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JEE Advanced 2023: ऑटोचालक की बेटी ने क्रैक की जेईई एडवांस्ड, बनेगी आईआईटीयन; पढ़ें 'कशिश' की सफलता की कहानी

Tue, 27 Jun 2023 04:43 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडेय Updated Tue, 27 Jun 2023 04:43 PM IST
सार

JEE Advanced Topper 2023: जेईई एडवांस्ड 2023 का रिजल्ट जारी हो चुका है। कोटा की एक बेटी ने तमाम मुश्किलों से लड़ते हुए इस परीक्षा को पास किया है।

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JEE Advanced result 2023 out know about Topper kashish success story to become IITian
jee advanced Topper kashish - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

JEE Advanced Topper 2023: जेईई एडवांस्ड 2023 का रिजल्ट जारी हो चुका है। कोटा की एक बेटी ने तमाम मुश्किलों से लड़ते हुए इस परीक्षा को पास किया है। यही नहीं यहां के बच्चे अच्छी पढ़ाई कर संघर्ष से सफलता तक के सफर को सिद्ध कर रहे हैं। ये कहानी है कोटा की बेटी कशिश की। कशिश ने तमाम परिस्थितियों से लड़ते हुए खुद को साबित किया। देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक आईआईटी प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस्ड 2023 को क्रैक किया। कशिश अपने परिवार की पहली आईआईटीयन बनेगी। उसकी सफलता से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। कशिश ने जेईई-एडवांस्ड में कैटेगिरी रैंक 1216 प्राप्त की है। वहीं जेईई-मेन में कैटेगिरी रैंक 5557 थी।

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ऑनलाइन काम होने से दुकान बंद 

कशिश ने बताया कि हम चार बहनें हैं और मैं सबसे बड़ी हूं। पिता भूपेन्द्र पहले छावनी में एक किराए की दुकान में मोबाइल रिचार्ज और नल-बिजली के बिल जमा करने का काम करते थे, लेकिन सारा काम ऑनलाइन होने से उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद परिवार का खर्चा चलाने के लिए करीब पांच साल पहले उन्होनें लोन लेकर ऑटो रिक्शा लिया था, जिसकी किस्तें अभी तक चल रही हैं।

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दादा हैं वॉचमैन

कशिश ने बताया कि मेरे दादा यशराज 85 वर्ष की उम्र में भी परिवार को पालने के लिए मेहनत कर रहे हैं। वे वॉचमैन हैं। मां वंदना भी घर पर सिलाई-कढ़ाई का काम करती हैं। छोटी बहन 12वीं कक्षा में है एवं उससे छोटी दो बहनें स्कूल में पढ़ रही हैं। घर आधा कच्चा-पक्का है। मैंने 10वीं कक्षा 95 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 91 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। इसके बाद जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड क्रैक किया। 

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पिता के ब्रेन हैमरेज से बिगड़े हालात

कशिश ने बताया कि पापा ने दुकान बंद करने के बाद ऑटो लिया था। जैसे-तैसे कर परिवार की गाड़ी चल रही थी। पापा को हाई बीपी है, पैसों की तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों में इतने उलझे रहते थे कि नियमित दवाईयां नहीं लेते थे,पिछले साल 31 दिसंबर 2022 को अचानक बीपी बढ़ा और दिमाग की नस फट (ब्रेन हैमरेज) गई। पापा करीब डेढ़ महीने अस्पताल में रहे। मेरी बड़ी बुआ ने उनका इलाज कराया। आज छह महीने हो गए लेकिन, पापा अभी भी पूरी तरह फिट नहीं हुए। सहारा लेकर कुछ कदम चल पाते हैं। इसी बीच हाथ में भी फ्रैक्चर हो गया। ऑटो बंद होने से थोड़ी बहुत कमाई होती थी, वो भी बंद हो गई। एक बुआ भी हमारे साथ रहती हैं, वे ब्यूटी पॉर्लर चलाती हैं, जिससे रोज का पेट भरने जितना जुगाड़ हो पाता है।

सुबह पापा का आपरेशन, शाम को कोचिंग

कशिश ने बताया कि परिवार की स्थिति कमजोर है और मैं यह बात अच्छे से जानती हूं कि पढ़ाई करके ही स्थिति को मजबूत किया सकता है। पापा की तबीयत काफी खराब हो गई थी। बावजूद इसके मैंने जेईई की तैयारी के लिए कोचिंग जाना बंद नहीं किया। पापा की देख-भाल के साथ एग्जाम की तैयारी भी करनी थी। ब्रेन हैमरेज के बाद सुबह पापा का ऑपरेशन हुआ और मैं उसी दिन शाम वाले बैच में पढ़ने कोचिंग पहुंच गई थी। पहले तो पापा कोचिंग छोड़ने-लेने आते थे, लेकिन बाद में ये सब मुझे ही करना पड़ा।

कोचिंग से मिली मदद

कशिश के दादा यशराज ने बताया कि बच्चों को अच्छा पढ़ाना ही परिवार की जिद है। हम सब इसमें साथ भी हैं। कशिश के पापा ग्रेजुएट हैं और मां भी पोस्ट ग्रेजुएट है। चारों बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं, इसलिए स्थिति नहीं होते हुए भी उन्होनें प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया। फीस के लिए भी उन्होनें कई लोगों से कर्जा लिया। कोचिंग के लिए अच्छे संस्थान में एडमिशन लेना चाहती थी तो हमने स्थिति के बारे में बताया तो कोचिंग वालों ने मेरी फीस आधी कर दी।

हमारा सपना सच हो जाए

कशिश की मां वंदना कुमारी ने बताया कि हमारा परिवार सिर्फ बच्चों की पढ़ाई के लिए ही जी रहा है। बीमारी से पहले इनके पिता खूब मेहनत करते थे। अभी ठीक से चल नहीं पाते। कशिश ने एक पड़ाव पार कर लिया, इसकी बहुत खुशी है। कशिश का करिअर बनता है तो यह पूरे परिवार के लिए अच्छा होगा। 

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