PM: ‘साहसी’ शब्दों के लिए हिब्रू विवि का पीएम मोदी को धन्यवाद, राजनयिक सफलता से शैक्षणिक साझेदारी की उम्मीद
Hebrew University of Jerusalem: जेरूसलम का हिब्रू विश्वविद्यालय ने इजरायली संसद में प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान दिए गए ‘साहसी’ शब्दों के लिए आभार जताया है। विश्वविद्यालय ने कहा कि इन शब्दों से दोनों देशों के बीच राजनयिक उपलब्धियों को गहरे शैक्षणिक सहयोग में बदलने की नई उम्मीद जगी है।
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PM Modi: यरूशलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय ने गुरुवार को इजरायली संसद (क्नेसेट) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए "साहसी शब्दों" के लिए उनका आभार व्यक्त किया और इस बात पर जोर दिया कि इससे "राजनयिक उपलब्धियों को गहन शैक्षणिक सहयोग में परिवर्तित किया जा सकता है।"
इजरायली विश्वविद्यालय ने कहा, "भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आज शाम क्नेसेट के मंच से आपके द्वारा दिए गए हार्दिक और साहसी शब्दों के लिए धन्यवाद।"
आतंकवाद के खिलाफ भारत की "शून्य सहिष्णुता" की अडिग नीति को दोहराते हुए, मोदी ने इजरायली सांसदों की तालियों के बीच कहा, "हम आपके दर्द को समझते हैं। हम आपके दुख में आपके साथ हैं। भारत इस समय और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ इजरायल के साथ खड़ा है।"
नालंदा संग अकादमिक सहयोग मजबूत
उन्होंने आगे कहा, "कोई भी कारण नागरिकों की हत्या को उचित नहीं ठहरा सकता। आतंकवाद को कोई भी चीज उचित नहीं ठहरा सकती।"
पिछले सप्ताह, हिब्रू विश्वविद्यालय ने नालंदा विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हिब्रू विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष प्रोफेसर गाय हार्पाज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने देश भर के संस्थानों के साथ अकादमिक संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत का दौरा किया।
विश्वविद्यालय ने कहा, "हमारे देशों के बीच गहरी साझेदारी अकादमिक क्षेत्र में भी परिलक्षित होती है।"
संयुक्त शोध और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ावा
बताया जाता है कि हार्पाज ने एशियाई अध्ययन विभाग और तुलनात्मक धर्म विभाग के प्रोफेसर एवियाटर शुल्मन के साथ इस रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा का नेतृत्व किया।
विश्वविद्यालय ने घोषणा की, "इन दो विश्व स्तरीय शिक्षण केंद्रों को एकजुट करके, प्रोफेसर शुल्मन और उनके सहयोगी भौगोलिक बाधाओं को तोड़ते हुए संयुक्त अनुसंधान, एकीकृत शिक्षण और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ावा दे रहे हैं।"
विश्वविद्यालय ने आगे कहा, "यरूशलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय में हम राजनयिक उपलब्धियों को गहन अकादमिक सहयोग में बदलते हैं जो दोनों देशों के साझा भविष्य को आकार देते हैं।"
इस विश्वविद्यालय ने कहा, "हम केवल अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन नहीं करते; हम उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी वैज्ञानिक उत्कृष्टता की नींव बनाते हैं।" अल्बर्ट आइंस्टीन इसके संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।
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