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पोलियो को मात देकर 11वीं पास ये लड़का आज चलाता है करोड़ों का बिजनेस

Mon, 06 Mar 2017 05:38 PM IST
amarujala.com- Presented by: शिवेंदु शेखर
amarujala.com- Presented by: शिवेंदु शेखर Updated Mon, 06 Mar 2017 05:38 PM IST
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kalpesh choudhary the man who runs diamond trading business is a divyang
कल्पेश चौधरी

एक बेहद ही प्यारी और हौसला अवजाई करने वाली पंक्ति है। जब भी सुनने को मिलती है धमनियों में रक्त संचार आसमान छूने लगता है। हाथ-पैर भागने को तैयार हो जाते हैं जब तक कि मंजिल ना मिल जाए।

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लाइन है...


'मंजिल उनको मिलती है जिनके सपनों में जान होती है 
पंखों से कुछ नहीं होता मेरे दोस्त हौसलों से उड़ान होती है'

इन पंक्तियों को सूरत के रहने वाले कल्पेश चौधरी ने सच कर दिखाया है। गुजरात के सूरत शहर में कल्पेश का हीरो का कारोबार है। कल्पेश की शादी भी हो चुकी है और दो बच्चे भी हैं। कल्पेश की डायमंड ट्रेडिंग कंपनी का टर्न ओवर वार्षिक रूप से करीब 10 करोड़ रुपये है। 

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जिंदगी से उन्हें कोई शिकायत नहीं है लेकिन कल्पेश के इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी बिल्कुल आसान नहीं थी। आइए आपको बताते हैं कल्पेश की कहानी।

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5 महीने की उम्र में कल्पेश को हो गया था पोलियो

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जब कल्पेश 5 महीने के थे तो वो भयानक रूप से बीमार पड़ गए। बीमारी के साथ-साथ पोलियो ने भी उनके शरीर को जकड़ लिया। डॉक्टरों ने बताया कि एक पैर अब कभी काम नहीं करेगा। कल्पेश एक पैर से दिव्यांग हो चुके थे। 

लेकिन कहते है न कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। कल्पेश ने बड़े होते ही अपनी इस समस्या को समझ लिया था कि उन्हें इसके सामने कभी घुटने नहीं टेकने, हार नहीं माननी। 

आर्थिक परेशानी के चलते कल्पेश ने केवल 11वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद कल्पेश अपने पिता के साथ बिजनेस में लग गए। कल्पेश जब 18 साल के हुए तो उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद कल्पेश के ऊपर अपने परिवार की जिम्मेदारी आ गई। बहन की शादी, भाई की पढ़ाई, परिवार चलाने का बोझ। 

पिताजी के बिजनेस पर शुरू किया काम

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कल्पेश का परिवार

कल्पेश ने अपने पिता जी के बिजनेस पर काम करना शुरू कर दिया। बिजनेस बहुत अच्छा नहीं चल रहा था लेकिन कल्पेश ने उसमें अपना पूरा जोर लगा दिया। उनकी शारीरिक कमजोरी उन पर हावी नहीं हो सकी और आज कल्पेश के डायमंड ट्रेडिंग बिजनेस के एक साल का टर्न ओवर करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। 

कल्पेश अपने बिजनेस में मार्केट की स्टडी करते हैं फिर उसके हिसाब से जिसे जहां जरूरत होती है वहां डायमंड सप्लाई कराया जाता है। कल्पेश का कहना है कि हमारी सोसाइटी में दिव्यांगों को नॉर्मल लाइफ नहीं मिलती है जबकि हमें उन्हें एक नॉर्मल लाइफ जीने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। 

कल्पेश की पत्नी का नाम दीपाली है। उनसे वो एक NGO के थ्रू मिली थी और वो भी दिव्यांग ही हैं। लेकिन दोनों एक दूसरे से बहुत खुश हैं। अब कल्पेश दिव्यांगों के लिए एक वेबसाइट बनाने की भी तैयारी कर रहे हैं। 2015, अगस्त में कल्पेश को मुंबई में मिस्टर व्हील चेयर के अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। 

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