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आठ आठ घंटे के अभ्यास से एशियन गेम्स में जीता पदक
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Oct 2014 12:18 PM IST
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बुलंदशहर के पचौता गांव के रहने वाले सतीश कुमार यादव ने इंचियोन में पिछले दिनों संपन्न हुए एशियन गेम्स में मुक्केबाजी स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश के साथ-साथ अपने शहर का नाम भी बुलंद किया है।
महज चार साल में कड़ी मेहनत की बदौलत सतीश ने एशियन गेम्स में मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतने में सफलता पाई। कुमाऊं रेजीमेंट में हवलदार सतीश को कांस्य पदक मिलने से न केवल पूरे परिवार में, बल्कि पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है।
स्पोर्ट्स में कुछ कर दिखाने की तमन्ना से मिली ऊर्जा से एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर भारत लौटे सतीश ने अपनी मेहनत, सफलता और जीवन के बारे में कई बातें बताईं। पेश हैं, उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश :
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बॉक्सिंग की राह पर आपके कदम कैसे बढ़ने लगे?
मैं बाक्सिंग को लेकर बहुत क्रेजी हूं, लेकिन आरंभ में मैंने बॉक्सर बनने के बारे में नहीं सोचा था। मैं कबड्डी खेलता था। वर्ष 2009 में 11 इन्फेंट्री कुमायूं, रानी खेत से सेना में भर्ती हुआ था। 2010 में सेना के कोच खेमानंद ने बॉक्सिंग के बारे में मुझे अप्रोच किया। मैंने बस हां कर दी। फिर पंजाब के पटियाला स्पोर्ट्स कैंप में रोजाना सात-आठ घंटे के अभ्यास की बदौलत ही यह पदक जीतने में मैं सफल रहा।
पदक जीतकर कैसा महसूस हुआ? क्या इसकी उम्मीद थी?
देश के लिए कुछ करने का मौका मिले, इससे बढ़कर खुशी और क्या हो सकती है। देश सेवा के लिए सेना में गया और अब देश के लिए कुछ करने पर जो खुशी मिली है, उसका आकलन करना बहुत मुश्किल है। मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैं कई लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरा।
अपनी जीत का श्रेय आप किसे देना चाहेंगे?
अपनी जीत का श्रेय मैं अपने पापा, दादा, मम्मी और पत्नी के अलावा अपने कोच खेमानंद को दूंगा। परिवार का विश्वास और गुरुजी का अनुभव मेरे काम आया। मेरा हौसला हमेशा बुलंदी पर रहा।
आपका लक्ष्य क्या है?
रियो ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना फिलहाल मेरा लक्ष्य है। इसको लेकर नियमित रूप से अभ्यास कर रहा हूं।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में अब तक आप कितने पदक जीत चुके हैं?
मैं अब तक 12 मेडल जीत चुका हूं। तीन वर्ष पूर्व खेल प्रतियोगिता के बल पर सेना ने मुझे हवलदार पद पर पदोन्नत किया था। अब एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने पर नायब सूबेदार बनाया गया है।
आपके मुताबिक जीत का मूलमंत्र क्या है?
निरंतर परिश्रम से आप किसी भी क्षेत्र में जीत हासिल कर सकते हैं। कड़ी मेहनत के बल पर आप न सिर्फ अपने कॅरियर की बेहतर रूपरेखा निर्धारित कर सकते हैं, बल्कि देश का नाम भी रोशन कर सकते हैं।
किसी भी खेल में कॅरियर बना रहे खिलाड़ियों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं खिलाडिय़ों से कहूंगा कि खूब मेहनत करें। सरकार की ओर से जो मदद मिलती है, उसका लाभ उठाएं, अन्यथा अपने बूते तैयारी करने में भी किसी भी तरह से पीछे न रहें।
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महज चार साल में कड़ी मेहनत की बदौलत सतीश ने एशियन गेम्स में मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतने में सफलता पाई। कुमाऊं रेजीमेंट में हवलदार सतीश को कांस्य पदक मिलने से न केवल पूरे परिवार में, बल्कि पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है।
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स्पोर्ट्स में कुछ कर दिखाने की तमन्ना से मिली ऊर्जा से एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर भारत लौटे सतीश ने अपनी मेहनत, सफलता और जीवन के बारे में कई बातें बताईं। पेश हैं, उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश :
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बॉक्सिंग की राह पर आपके कदम कैसे बढ़ने लगे?
मैं बाक्सिंग को लेकर बहुत क्रेजी हूं, लेकिन आरंभ में मैंने बॉक्सर बनने के बारे में नहीं सोचा था। मैं कबड्डी खेलता था। वर्ष 2009 में 11 इन्फेंट्री कुमायूं, रानी खेत से सेना में भर्ती हुआ था। 2010 में सेना के कोच खेमानंद ने बॉक्सिंग के बारे में मुझे अप्रोच किया। मैंने बस हां कर दी। फिर पंजाब के पटियाला स्पोर्ट्स कैंप में रोजाना सात-आठ घंटे के अभ्यास की बदौलत ही यह पदक जीतने में मैं सफल रहा।
पदक जीतकर कैसा महसूस हुआ? क्या इसकी उम्मीद थी?
देश के लिए कुछ करने का मौका मिले, इससे बढ़कर खुशी और क्या हो सकती है। देश सेवा के लिए सेना में गया और अब देश के लिए कुछ करने पर जो खुशी मिली है, उसका आकलन करना बहुत मुश्किल है। मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैं कई लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरा।
अपनी जीत का श्रेय आप किसे देना चाहेंगे?
अपनी जीत का श्रेय मैं अपने पापा, दादा, मम्मी और पत्नी के अलावा अपने कोच खेमानंद को दूंगा। परिवार का विश्वास और गुरुजी का अनुभव मेरे काम आया। मेरा हौसला हमेशा बुलंदी पर रहा।
आपका लक्ष्य क्या है?
रियो ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना फिलहाल मेरा लक्ष्य है। इसको लेकर नियमित रूप से अभ्यास कर रहा हूं।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में अब तक आप कितने पदक जीत चुके हैं?
मैं अब तक 12 मेडल जीत चुका हूं। तीन वर्ष पूर्व खेल प्रतियोगिता के बल पर सेना ने मुझे हवलदार पद पर पदोन्नत किया था। अब एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने पर नायब सूबेदार बनाया गया है।
आपके मुताबिक जीत का मूलमंत्र क्या है?
निरंतर परिश्रम से आप किसी भी क्षेत्र में जीत हासिल कर सकते हैं। कड़ी मेहनत के बल पर आप न सिर्फ अपने कॅरियर की बेहतर रूपरेखा निर्धारित कर सकते हैं, बल्कि देश का नाम भी रोशन कर सकते हैं।
किसी भी खेल में कॅरियर बना रहे खिलाड़ियों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं खिलाडिय़ों से कहूंगा कि खूब मेहनत करें। सरकार की ओर से जो मदद मिलती है, उसका लाभ उठाएं, अन्यथा अपने बूते तैयारी करने में भी किसी भी तरह से पीछे न रहें।
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