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मेडिकल में जाने की इच्छा ने दिलाई सफलता
Updated Mon, 01 Sep 2014 12:36 PM IST
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मेडिकल सेक्टर में जाने की अदम्य इच्छा और उसके अनुरूप की गई तैयारी से अरुण को मिली मंजिल...
मानव सेवा के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में कैरियर बनाने की ललक हापुड़ के रहने वाले अरुण जाखड़ को मेडिकल ऑफिसर की राह पर ले गई। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित ऑल इंडिया मेडिकल ऑफिसर परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त कर हापुड़ की आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले अरुण जाखड़ ने जिले का नाम रोशन किया है। अरुण को उम्मीद के अनुरूप सफलता मिली है। उनकी इच्छा है कि चिकित्सा के क्षेत्र में सिस्टम को दुरुस्त किया जाए। अरुण ने अपनी सफलता के मंत्र साझा किए। पेश है, उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश :
इस परीक्षा के बारे में जानकारी दें?
ऑल इंडिया मेडिकल ऑफिसर परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा किया जाता है। यह परीक्षा मई, 2014 में कराई गई थी। परीक्षा में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राएं बैठते हैं। हर साल हजारों की संख्या में विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं। परीक्षा में लिखित परीक्षा और फिर साक्षात्कार के माध्यम से चयन किया जाता है। इसलिए दोनों स्तर पर खुद को मजबूत करना बहुत जरूरी है।
परीक्षा पास कर कैसा लग रहा है?
दरअसल मैं बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहता था। मेरे मन में था कि मैं लोगों की सेवा करूं। लेकिन जैसे- जैसे मैं बड़ा हुआ, तो पता चला कि चिकित्सा सिस्टम में ढेरों खामियां हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतते हैं और मरीज परेशान होते हैं। फिर मैंने सोचा कि सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है। इसी सोच से मैंने मेडिकल ऑफिसर परीक्षा की तैयारी शुरू की। अब मेरा लक्ष्य पूरा हो गया है, तो बेहद खुश हूं।
अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दें?
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मैंने हापुड़ के सेवन्थ डे स्कूल से 54 प्रतिशत के साथ 10वीं पास की और फिर मेरठ के गॉडविन पब्लिक स्कूल से 81 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा पास की। उसके बाद मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज से 62 प्रतिशत के साथ एमबीबीएस किया।
तैयारी कहां से की?
मैं सेल्फ स्टडी की। मैं रोजाना आठ घंटे पढ़ाई करता था। एमबीबीएस के सिलेबस और तैयारियों से इस परीक्षा की राह आसान हुई। तैयारियों के लिए एमबीबीएस की किताबों से मदद मिली।
परिवार का सहयोग कैसा रहा?
पूरा परिवार मेरे हर फैसले पर मेरा साथ देता है। डॉक्टर बनने का फैसला भी मेरा अपना था और ये भी। मेरे पापा ब्रजपाल सिंह पुलिस में इंस्पेक्टर हैं। हालांकि वह चाहते थे कि मैं पुलिस में रहकर सेवा करूं, लेकिन मुझे कुछ और ही पसंद था।
मेडिकल की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को क्या सलाह देंगे?
मेडिकल की राह आसान नहीं होती है, इसलिए खुद पर विश्वास करें। अपना आकलन करने के बाद ही इस राह को पकड़ें। जो विद्यार्थी इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उनसे कहूंगा कि प्रैक्टिकल सोच रखें। उत्तर देते समय उदाहरण, प्रेजेंटेशन का ध्यान रखें। खूब मेहनत करें। परिणाम के बारे में न सोचें। अच्छी तैयारी होगी, तो सकारात्मक फल मिल ही जाएगा। इंटरव्यू के लिए खुद को फ्रैंक बनाएं। शॉर्ट नोट्स बनाएं।
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मानव सेवा के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में कैरियर बनाने की ललक हापुड़ के रहने वाले अरुण जाखड़ को मेडिकल ऑफिसर की राह पर ले गई। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित ऑल इंडिया मेडिकल ऑफिसर परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त कर हापुड़ की आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले अरुण जाखड़ ने जिले का नाम रोशन किया है। अरुण को उम्मीद के अनुरूप सफलता मिली है। उनकी इच्छा है कि चिकित्सा के क्षेत्र में सिस्टम को दुरुस्त किया जाए। अरुण ने अपनी सफलता के मंत्र साझा किए। पेश है, उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश :
इस परीक्षा के बारे में जानकारी दें?
ऑल इंडिया मेडिकल ऑफिसर परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा किया जाता है। यह परीक्षा मई, 2014 में कराई गई थी। परीक्षा में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राएं बैठते हैं। हर साल हजारों की संख्या में विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं। परीक्षा में लिखित परीक्षा और फिर साक्षात्कार के माध्यम से चयन किया जाता है। इसलिए दोनों स्तर पर खुद को मजबूत करना बहुत जरूरी है।
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परीक्षा पास कर कैसा लग रहा है?
दरअसल मैं बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहता था। मेरे मन में था कि मैं लोगों की सेवा करूं। लेकिन जैसे- जैसे मैं बड़ा हुआ, तो पता चला कि चिकित्सा सिस्टम में ढेरों खामियां हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतते हैं और मरीज परेशान होते हैं। फिर मैंने सोचा कि सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है। इसी सोच से मैंने मेडिकल ऑफिसर परीक्षा की तैयारी शुरू की। अब मेरा लक्ष्य पूरा हो गया है, तो बेहद खुश हूं।
अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दें?
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मैंने हापुड़ के सेवन्थ डे स्कूल से 54 प्रतिशत के साथ 10वीं पास की और फिर मेरठ के गॉडविन पब्लिक स्कूल से 81 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा पास की। उसके बाद मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज से 62 प्रतिशत के साथ एमबीबीएस किया।
तैयारी कहां से की?
मैं सेल्फ स्टडी की। मैं रोजाना आठ घंटे पढ़ाई करता था। एमबीबीएस के सिलेबस और तैयारियों से इस परीक्षा की राह आसान हुई। तैयारियों के लिए एमबीबीएस की किताबों से मदद मिली।
परिवार का सहयोग कैसा रहा?
पूरा परिवार मेरे हर फैसले पर मेरा साथ देता है। डॉक्टर बनने का फैसला भी मेरा अपना था और ये भी। मेरे पापा ब्रजपाल सिंह पुलिस में इंस्पेक्टर हैं। हालांकि वह चाहते थे कि मैं पुलिस में रहकर सेवा करूं, लेकिन मुझे कुछ और ही पसंद था।
मेडिकल की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को क्या सलाह देंगे?
मेडिकल की राह आसान नहीं होती है, इसलिए खुद पर विश्वास करें। अपना आकलन करने के बाद ही इस राह को पकड़ें। जो विद्यार्थी इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उनसे कहूंगा कि प्रैक्टिकल सोच रखें। उत्तर देते समय उदाहरण, प्रेजेंटेशन का ध्यान रखें। खूब मेहनत करें। परिणाम के बारे में न सोचें। अच्छी तैयारी होगी, तो सकारात्मक फल मिल ही जाएगा। इंटरव्यू के लिए खुद को फ्रैंक बनाएं। शॉर्ट नोट्स बनाएं।
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