Padma Bhushan Sudha Murthy: समाजसेवा के क्षेत्र में सुधा मूर्ति को मिलेगा पद्म भूषण, 2006 में मिला था पद्मश्री
Padma Bhushan Sudha Murthy: सुधा मूर्ति वर्तमान में इंफोसिस फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में कार्य करती हैं। वे मुख्य रूप से अपने सामाजिक, परोपकारी कार्यों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कन्नड़, मराठी और अंग्रेजी भाषा में उत्कृष्ट पुस्तकें भी लिखी हैं।
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Padma Bhushan Sudha Murthy: भारत सरकार ने इस साल पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस सूची सामाजिक क्षेत्र में अति विशिष्ट सेवा कार्यों के लिए पद्मश्री सुधा मूर्ति को पद्म भूषण सम्मान से नवाजने का एलान किया है। सुधा मूर्ति (नी कुलकर्णी) महज इंजीनियरिंग शिक्षक ही नहीं बल्कि एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका हैं।
वे इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति की पत्नी हैं। सुधा मूर्ति वर्तमान में इंफोसिस फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में कार्य करती हैं। वे मुख्य रूप से अपने सामाजिक, परोपकारी कार्यों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कन्नड़, मराठी और अंग्रेजी भाषा में उत्कृष्ट पुस्तकें भी लिखी हैं।
Sudha Murty का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सुधा मूर्ति का जन्म 19 अगस्त, 1950 को कर्नाटक में शिगगांव, हावेरी में डॉ आरएच कुलकर्णी और विमला कुलकर्णी के यहां हुआ था। वे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (केएलई टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी) से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की और उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। सुधा मूर्ति ने जब वह पुणे में टेल्को में एक इंजीनियर के रूप में कार्यरत थीं, तब एनआर नारायण मूर्ति से विवाह किया था। वे वे बैंगलोर विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं। वह क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहीं थीं।
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Sudha Murty की सामाजिक गतिविधियां
उन्होंने इंफोसिस फाउंडेशन की स्थापना की और वर्तमान में अध्यक्ष हैं। 1996 में, सुधा मूर्ति ने एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। ट्रस्ट ने अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 2,300 से ज्यादा घर बनाए हैं। उनके पास प्रत्येक स्कूल के लिए एक पुस्तकालय का भी सपना है और अब तक उन्होंने 70,000 से अधिक पुस्तकालय स्थापित किए हैं। उनके संगठन ने अब तक 16,000 से अधिक सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण भी कराया है। सेवा कार्यों के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा था और अब 2023 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।
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