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KEAM 2025: दोबारा जारी होगी केईएएम की रैंक लिस्ट, हाईकोर्ट ने प्रोस्पेक्टस में किए गए बदलाव को बताया अवैध

Wed, 09 Jul 2025 07:10 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 09 Jul 2025 07:10 PM IST
सार

KEAM 2025: केरल हाईकोर्ट ने केईएएम 2025 प्रोस्पेक्टस में अंतिम समय पर किए गए बदलाव को अवैध ठहराया। कोर्ट ने रैंक लिस्ट पुराने नियमों के अनुसार दोबारा जारी करने का आदेश दिया। छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए।
 

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Kerala HC cancels KEAM rule change, orders fresh rank list based on original February guidelines
केरल उच्च न्यायालय (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

KEAM 2025: केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार द्वारा केईएएम 2025 (केरल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और मेडिकल एंट्रेंस एग्जामिनेशन) के प्रोस्पेक्टस में आखिरी समय पर किए गए बदलाव को 'अवैध, मनमाना और अनुचित' करार दिया है। कोर्ट ने रैंक लिस्ट दोबारा जारी करने के निर्देश दिए हैं।

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यह आदेश उन सीबीएसई छात्रों की याचिका पर आया है जिन्होंने इस वर्ष केईएएम परीक्षा दी थी। इन छात्रों ने दावा किया कि 1 जुलाई को रैंक लिस्ट जारी होने से ठीक एक घंटा पहले प्रोस्पेक्टस में बदलाव कर दिया गया, जिससे उम्मीदवारों के अंतिम स्कोर की गणना की पद्धति बदल गई।
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न्यायमूर्ति डी के सिंह ने अपने आदेश में कहा कि "परीक्षा समाप्त होने और रैंक लिस्ट जारी होने से केवल एक घंटे पहले प्रोस्पेक्टस में बदलाव करना पूरी तरह अनुचित, अवैध और मनमाना है।"

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पुराने नियम के अनुसार रैंक लिस्ट पुनः जारी करने का दिया निर्देश

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रैंक लिस्ट को पुनः उसी मूल फॉर्मूले के अनुसार जारी किया जाए, जिसे 19 फरवरी 2025 को प्रकाशित प्रोस्पेक्टस में बताया गया था।

कोर्ट के आदेश में कहा गया, "प्रोस्पेक्टस में किया गया यह बदलाव रद्द किया जाता है। एंट्रेंस एग्जामिनेशन कमिश्नर को निर्देश दिया जाता है कि वह 19 फरवरी 2025 को जारी प्रोस्पेक्टस के अनुसार नई रैंक लिस्ट जारी करें।"

कोर्ट ने अंतिम समय में लिए गए निर्णय को बताया संदिग्ध

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रारंभिक दृष्टि से ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ने रिजल्ट देखने के बाद पाया कि केरल स्ट्रीम के छात्रों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। इसलिए, अपने निर्वाचन क्षेत्र को संतुष्ट करने के लिए एक दुर्भावनापूर्ण और मनमाना निर्णय लेकर प्रोस्पेक्टस में एक घंटे पहले बदलाव किया गया।

कोर्ट ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए कहा कि "इस प्रकार का कार्य पूर्ण रूप से मनमाना, अवैध, अनुचित है और किसी भी आधार पर स्वीकार्य नहीं हो सकता।"

कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केरल की उच्च शिक्षा मंत्री आर. बिंदु ने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी और आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय की जाएगी।

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