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कभी उधार के जूते पहनकर खेला क्रिकेट!
एजुकेशन डेस्क
Updated Mon, 01 Sep 2014 01:35 PM IST
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रेलवे की ओर से रणजी खेलने वाले अनुरीत सिंह उन युवा क्रिकेट खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने उधार के जूते पहनकर भारत-ए क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया है। तमाम आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए रणजी में उन्होंने अपनी गेंदबाजी की छाप छोड़ी है। पेश है, अनुरीत सिंह से एक मुलाकात :
आपके क्रिकेटर बनने के सफर की शुरुआत कैसे हुई?
गली-मोहल्ले से क्रिकेट की शुरूआत हुई। कभी क्रिकेट को गंभीरता से नहीं लिया। न ही कभी सोचा कि आगे चलकर इसे कैरियर बनाऊंगा। अच्छे प्रदर्शन के चलते आगे के दरवाजे खुलते गए।
परिवार का इसमें कितना योगदान है?
क्रिकेट में कैरियर निर्माण में परिवार का सबसे ज्यादा सहयोग रहा। माता-पिता जो मेरे लिए कर सकते थे, हमेशा किया। कभी भी उन्होंने क्रिकेट खेलने से मना नहीं किया, बल्कि प्रोत्साहित किया। हां, मेरी पढ़ाई को लेकर जरूर चिंतित रहते थे।
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कैरियर में किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
आर्थिक तौर पर सबसे ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ा। क्रिकेट का सामान खरीदने और प्रशिक्षण लेने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे वक्त में माता-पिता के अलावा क्रिकेटर संजय बांगर, मुरली कार्तिक ने काफी सहयोग किया। एक वक्त ऐसा भी था, जब मैंने उधार के जूते पहनकर गेंदबाजी की।
अब तक की अपनी उपलब्धियों के बारे में बताएं?
हाल ही में भारत-ए की ओर से खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया दौरे से आया हूं। इसके अलावा इस बार रणजी का दूसरा सर्वाधिक विकेट लेने वाला गेंदबाज रहा। आईपीएल भी खेल चुका हूं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्थानीय स्तर पर खेले जाने वाले क्रिकेट से किस तरह अलग है?
पूरी तरह से खेल का स्तर बदल जाता है। स्थानीय स्तर पर हो सकता है कि आपकी विपक्षी टीम में बेहतर खिलाड़ी न हों। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा नहीं होता। विपक्षी टीम स्वयं में बेहतर होती है। ऐसे में गलती करने की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
खेल में कोचिंग की क्या भूमिका होती है?
लगन और मेहनत के बाद क्रिकेट में जो महत्वपूर्ण है, वह कोचिंग ही है। कोचिंग की मदद से ही खिलाड़ी खेल की बारीकियों को बेहतर ढंग से समझता है और उसके खेल में सुधार आता है।
खिलाड़ियों के लिए फिट रहना कितना जरूरी है?
खिलाड़ी के लिए फिटनेस की जरूरत के बारे में मुझसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता। 2009 और 2014 में चोटिल होने की वजह से ही आईपीएल में बेंच पर बैठा रहा। मेरे मुताबिक अनफिट खुलाड़ी कुछ नहीं कर सकता। इसलिए खेल में कैरियर बनाना है, तो फिटनेस पर काफी ध्यान दें।
अब आपका लक्ष्य क्या है?
हर क्रिकेटर की तरह भारतीय टीम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करना मेरा लक्ष्य है। यकीन है कि मेहनत और साथियों की मदद से ये हासिल करूंगा।
खेल में कैरियर बनाने वाले युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मेहनत, मेहनत और सिर्फ मेहनत। कोच की मदद से खेल की बारीकियों को समझें और खुद को फिट रखें।
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आपके क्रिकेटर बनने के सफर की शुरुआत कैसे हुई?
गली-मोहल्ले से क्रिकेट की शुरूआत हुई। कभी क्रिकेट को गंभीरता से नहीं लिया। न ही कभी सोचा कि आगे चलकर इसे कैरियर बनाऊंगा। अच्छे प्रदर्शन के चलते आगे के दरवाजे खुलते गए।
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परिवार का इसमें कितना योगदान है?
क्रिकेट में कैरियर निर्माण में परिवार का सबसे ज्यादा सहयोग रहा। माता-पिता जो मेरे लिए कर सकते थे, हमेशा किया। कभी भी उन्होंने क्रिकेट खेलने से मना नहीं किया, बल्कि प्रोत्साहित किया। हां, मेरी पढ़ाई को लेकर जरूर चिंतित रहते थे।
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कैरियर में किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
आर्थिक तौर पर सबसे ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ा। क्रिकेट का सामान खरीदने और प्रशिक्षण लेने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे वक्त में माता-पिता के अलावा क्रिकेटर संजय बांगर, मुरली कार्तिक ने काफी सहयोग किया। एक वक्त ऐसा भी था, जब मैंने उधार के जूते पहनकर गेंदबाजी की।
अब तक की अपनी उपलब्धियों के बारे में बताएं?
हाल ही में भारत-ए की ओर से खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया दौरे से आया हूं। इसके अलावा इस बार रणजी का दूसरा सर्वाधिक विकेट लेने वाला गेंदबाज रहा। आईपीएल भी खेल चुका हूं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्थानीय स्तर पर खेले जाने वाले क्रिकेट से किस तरह अलग है?
पूरी तरह से खेल का स्तर बदल जाता है। स्थानीय स्तर पर हो सकता है कि आपकी विपक्षी टीम में बेहतर खिलाड़ी न हों। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा नहीं होता। विपक्षी टीम स्वयं में बेहतर होती है। ऐसे में गलती करने की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
खेल में कोचिंग की क्या भूमिका होती है?
लगन और मेहनत के बाद क्रिकेट में जो महत्वपूर्ण है, वह कोचिंग ही है। कोचिंग की मदद से ही खिलाड़ी खेल की बारीकियों को बेहतर ढंग से समझता है और उसके खेल में सुधार आता है।
खिलाड़ियों के लिए फिट रहना कितना जरूरी है?
खिलाड़ी के लिए फिटनेस की जरूरत के बारे में मुझसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता। 2009 और 2014 में चोटिल होने की वजह से ही आईपीएल में बेंच पर बैठा रहा। मेरे मुताबिक अनफिट खुलाड़ी कुछ नहीं कर सकता। इसलिए खेल में कैरियर बनाना है, तो फिटनेस पर काफी ध्यान दें।
अब आपका लक्ष्य क्या है?
हर क्रिकेटर की तरह भारतीय टीम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करना मेरा लक्ष्य है। यकीन है कि मेहनत और साथियों की मदद से ये हासिल करूंगा।
खेल में कैरियर बनाने वाले युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मेहनत, मेहनत और सिर्फ मेहनत। कोच की मदद से खेल की बारीकियों को समझें और खुद को फिट रखें।
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