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Exam Phobia: एग्जाम फोबिया को कहें अलविदा, सही प्लानिंग अपनाएं, तनाव नहीं आत्मविश्वास के साथ दें परीक्षा

Wed, 18 Feb 2026 09:26 AM IST
शाहीन परवीन जितेंद्र सिंह, कॅरिअर काउंसलर
जितेंद्र सिंह, कॅरिअर काउंसलर Published by: शाहीन परवीन Updated Wed, 18 Feb 2026 09:26 AM IST
सार

Board Exam 2026: परीक्षा का नाम सुनते ही कई छात्रों को घबराहट होने लगती है, जिसे हम एग्जाम फोबिया कहते हैं। हालांकि परीक्षा का थोड़ा तनाव स्वाभाविक है, लेकिन सही टाइम मैनेजमेंट, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच से इसे आसानी से संतुलित किया जा सकता है। आत्मविश्वास के साथ दी गई परीक्षा ही सफलता की राह खोलती है।

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Overcome Board Exam Stress with Smart Planning, Stay Calm and Perform at Your Best
Exam - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Exam Stress: भारतीय परिवेश में परीक्षाओं को केवल शैक्षणिक मूल्यांकन नहीं, बल्कि 'सामाजिक प्रतिष्ठा' का प्रतीक मान लिया गया है। यही कारण है कि परीक्षा का समय आते ही अनेक विद्यार्थी तनाव, चिंता और डर से घिर जाते हैं। उनके लिए यह दौर किसी मानसिक युद्ध जैसा बन जाता है। सच तो यह है कि भय केवल प्रश्न-पत्र का नहीं होता, बल्कि उससे जुड़ी अपेक्षाओं, तुलना और भविष्य की चिंताओं का होता है। इसलिए आवश्यक है कि हम इस तनाव के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारणों को समझें और समाधान की ओर बढ़ें।

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डर के कारण

भारतीय विद्यार्थियों में परीक्षा भय के पीछे सबसे बड़ा कारण तुलना की संस्कृति है। अक्सर बच्चों की तुलना पड़ोस या रिश्तेदारों के अधिक अंक लाने वाले बच्चों से की जाती है, जिससे उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ता है। सीमित अवसर और बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी तनाव को कई गुना बढ़ा देती है। विद्यार्थियों को लगता है कि थोड़ी- सी असफलता उनका पूरा भविष्य तय कर देगी। हमारी शिक्षा प्रणाली में अंकों पर अत्यधिक जोर भी दबाव को बढ़ाता है। परिणामस्वरूप सीखने की प्रक्रिया आनंद के बजाय अंक प्राप्ति की दौड़ बन जाती है। इसके साथ ही अभिभावकों की अवास्तविक अपेक्षाएं बच्चों के मन पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।

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तनाव प्रबंधन के प्रभावी उपाय

तनाव को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं, लेकिन उसे संतुलित अवश्य किया जा सकता है। सबसे पहले एक व्यावहारिक टाइम टेबल बनाएं, जिसमें पढ़ाई के साथ छोटे-छोटे ब्रेक शामिल हों। लगातार कई घंटे पढ़ने से मस्तिष्क थक जाता है। इसलिए सात से आठ घंटे की नींद लें। केवल पढ़ने के बजाय लिखकर अभ्यास करना और पुराने प्रश्न-पत्र हल करना आत्मविश्वास बढ़ाता है। हल्की शारीरिक गतिविधियां जैसे टहलना, योग मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। संतुलित भोजन और पर्याप्त पानी शरीर व मन को सक्रिय रखते हैं।

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अभिभावक सहयोग दें, दबाव नहीं

तनाव को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं, लेकिन उसे संतुलित अवश्य किया जा सकता है। सबसे पहले एक व्यावहारिक टाइम टेबल बनाएं, जिसमें पढ़ाई के साथ छोटे-छोटे ब्रेक शामिल हों। लगातार कई घंटे पढ़ने से मस्तिष्क थक जाता है। इसलिए सात से आठ घंटे की नींद लें। केवल पढ़ने के बजाय लिखकर अभ्यास करना और पुराने प्रश्न-पत्र हल करना आत्मविश्वास बढ़ाता है। हल्की शारीरिक गतिविधियां जैसे टहलना, योग मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। संतुलित भोजन और पर्याप्त पानी शरीर व मन को सक्रिय रखते हैं।

तनाव कम करने के 'गोल्डन रूल्स'

निश्चित अंतराल पर ब्रेक लें, पानी पिएं और संक्षिप्त नोट्स बनाकर पुनरावृत्ति करें। नकारात्मक सोच फैलाने वालों से दूरी बनाए रखें। जब विद्यार्थी, अभिभावक और समाज मिलकर परीक्षा को केवल एक मूल्यांकन प्रक्रिया मानेंगे, तभी भय कम होगा। सही दृष्टिकोण और संतुलित तैयारी से एग्जाम फोबिया को सचमुच अलविदा कहा जा सकता है।

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