रचना यदुवंशी, एआरटीओ नोएडा: इनकी कहानी है महिलाओं के लिए एक मिसाल
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महिलाओं को लेकर हमारे समाज में एक अलग ही मत बना हुआ है। पैदा होने से लेकर उनकी पढ़ाई, लिखाई और शादी तक हर जगह कुछ न कुछ शर्त रखी जाती है। ऐसा लगता है जैसे देश को जब आजादी मिली थी तब शायद सिर्फ मर्दों को ही आजादी दी गई थी।
लेकिन वक्त बदला और महिलाओं ने भी अपने हक के लिए खड़ा होना शुरू किया और आज अपने-अपने क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसी ही एक महिला हैं, रचना यदुवंशी।
रचना वर्तमान में नोएडा में एआरटीओ के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन रचना का बचपन इतना आसान नहीं था। बचपन में रचना यदुवंशी के पिता का देहांत हो गया था। पिता के देहांत के बाद मां ने कहा कि घर का चूल्हा- चौका सीख लो। जैसा कि सामान्यतः हमारे समाज में होता आया है।
लेकिन रचना को ये नामंजूर था...
उन्होंने अपनी मां से मना कर दिया कि नहीं मैं ये सब काम नहीं करूंगी। मुझे ऐसा काम करना है कि घर का सारा काम नौकर चाकर ही करेंगे।
रचना की जिद्द थी, घरवालों को मानना ही पड़ा। एक वो दिन था और एक आज का दिन है। रचना नोएडा में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। इनके पति राजेश यादव भी एक पीसीएस अधिकारी हैं। राजेश यादव वर्तमान में गाजियाबाद में एडीएम के पद पर कार्यरत हैं।
रचना अमर उजाला से बात चीत में कहती हैं कि उन्होंने जीवन में कभी अपने को कमजोर नहीं समझा। उन्होंने लड़कियों के लिए संदेश भी दिया कि जिस तरह से बचपन में जिद करने से माता-पिता हर चीज दिला देते हैं ठीक ऐसे ही जिद करनी चाहिए मुकाम जरूर हासिल होगा।
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