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Election: किस राज्य में कैसे हैं समीकरण, कहां, कौन, किसके लिए खड़ी करेगा मुसीबत, जानें सभी राज्यों के हाल

Sun, 17 Mar 2024 06:16 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 17 Mar 2024 06:16 AM IST
सार

सियासी नेताओं के हर बयान अब सुर्खियों में होंगे, तो जवाबी हमले भी राजनीतिक गर्मी पैदा करेंगे। देश के मुद्दे छाएंगे, तो राज्यों के समीकरण भी असर दिखाएंगे। आयोग की सख्ती के बावजूद निजी हमले होंगे...बाल की खाल उधेड़ी जाएगी। अब जनता जनार्दन तय करेगी कि साथ किसका देना है, देश को किस रंग में रंगना है।

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Amar ujala Exclusive politics know equations of all States UP MP Rajasthan South India BJP Congress
Lok Sabha Election 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

रणभेरी बज चुकी है...चुनाव आयोग के 7 चरणों में मतदान कराने के एलान के साथ ही अगले तीन महीने पूरा देश चुनावी रंग में रंग जाएगा। वादों-इरादों के अनोखे और अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे। मैदान में ताल ठोक रहे राजनेता सत्ता का सिंहासन पाने के लिए हर सियासी दांव-पेच आजमाते नजर आएंगे।

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जम्मू-कश्मीर, लद्दाख : 370 के खात्मे का दिखेगा नया रंग
बीते चुनाव के बाद सबसे चर्चित राज्य अब दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बंट गया है। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद भाजपा यहां सकारात्मक बदलाव को मुद्दा बना रही है। तैयारी घाटी तक पहुंच बनाने की है। दो ताकतवर क्षेत्रीय दलों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी का मुख्य मुद्दा पूर्ण राज्य के दर्जे के साथ 370 की फिर से बहाली है। कांग्रेसी दिग्गज रहे गुलामनबी आजाद अब डेमोक्रेटिक प्रगतिशील आजाद पार्टी बनाकर नई पारी खेल रहे हैं। एनसी-पीडीपी ने गठबंधन तोड़ दिया है। कांग्रेस फिलहाल अकेली है।

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पिछला परिणाम
  1. कुल सीटें- 6
  2. भाजपा- 3
  3. एनसी- 3

गुजरात: तीन दशक से भाजपा का अभेद्य किला
पश्चिम भारत और पीएम मोदी के गृह राज्य के तौर पर पहचान। लोकसभा के बीते दो चुनावों में क्लीन स्वीप के अलावा बीते विधानसभा चुनाव में तीन चौथाई से भी बड़ी प्रचंड जीत से भाजपा के हौसले बुलंद। कांग्रेस यहां आप के साथ गठबंधन कर चुनौती पेश करने की कोशिश कर रही है। हालांकि मुश्किल यह है कि पार्टी के नेता एक-एक कर भाजपा का दामन थाम रहे हैं। चुनाव में भाजपा का मुद्दा हमेशा की तरह हिंदुत्व व राष्ट्रवाद है। पीएम मोदी व गृह मंत्री अमित शाह का गृह प्रदेश होने के कारण राज्य की अस्मिता के मुद्दे का लाभ भी भाजपा को मिलता रहा है।

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पिछला परिणाम

  1. कुल सीटें- 26
  2. भाजपा- 26

हिमाचल प्रदेश : बगावत के चलते संकट में कांग्रेस
उत्तर भारत में कांग्रेस शासित इकलौता राज्य। सैनिकों की बहुतायत वाले प्रदेश में बीते साल भाजपा को कांग्रेस के हाथों सत्ता गंवानी पड़ी। हालांकि, सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ अब पार्टी में ही असंतोष चरम पर है। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह बगावत की कमान संभाले हुए हैं। भाजपा के सामने फिर से क्लीन स्वीप करने की, तो कांग्रेस की खाता खोलने की चुनौती है।

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  1. कुल सीटें- 4
  2. भाजपा- 4

पंजाब : किसान आंदोलन के बीच बहुध्रुवीय दिख रही लड़ाई
पांच साल में राज्य की सियासत पूरी बदल गई। कांग्रेस और अकाली दो ध्रुव थे। अब सत्ता आप के पास है। अकाली दल ने किसान आंदोलन के बहाने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया, तो कांग्रेस के स्तंभ रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ भाजपाई हो गए। आप विपक्षी गठबंधन में शामिल है, मगर कांग्रेस संग सीटों का बंटवारा उलझा है। किसान आंदोलन नए सिरे से शुरू हुआ है। इन सबके बीच अकाली दल फिर भाजपा से गठजोड़ में जुटा है। यहां बहुध्रुवीय लड़ाई नजर आ रही है।

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  1. कुल सीटें- 13
  2. कांग्रेस- 8
  3. भाजपा- 2
  4. अकाली दल- 2
  5. आप- 1
(उपचुनाव में आप ने इकलौती व कांग्रेस ने एक सीट गंवा दी।)

उत्तराखंड
देवभूमि और भाजपा का मजबूत किला। पिछले चुनाव में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा ने राज्य की सत्ता बरकरार रख हर चुनाव में परिवर्तन की परंपरा से पार पाने में सफलता हासिल की। पार्टी का मुख्य मुद्दा देवभूमि में किया गया विकास है। मोदी सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के भी कई प्रयास किए हैं।

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  1. कुल सीटें- 5
  2. भाजपा- 5

हरियाणा
जाटलैंड कहे जाने वाले हरियाणा में जाट बिरादरी लोकसभा और विधानसभा के बीते दो चुनावों में हाशिये पर रही है। भाजपा को लगातार ब्रांड मोदी और गैरजाट राजनीति का लाभ मिला है।

पिछला परिणाम

  1. कुल सीटें- 10
  2. भाजपा- 10

पिछले लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा की चुनौती पुराना प्रदर्शन बरकरार रखने की है। वहीं, कांग्रेस आधार पाने की जद्दोजहद में है। विपक्ष महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न व किसान आंदोलन को मुद्दा तो बना रहा है, पर अन्य राज्यों की तरह यहां भी विपक्ष बिखरा है। विधानसभा में भाजपा का जेजेपी से गठबंधन था। हालांकि सियासी उठापटक में मनोहरलाल की जगह नायब सिंह सैनी सीएम बने और जेजेपी से गठबंधन तोड़ दिया।

दिल्ली : राजधानी में दो बार से भाजपा का दबदबा
देश की राजधानी के मतदाता राजनीति के माहिर खिलाड़ी साबित हो रहे हैं। बीते दो लोकसभा चुनाव में सभी सीटें भाजपा को जबकि विधानसभा में 90 फीसदी सीटें आप को देते रहे हैं। इस बार कांग्रेस और आप ने गठजोड़ कर लिया है, लेकिन बीते दो चुनावों में दोनों पार्टियों को मिले वोटों का जोड़ भी भाजपा के वोटों के पार नहीं गया है। ऐसे में इस गठजोड़ का कितना लाभ विपक्ष को मिलेगा, कहना कठिन है। स्थानीय सांसदों के खिलाफ किसी भी असंतोष से निपटने के लिए भाजपा केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी सहित 4 सांसदों का पत्ता काट चुकी है।

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  1. कुल सीटें- 7
  2. भाजपा- 7

महाराष्ट्र : असली-नकली के बीच दिलचस्प लड़ाई
बीते विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सियासत कई उलटफेर का शिकार रही। शिवसेना ने स्वाभाविक सहयोगी भाजपा से नाता तोड़ धुर विरोधी कांग्रेस व एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई। उद्धव सीएम तो बन गए, पर पहले शिवसेना और बाद में एनसीपी ही टूट गई। चुनाव आयोग ने भले ही शिवसेना और एनसीपी के असली-नकली का अपने हिसाब से फैसला कर दिया हो, लेकिन जनता किसे असली मानती है, फैसला लोकसभा चुनाव में होना है।

पिछला परिणाम
  1. कुल सीटें- 48
  2. भाजपा- 23
  3. शिवसेना- 18
  4. एनसीपी- 4
  5. कांग्रेस- 1
  6. अन्य- 2

उत्तर प्रदेश : सत्ता बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका
सियासी दृष्टि से देश का सबसे अहम राज्य। दो चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत ने केंद्र में पहली बार कांग्रेस के इतर किसी दल की बहुमत की सरकार बनाने में निभाई भूमिका। बीते चुनाव में बसपा के साथ मैदान में उतरी सपा इस बार कांग्रेस के साथ। पूरब में अपना दल, निषाद पार्टी, सुभासपा तो पश्चिम में रालोद को साधने के बाद भाजपा को फिर बड़ी जीत की उम्मीद। सपा-कांग्रेस की सामाजिक न्याय के पिच पर राजग को घेरने की योजना जबकि भाजपा सामाजिक न्याय और राम मंदिर उद्घाटन से उठे ज्वार के सहारे मैदान मारने की जुगत में। बसपा के अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने के फैसले से भाजपा के हौसले बुलंद।

पिछला परिणाम

  1. कुल सीटें- 80
  2. भाजपा+- 64
  3. बसपा- 10
  4. सपा- 5
  5. कांग्रेस- 1

बिहार : जाति गणना के रंग से कौन होगा बेरंग
देश में जाति आधारित राजनीति का केंद्र। बीते दो साल में राज्य के सीएम नीतीश कुमार के दो बार पाला बदलने और जातिगत गणना की देशव्यापी चर्चा। बीते दो दशक से नीतीश ही सत्ता का संतुलन हैं। जिसके साथ गए, उसी की बादशाहत रही। विपक्ष से जदयू को झटक कर भाजपा ने अंतिम समय में झटका दिया। हालांकि लोजपा के दो धड़ों के कारण सीट बंटवारे की गुत्थी सुलझाना अहम चुनौती है। एनडीए और विपक्ष में शामिल दोनों दलों की निगाहें जातीय समीकरण साधने पर हैं। राजद, कांग्रेस, सामाजिक न्याय की पिच पर एनडीए को घेर रहे हैं, तो सामाजिक न्याय की राजनीति के पुरोधा कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर भाजपा ने विपक्ष को उलझा दिया है।

पिछला परिणाम
  1. कुल सीटें- 40
  2. भाजपा- 17
  3. जदयू- 16
  4. लोजपा- 6
  5. कांग्रेस- 1

मध्यप्रदेश: शिव-मोहन राज से फिर भगवा आस
हिंदी पट्टी का अहम राज्य और देश का दिल। भाजपा का मजबूत किला। तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने अभिनव प्रयोगों के सहारे विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की। भाजपा कांग्रेस की अजेय सीट छिंदवाड़ा पर फोकस कर रही है, तो पूर्व सीएम कमलनाथ की नाराजगी और सांसद पुत्र नकुलनाथ के भाजपा में जाने की अटकलों से गहराया संकट टिकट मिलने के बाद फिलहाल टल गया है। भाजपा को शिवराज चौहान के बाद मोहन यादव सरकार के भरोसे फिर भगवा लहराने की उम्मीद है।

पिछला परिणाम

  1. कुल सीटें- 29
  2. भाजपा- 28
  3. कांग्रेस- 1

राजस्थान: अभेद्य किले को भेदना कांग्रेस की बड़ी चुनौती
बीते साल के अंत में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता छीन ली। लोकसभा में दो चुनावों से यह राज्य भाजपा के अभेद्य किले में तब्दील हो चुका है। बीते चुनाव में भाजपा की सहयोगी आरएलपी ने नई राह चुनी है। भाजपा वसुंधरा राजे जैसे पुराने दिग्गजों से परे नया नेतृत्व उभारने में जुटी है। कांग्रेस की सारी उम्मीदें पूर्व सीएम अशोक गहलोत व सचिन पायलट पर टिकीं हैं।

पिछला परिणाम
  1. कुल सीटें- 25
  2. भाजपा- 25

तमिलनाडु : सनातन पर टिप्पणी का दिखेगा असर
यहां की राजनीति द्रमुक व अन्नाद्रमुक के बीच सिमटी रही है। राष्ट्रीय दल इन्हीं के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरते हैं। पिछले चुनाव में द्रमुक की अगुवाई में यूपीए ने 39 में से 38 सीटें जीतीं। इस बार द्रमुक प्रमुख स्टालिन के बेटे उदयनिधि के सनातन धर्म विरोधी बयानों और सरकार के मंत्रियों पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों ने भाजपा को तीसरा कोण बनाने का मौका दिया। राज्य भाजपा प्रमुख के. अन्नामलाई की सभाओं में भीड़ अलग संदेश दे रही है।

पिछला परिणाम

  1. कुल सीटें- 39
  2. द्रमुक- 20
  3. कांग्रेस- 08
  4. अन्य- 10
  5. अन्नाद्रमुक- 01

आंध्रप्रदेश : टीडीपी बड़ी चुनौती में घिरी
लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी होंगे। विपक्षी टीडीपी के सामने अभी नहीं, तो कभी नहीं की चुनौती है। टीडीपी की एनडीए में वापसी व भाजपा और जनसेना के साथ गठबंधन से नया समीकरण बना है। राज्य की सत्ता और आम चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाली वाईएसआरसीपी के सामने प्रदर्शन दोहराने की चुनौती। 

पिछला परिणाम 

  1. कुल सीटें- 25
  2. वाईएसआरसीपी- 22 
  3. टीडीपी- 3

ओडिशा: दूर रहकर भी बीजद साथ
सीएम नवीन पटनायक के चेहरे के साथ बीजद राज्य में सबसे ताकतवर। संसद में बीते दस साल से बीजद-भाजपा की दोस्ती चर्चा का विषय रही, मगर गठबंधन पर फैसला नहीं। बीते चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बनकर भाजपा ने चौंका दिया था। हालांकि अस्वस्थ चल रहे पटनायक को लेकर कई तरह की अटकलों का बाजार गर्म है। वहीं, कांग्रेस के सामने राज्य में नेतृत्व और संगठन की बड़ी चुनौती सामने है।

पिछला परिणाम

  1. कुल सीटें- 21
  2. बीजेडी- 12
  3. भाजपा- 8
  4. कांग्रेस- 1

तेलंगाना
बीते साल के अंत में हुए विधानसभा चुनाव में दक्षिण भारत के इस राज्य ने कांग्रेस को जीत के साथ राहत दी। भाजपा के सामने बीते चुनाव में जीती सीटें बचाने और आधार बढ़ाने की, तो बीआरएस के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है। कांग्रेस राज्य की अस्मिता का मुद्दा उठा रही है। हैदराबाद क्षेत्र में ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम बड़ी ताकत है।

पिछला परिणाम 

  1. कुल सीटें- 17
  2. बीआरएस- 9 
  3. भाजपा- 4
  4. कांग्रेस- 3 
  5. एआईएमआईएम- 1

झारखंड
झामुमो की अगुवाई में गठबंधन की सरकार, पर लोकसभा के बीते दो चुनावों में भाजपा का पलड़ा भारी रहा है। सीएम रहे हेमंत सोरेन के जेल जाने से झामुमो संकट में है। पहली बार राज्य की सत्ता सोरेन परिवार के इतर दूसरे हाथों में है। यूपीए आदिवासी अस्मिता को मुद्दा बना रहा है। वहीं, बाबू लाल मरांडी की घर वापसी को भाजपा फायदे के रूप में देख रही है। 

पिछला परिणाम 
  1. कुल सीटें- 13
  2. भाजपा- 11
  3. आजसू, झामुमो, कांग्रेस 1-1

कर्नाटक: दक्षिण में भाजपा के लिए अंतिम आसरा
दक्षिण भारत का अंतिम किला गंवाने के बाद भाजपा की चुनौती बढ़ी है। जद-एस से गठबंधन के बाद उसका विश्वास बढ़ा है। यह राज्य दक्षिण में उसका अंतिम आसरा है। बीते चुनाव में महज एक सीट जीतने वाली कांग्रेस सत्ता में वापसी के बाद बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद पाले बैठी है।

पिछला परिणाम 

  1. कुल सीटें- 28
  2. भाजपा- 25 
  3. भाजपा समर्थित निर्दलीय- 1 
  4. कांग्रेस- 1 
  5. जदएस- 1

असम : पूर्वोत्तर में भाजपा का नया गढ़
सियासी दृष्टि से पूर्वोत्तर भारत का सबसे अहम राज्य और भाजपा का नया गढ़। मुस्लिमों की बड़ी आबादी के बावजूद भाजपा दो विधानसभा चुनावों और दो आम चुनावों में बेहतर प्रदर्शन में सफल रही है। सीएम हिमंत बिस्व सरमा हिंदुत्व के नए ब्रांड के रूप में उभरे हैं। कांग्रेस की चुनौती एआईयूडीएफ है, जिसका मुसलमानों में प्रभाव है। 

पिछला परिणाम 

  1. कुल सीटें- 14
  2. भाजपा- 9 
  3. कांग्रेस- 3 
  4. एआईयूडीएफ- 1
  5. निर्दलीय- 1

त्रिपुरा
भाजपा को शून्य से अचानक शिखर पर पहुंचाने वाला राज्य। जिस दल के पास एक भी विधायक नहीं था, उसने दशकों पुरानी वाम मोर्चा सरकार को हरा कर सनसनी मचा दी थी। पार्टी लगातार दो बार से राज्य की सत्ता में। कांग्रेस-वाम मोर्चा साथ-साथ मैदान में।  

पिछला परिणाम 
  1. कुल सीटें- 2
  2. भाजपा- 2

केरल
लोकसभा में प्रचंड जीत दर्ज करने वाला कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ वाम दलों की अगुवाई वाले एलडीएफ से पार नहीं पा सका। अब तक खाता खोलने में नाकाम रही भाजपा ने चर्च से संबंध बेहतर करने के साथ कांग्रेसी एके एंटनी सहित कई नेताओं को साधा है। 

पिछला परिणाम 

  1. कुल सीटें- 20
  2. यूडीएफ- 19
  3. एलडीएफ- 1

अरुणाचल प्रदेश
सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से पूर्वोत्तर और देश का अहम राज्य। भाजपा ने इस बार भी अपने दोनों पुराने चेहरों केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और तापिर गाव पर भरोसा जताया है।

पिछला परिणाम 

  1. कुल सीटें- 2
  2. भाजपा- 2

पश्चिम बंगाल : संदेशखाली में छिपा संदेश
तृणमूल के अभेद्य दुर्ग में बीते चुनाव में 18 सीटें जीत कर भाजपा ने चौंका दिया। हालांकि विधानसभा में प्रचंड जीत हासिल कर ममता बनर्जी ने वापसी की। वर्तमान में संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपी शाहजहां शेख को बचाने को लेकर ममता की खूब किरकिरी हुई। भाजपा की निगाहें इस राज्य में विस्तार पर टिकी हैं। महिला सुरक्षा, तृृणमूल कार्यकर्ताओं का आतंक और मुस्लिम तुष्टीकरण मुख्य मुद्दा।  तृृणमूल 28% मुसलमानों को साधे रहने की रणनीति पर चल रही है। उसका कांग्रेस से गठबंधन भी नहीं हो पाया। कभी वामपंथ की राजनीति का अभेद्य दुर्ग रहे राज्य में वाम दल अंतिम सांसें गिन रहे हैं।

पिछला परिणाम

  1. कुल सीटें- 42
  2. टीएमसी- 22
  3. भाजपा- 18
  4. कांग्रेस- 2
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