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जम्मू-कश्मीर के छात्रों को निकाला हॉस्टल से बाहर, यूनिवर्सिटी के बाहर धरने पर बैठे

Tue, 08 Aug 2017 04:07 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Tue, 08 Aug 2017 04:07 PM IST
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JAMMU KASHMIR STUDENTS Beyond the hostels, sitting on the dock outside the university
यूनिवर्सिटी के बाहर धरने पर बैठे ​जम्मू कश्मीर के छात्र - फोटो : Vishnu Sharma
प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम के तहत जम्मू-कश्मीर से यहां प्रोफेशनल कोर्सेज की पढ़ाई करने आए करीब तीन सौ से ज्यादा छात्रों को उनके यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा हॉस्टल से बाहर निकालने का मामला सामने आया है।
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पिछले करीब एक सप्ताह से इधर-उधर भटकने के बाद बड़ी संख्या में जम्मू-कश्मीर के ये पीड़ित छात्र आज यूनिवर्सिटी के बाहर धरने पर बैठ गए। वहीं, हॉस्टल से निकाले गए करीब 50 छात्रों के नई दिल्ली स्थित आॅल इंडिया काउंसिल फॉर टैक्नीकल एजुकेशन के आॅफिस पर गुहार लेकर पहुंचने की जानकारी है।
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धरने में मौजूद जम्मू निवासी अमन ने बताया कि प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम के तहत जम्मू-कश्मीर के रहने वाले करीब साढ़े चार सौ छात्रों ने वर्ष 2014-15 में जगतपुरा स्थित सुरेश ज्ञानविहार यूनिवर्सिटी में विभिन्न प्रोफेशनल और अन्य डिग्री कोर्सेज में एडमिशन लिया था।
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अटके छात्र, अब यूं रहने पर मजबूर

JAMMU KASHMIR STUDENTS Beyond the hostels, sitting on the dock outside the university
हॉस्टल से बाहर छात्र - फोटो : Vishnu Sharma
जानकारी के मुताबिक तीन साल से ये छात्र यूनिविर्सटी के ही हॉस्टल में रह रहे थे। स्कॉलरशिप स्कीम में नई दिल्ली स्थित आॅल इंडिया काउंसिल फॉर टैक्नीकल एजुकेशन द्वारा इन छात्रों की पढ़ाई का खर्चा उठाया जाता है।

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि कुछ महिने पहले ही एआईसीटीए ने बताया कि कुछ कोर्सेज का पैसा इस स्कॉलरशिप स्कीम के तहत अप्रूव्ड नहीं हुआ है।

इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से कोर्स एजुकेशन के अलावा अन्य खर्चे उठाने से इंकार कर दिया और इस साल 1 अगस्त को ऐसे करीब तीन सौ से ज्यादा छात्रों को हॉस्टल से बाहर कर दिया।

वे पिछले एक सप्ताह से इधर-उधर भटक रहे हैं

JAMMU KASHMIR STUDENTS Beyond the hostels, sitting on the dock outside the university
कुछ की तबियत भी बिगड़ गई - फोटो : Vishnu Sharma
छात्रों के मुताबिक अचानक हुए इस फैसले से वे पिछले एक सप्ताह से इधर-उधर भटक रहे है। इनमें कुछ की तबियत भी बिगड़ गई है। उनका कहना है कि वे पिछड़े परिवारों से आते हैं।

ऐसे में उनके पास इतना रुपया नहीं है कि वे हॉस्टल से बाहर खाने व रहने का खर्च उठा सके। उनका कहना है कि जब कोर्स का रुपया ही अप्रूव्ड नहीं हुआ था तो तीन साल बाद क्यों बताया जा रहा है।
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