र और राजनीति में डिग्री हासिल करने के बाद कानून की भी पढ़ाई की है। 2009 में पहली बार सोलापुर शहर से शुरू हुआ प्रणिती की जीत का सफर थमा नहीं और तीन बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया।
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मनमोहन सिंह सरकार में गृह मंत्री रहे कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे की उत्तराधिकारी प्रणिती शिंदे के लिए सोलापुर से पिता की विरासत को वापस हासिल करना बड़ी चुनौती होगी। ग्लैमर और आक्रामक राजनीति के सहारे प्रणिती संसद का सपना साकार करना चाहती हैं। प्रणीति उच्च शिक्षित युवा विधायक हैं। अपने पिता की तरह अच्छे जनसंपर्क, मिलनसार लेकिन कभी-कभी साहसी व आक्रामक स्वभाव और प्रभावी व्यवहार से बहुत कम समय में खुद को साबित किया है। 2009 से 14 तक शिंदे सोलापुर से सांसद थे। 2014 की मोदी लहर में वे अपनी परंपरागत सीट हार गए। हार का सिलसिला 2019 में भी कायम रहा। इस बार कांग्रेस ने सोलापुर से उनकी बेटी प्रणिती को प्रत्याशी बनाकर चुनावी समर में उतारा है।
शिंदे ने पिछले साल दशहरे पर ही प्रणीति को अपना उत्तराधिकारी बताते हुए सोलापुर से लोकसभा के लिए उनकी उम्मीदवारी का एलान किया था। प्रणीति राजनीति व अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दुनिया में नौसिखिया नहीं हैं। मुंबई के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स कॉलेज से अर्थशास्त्र और राजनीति में डिग्री हासिल करने के बाद कानून की भी पढ़ाई की है। 2009 में पहली बार सोलापुर शहर से शुरू हुआ प्रणिती की जीत का सफर थमा नहीं और तीन बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। वह 2021 से महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं।
बेबाक बयानों ने दिलाईं सुर्खियां
प्रणिती शिंदे यूं तो मिलनसार नेता हैं, लेकिन कांग्रेस विचारधारा और गांधी परिवार के प्रति वफादारी में कई बार बेबाक बयान देने से नहीं चूकतीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एआईएमआईएम के असदुद्दीन औवेसी, एनसीपी के रोहित पवार की आलोचना की है और मौके-बेमौके राजनीतिक बयान भी दिए हैं। कोरोना काल में लोगों की मौत पर उन्होंने कहा था कि झांझ बजाने की वजह से देश का पतन हुआ है। कोरोना से हुई मौतों के लिए प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं और मीडिया के सामने आने से भी डरते हैं। 2021 में पीएम मोदी पर तंज भी कसा कि वह सिर्फ चुनाव के वक्त ही जनता के सामने आते हैं। यही नहीं, 2018 में तत्कालीन भाजपा सांसद शरद बनसोडे को मूर्ख कहा था।
एनजीओ के जरिये जनकल्याण से जुड़ीं
42 साल की प्रणिती सबसे कम उम्र में विधायक बनने वाले नेताओं में हैं। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें विधानसभा चुनावों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य भी बनाया हैं। वह सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं और अपने एनजीओ जय जुई के जरिये जनकल्याण में जुटी रहती हैं। उनकी संस्था में कुशन कवर, जूट उत्पाद, हस्तशिल्प, रेशम के हैंड बैग, बैग, कोस्टर, मैट, कपड़े के फाइल फोल्डर, पेन स्टैंड, मोमबत्तियां बनते हैं।