UGC LOCF: एसएफआई ने डीयू के कुलपति को सौंपा ज्ञापन, लर्निंग आउटकम्स-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क 2025 का किया विरोध
UGC Learning Outcomes Framework 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हाल ही में जारी किए गए लर्निंग आउटकम्स-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क का विरोध करते हुए कुलपति को ज्ञापन सौंपा।
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Delhi University: दिल्ली विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने हाल ही में जारी किए गए लर्निंग आउटकम्स-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क (LOCF) 2025 का विरोध करते हुए कुलपति को ज्ञापन सौंपा।
दिल्ली विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की यूनिट ने गुरुवार को कुलपति को एक ज्ञापन सौंपा और हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए लर्निंग आउटकम्स-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क (LOCF), 2025 का विरोध किया।
इस मामले पर विश्वविद्यालय की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत स्वायत्तता पर खतरा
एसएफआई द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह फ्रेमवर्क, उच्च शिक्षा के "मानकीकरण और सुधार" के लिए एक सुधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन यह संस्थानों की स्वायत्तता, शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वविद्यालयों के लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए खतरा है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की छात्र शाखा ने आरोप लगाया कि एलओसीएफ, शिक्षा प्रणाली के "सांप्रदायिकीकरण, व्यावसायीकरण और निगमीकरण" के भाजपा-आरएसएस के एजेंडे से जुड़ा है।
इसने दावा किया कि यह रूपरेखा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से ली गई है और सभी विषयों में "भारतीय ज्ञान प्रणाली" को इस तरह से सम्मिलित करती है जो विविध संस्कृतियों और हाशिए की आवाजों को दरकिनार करते हुए उच्च-जाति की हिंदू परंपराओं को बढ़ावा देती है।
शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप
एसएफआई-हंसराज के सचिव असिकुल ने कहा, "एलओसीएफ वैज्ञानिक दृढ़ता और तर्कसंगत जांच को कमजोर करता है। यह ढांचा सावरकर जैसे आरएसएस विचारकों का महिमामंडन करता है, जबकि भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों की अनदेखी करता है और इतिहास को हिंदुत्ववादी आख्यान के अनुरूप ढालता है।"
छात्र संघ ने इस ढांचे की आलोचना करते हुए कहा कि यह साक्ष्य-आधारित शिक्षा की जगह "प्राचीन ज्ञान की आड़ में असत्यापित दावों" को लाकर छद्म विज्ञान को बढ़ावा दे रहा है।
SFI ने छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी की मांग की
इसने कहा कि सुधार छात्रों, शिक्षकों या विशेषज्ञों के साथ सार्थक परामर्श के बिना "जल्दबाजी" में किया जा रहा है, और विश्वविद्यालयों को सांप्रदायिक और धार्मिक पूर्वाग्रहों से मुक्त अपने पाठ्यक्रम तैयार करने की छूट देने का आह्वान किया।
एसएफआई ने कहा, "शैक्षणिक स्वतंत्रता, आलोचनात्मक सोच और समावेशिता को बाजार-संचालित, वैचारिक एजेंडों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
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