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दादा बनने की उम्र में नागेश ज्वाइन करेंगे डीयू में इंग्लिश ऑनर्स

Tue, 23 May 2017 12:15 PM IST
amarujala.com- Presented by: शिवेन्दु शेखर
amarujala.com- Presented by: शिवेन्दु शेखर Updated Tue, 23 May 2017 12:15 PM IST
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at the age of 66 nagesh is still ready to learn new languages in du
डीयू - फोटो : TOI

सोमवार को जब डीयू कैंपस में छात्रों के लिए ओपन डे सेशन चल रहा था तब वहां सेशन अटेंड करने के लिए एक 66 साल का जवान आदमी भी पहुंचा हुआ था। इनका नाम था नागेश चड्डा। नागेश भी वहां अपनी क्वेरी के लिए ही वहां पहुंचे थे। इन्हें एमए उर्दू में दाखिले को लेकर सवाल-जवाब करने थे।  इससे पहले वो कैंपस अपना एक सर्टिफिकेट लेने पहुंचे थे।

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जब वो यहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि कैंपस में ओपन डे सेशन चल रहा है और उन्होंने इसका फायदा उठा लेना ही बेहतर समझा।  वैसे तो सेशन अटेंड करने के बाद इन्हें पता चला कि यूनिवर्सिटी में एमए उर्दू नाम का कोई कोर्स नहीं चलाया जाता लेकिन इन्होंने इस उम्र में भी अपने पढ़ने और रोज नया सीखने की ललक के बारे में बताया।  
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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक नागेश ने बताया कि इनके पिता को भाषा से बहुत लगाव था इसीलिए वो अपने बच्चों को भी लैंग्वेज सीखने के लिए जोर दिया करते थे। वो एलआईसी के लिए फिजी में काम करते थे। लेकिन कम उम्र में ही उनकी मौत हो गई थी। जिसके बाद नागेश को उनके जगह पर नौकरी मिल गई।  
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नागेश बताते हैं कि मैं अपने पिता के साथ फिजी मे ही रहता था। वहीं से मैंने अपनी इंजीनियरिंग कंप्लीच की। लेकिन पिता के मौत के बाद एलआईसी के लिए काम करना शुरू कर दिया।  

कुछ समय बाद उन्होंने फिर से बीकॉम में दाखिला ले लिया और इसके बाद अपनी पुरानी नौकरी छोड़कर उन्होंने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च ज्वाइन कर लिया। जहां उन्होंने तकरीबन 20 सालों तक काम किया। 2011 में यहां से वो पीआरओ के पोस्ट से रिटायर हुए।  

उन्होंने बताया कि मेरे रिटायरमेंट के बाद मेरे बच्चों ने मुझसे कहा कि मैंने बहुत कर लिया अब मुझे वो सब करना चाहिए जो मेरा दिल चाहे। इसके बाद मुझे याद आया कि मुझे उर्दु सीखनी चाहिए और मैंने डीयू के उर्दु डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन ले लिया।

आज कल वो अपने उर्दु एडवांस डिप्लोमा कोर्स के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे थे कि अब उन्हें एमए में दाखिला मिल जाएगा। लेकिन यूनिवर्सिटी में ऐसा कोई कोर्स संचालित नहीं होता है।  


यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस के पास ही रूपनगर में रहने वाले नागेश कहते हैं कि अब मैं जर्मन या फोटोग्राफी जैसे किसी कोर्स के लिए एनरोल करूंगा जैसा कि मुझे किसी ने यूनिवर्सिटी में ही बताया था। इसके अलावे वो थोड़े दुखी भी होते हैं कि यूनिवर्सिटी में सीनियर सिटीजन के लिए कोई स्पेशल प्रोवीजन नहीं है।  

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