Research: भारतीय भाषाओं में शोध पत्र प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता, चयनित 200 संस्थानों को मिलेंगे दो-दो लाख
Indian Languages: भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा शोध पत्र प्रकाशन पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत देशभर के 200 चयनित संस्थानों को प्रत्येक दो-दो लाख रुपये की मदद दी जाएगी, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं में शोध को प्रोत्साहन मिल सके।
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Research Funding: भारतीय भाषाओं में पढ़ाई और शोध प्रकाशन वित्तीय सहायता भी मिलेगी। अब तक अंग्रेजी भाषा में ही शोध पत्र प्रकाशित करने की व्यवस्था थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यह अवसर देने का मकसद, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है। जबकि युवा अपनी भाषा में अच्छी तरह शोध पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रोफेसर योगेश सिंह ने बताया, तकनीकी कॉलेजों को क्षेत्रीय भाषाओं में सेमिनार, सम्मेलन और कार्यशाला आयोजित करने पर दो लाख रुपये मिलेंगे। एआईसीटीई ने भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए संस्थानों को चार करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
एआईसीटीई ने इसके लिए एआईसीटीई-वाणी (वाइब्रेट एडवोकेसी फॉर एडवांसमेंट एंड नर्चरिंग ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज) योजना का तीसरा संस्करण शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य नवीनतम तकनीकी प्रगति स्थानीय भाषाओं में सुलभ और क्षेत्रीय भाषाओं में एक मजबूत ज्ञान आधार स्थापित करना है। क्षेत्रीय भाषाओं में शोध पत्रों के प्रकाशन को प्रोत्साहित करते हुए यह पहल संस्थानों और उद्योगों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा देगी।
प्रति वर्ष चार करोड़ रुपये तक मिलेंगे
इस योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 4 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। पहले दी संस्करण की सफलता को देखते हुए अब 200 संस्थानों को सम्मेलन के लिए दो-दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की योजना तैयार की गई है। प्रत्येक चयनित संस्थान को यह सहायता दी जाएगी। ये कार्यक्रम दो से तीन दिनों की अवधि के होंगे और हिंदी, तमिल, तेलुगु, बांग्ला, मराठी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, उर्दू सहित 22 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित किए जाएंगे।
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