जीके: एमपी, एमएलए, एमएलसी... क्या होता है इनका मतलब? जानें तीनों के बीच का फर्क और इनकी जिम्मेदारियां
एमपी, एमएलए और एमएलसी में क्या अंतर है? कौन जनता के वोट से चुना जाता है और किसे चुनने में विधायक की भूमिका होती है? आसान भाषा में समझिए तीनों पदों की जिम्मेदारी, चुनाव का तरीका और उनके अधिकार...
विस्तार
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक... चार राज्यों के विधान परिषद चुनाव की चर्चा के बीच एमएलसी (MLC) शब्द काफी चर्चा में है। इसके अलावा, चुनाव के दौरान एमएलए (MLA) और एमपी (MP) जैसे शब्द भी अक्सर सुनने को मिलते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तीनों पदों में क्या अंतर है? कौन सांसद कहलाता है, कौन विधायक और एमएलसी बनने के लिए किस तरह चुनाव होता है? साथ ही, देश के किन राज्यों में विधान परिषद है और किनमें नहीं?
आइए, आसान भाषा में समझते हैं इन तीनों पदों का मतलब, इनके अधिकार और चुनाव की प्रक्रिया...
एमपी (MP) क्या होता है?
(MP - Member of Parliament)
एमपी का पूरा नाम मेंबर ऑफ पार्लियामेंट (सांसद) है। संसद के सदस्य को सांसद कहा जाता है। संसद देश के स्तर पर कानून बनाने और सरकार के कामकाज पर नजर रखने वाली प्रमुख संस्था है। भारत की संसद में राष्ट्रपति के साथ दो सदन हैं- लोकसभा और राज्यसभा। इन दोनों सदनों के सदस्यों को सांसद कहा जाता है।
- लोकसभा सांसद: इन्हें आमतौर पर जनता सीधे अपने वोट से चुनती है। इसके लिए देश को अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में बांटा गया है।
- राज्यसभा सांसद: इन्हें आम तौर पर संबंधित राज्यों के निर्वाचित विधायक चुनते हैं। हालांकि, राज्यसभा में कुछ विशेष प्रतिनिधित्व संबंधी संवैधानिक प्रावधान भी हैं।
सांसद का काम क्या होता है?
सांसद संसद में देश से जुड़े मुद्दे उठाते हैं, कानून बनाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और केंद्र सरकार के कामकाज पर सवाल पूछते हैं। वे अपने संसदीय क्षेत्र और देश से जुड़े विषयों को भी सामने रखते हैं।
उदाहरण: अगर किसी लोकसभा क्षेत्र से कोई उम्मीदवार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचता है, तो वह लोकसभा सांसद यानी एमपी कहलाता है।
एमएलए (MLA) क्या होता है?
(MLA - Member of Legislative Assembly)
एमएलए का पूरा नाम मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव असेंबली (विधायक) है। विधायक राज्य की विधानसभा का सदस्य होता है। जैसे लोकसभा देश के स्तर पर काम करती है, वैसे ही विधानसभा राज्य के स्तर पर कानून बनाने और राज्य सरकार के कामकाज पर चर्चा करने वाली प्रमुख संस्था है।
एमएलए का चुनाव कैसे होता है?
राज्य को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में बांटा जाता है। हर क्षेत्र के मतदाता अपने क्षेत्र से विधायक चुनने के लिए मतदान करते हैं। जिस उम्मीदवार को चुनाव में जीत मिलती है, वह उस क्षेत्र का विधायक बनता है।
विधायक का काम क्या होता है?
- राज्य से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाना।
- राज्य के कानून बनाने और उनमें बदलाव की प्रक्रिया में हिस्सा लेना।
- राज्य सरकार से सवाल पूछना और उसके कामकाज की जांच करना।
- अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और सरकार के सामने रखना।
उदाहरण: अगर उत्तर प्रदेश के किसी विधानसभा क्षेत्र से कोई उम्मीदवार चुनाव जीतता है, तो वह उत्तर प्रदेश का विधायक यानी एमएलए कहलाएगा। विधायक का मुख्य कार्यक्षेत्र राज्य होता है, जबकि सांसद का कार्यक्षेत्र संसद और राष्ट्रीय स्तर के विषय होते हैं।
एमएलसी (MLC) क्या होता है?
(MLC - Member of Legislative Council)
एमएलसी का पूरा नाम मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव काउंसिल (विधान परिषद सदस्य) है। विधान परिषद राज्य के विधानमंडल का उच्च सदन होता है। कुछ राज्यों में विधानमंडल के दो सदन होते हैं- विधानसभा और विधान परिषद। उत्तर प्रदेश और बिहार ऐसे ही राज्य हैं। वहीं, कई राज्यों में केवल विधानसभा होती है।
एमएलसी का चुनाव कैसे होता है?
एमएलसी बनने के लिए सभी सीटों पर एक जैसा चुनाव नहीं होता। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, विधान परिषद के सदस्यों के चयन के अलग-अलग तरीके हैं।
- स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि: कुछ सदस्य नगरपालिकाओं और अन्य निर्धारित स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्यों वाले निर्वाचन मंडल से चुने जाते हैं।
- स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: कुछ सीटों पर निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत स्नातक मतदाता वोट देते हैं।
- शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले और पंजीकृत शिक्षक मतदाता कुछ सीटों पर मतदान करते हैं।
- विधायकों द्वारा चुनाव: कुछ सदस्यों को राज्य के विधायक चुनते हैं।
- राज्यपाल द्वारा मनोनयन: कुछ सदस्यों को संविधान में निर्धारित विषयों और योग्यताओं के आधार पर राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि हर एमएलसी को सीधे आम जनता के वोट से नहीं चुना जाता।
एमएलसी का काम क्या होता है?
- राज्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना।
- विधेयकों पर विचार करना और उनमें बदलाव के सुझाव देना।
- सरकार के कामकाज पर चर्चा के माध्यम से निगरानी रखना।
- शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों के अनुभव को सदन में सामने रखना।
विधान परिषद की भूमिका कानूनों पर दोबारा विचार करने और चर्चा का अतिरिक्त अवसर देने की भी होती है। हालांकि, उसकी शक्तियां विधानसभा के समान नहीं हैं। खासकर धन विधेयक के मामले में विधानसभा को अधिक अधिकार प्राप्त हैं।
भारत के कितने राज्यों में विधान परिषद हैं?
भारत के हर राज्य में विधान परिषद नहीं है। जिन राज्यों में विधान परिषद है, वहां एमएलसी होते हैं। जिन राज्यों में केवल विधानसभा है, वहां विधान परिषद सदस्य का पद नहीं होता। भारत के 28 राज्यों में से केवल 6 राज्यों में विधान परिषद (Vidhan Parishad) है, यानी इन राज्यों में एमएलसी (MLC) होते हैं।
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- महाराष्ट्र
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
इन छह राज्यों में विधानसभा के साथ विधान परिषद भी है। बाकी 22 राज्यों में विधान परिषद नहीं है। इन राज्यों में केवल विधानसभा है।
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